इस देश में हिजाब पर लगा प्रतिबंध, सरकार ने क्यों बताया 'उत्पीड़न का प्रतीक'?
Austria Hijab Ban: ऑस्ट्रिया की संसद के निचले सदन ने 14 साल से कम उम्र की लड़कियों के लिए स्कूलों में मुस्लिम हेडस्कार्फ (हिजाब) पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित कर दिया है। सरकार ने इस प्रतिबंध का समर्थन करते हुए इसे 'उत्पीड़न का प्रतीक' बताया है और तर्क दिया है कि यह नाबालिग लड़कियों की आजादी की रक्षा के लिए आवश्यक है।
हालांकि, मानवाधिकार समूहों और मुस्लिम संगठनों ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन करार दिया है। इस कानून पर अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि 2020 में भी एक पिछले प्रतिबंध को अदालत ने असंवैधानिक घोषित कर दिया था, जिसके बाद सरकार अब इसे संवैधानिक साबित करने के लिए नए सिरे से प्रयास कर रही है।

प्रतिबंध को लेकर उठा सवाल
सत्तारूढ़ गठबंधन (कंजर्वेटिव, फ्रीडम पार्टी, और लिबरल नियोस) ने तर्क दिया कि हिजाब, खासकर नाबालिगों के मामले में, उत्पीड़न और लैंगिक शोषण का प्रतीक है। लिबरल नियोस के यानिक शेट्टी ने कहा कि यह 14 साल तक की लड़कियों की आजादी की रक्षा करने के लिए है। वहीं, मानवाधिकार समूहों, जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल, ने इस कदम को नस्लवादी माहौल को बढ़ावा देने वाला बताया। संसद की सबसे छोटी पार्टी ग्रीन्स ने भी इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि यह संविधान और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
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2020 में भी रद्द हो चुका है प्रतिबंध
यह पहली बार नहीं है जब ऑस्ट्रिया ने स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध लगाया है। 2020 में, देश की संवैधानिक अदालत ने 10 साल से कम उम्र की लड़कियों पर लागू एक पिछले प्रतिबंध को अवैध करार दिया था। अदालत का फैसला था कि यह कानून मुसलमानों के साथ भेदभाव करता है और राज्य को धार्मिक रूप से तटस्थ रहने के अपने संवैधानिक कर्तव्य का पालन करना चाहिए। इस सिद्धांत के खिलाफ जाने के लिए सरकार को 'विशेष औचित्य' साबित करना होगा, जिसके लिए सरकार ने एक नया अध्ययन शुरू किया है।
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प्रतिबंध का समर्थन और विरोध किसने किया?
इस प्रतिबंध को तीन सत्तारूढ़ पार्टियों के गठबंधन और धुर-दक्षिणपंथी फ्रीडम पार्टी का समर्थन मिला। फ्रीडम पार्टी ने इसे स्कूल स्टाफ पर भी लागू करने की मांग की थी। हालांकि, संसद में केवल सबसे छोटी पार्टी ग्रीन्स ने इसका विरोध किया और इसे असंवैधानिक बताया। इसके अलावा, ऑस्ट्रिया के मुसलमानों का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन और मानवाधिकार समूहों ने भी इसकी कड़ी आलोचना की, इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन और मुसलमानों के प्रति नस्लीय पूर्वाग्रह को बढ़ावा देने वाला कदम बताया।
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सरकार ने क्यों बताया 'उत्पीड़न का प्रतीक'?
सत्ताधारी गठबंधन की सबसे छोटी पार्टी, लिबरल नियोस के नेता यानिक शेट्टी और कंजर्वेटिव पीपल्स पार्टी की इंटीग्रेशन जूनियर मंत्री क्लाउडिया प्लाकोल्म ने नाबालिगों के लिए हेडस्कार्फ़ को "उत्पीड़न का प्रतीक" बताया। उनका मानना है कि हिजाब लड़कियों को पुरुषों की 'बुरी नज़र' से बचाने का काम करता है, जो नाबालिगों के यौन शोषण को बढ़ावा देता है। सरकार का तर्क है कि यह प्रतिबंध लड़कियों की स्वतंत्रता को सीमित करने के बजाय उनकी स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए उठाया गया एक आवश्यक कदम है।












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