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भारत में इस तरह याद की गईं आसमा जहांगीर

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    आसमा जहांगीर
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    आसमा जहांगीर

    पाकिस्तान की जानी मानी वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता आसमा जहांगीर के निधन का शोक भारत में भी मनाया गया. पंजाब के शहर अमृतसर में रविवार को कई अमनपरस्त लोगों ने मौन रखा.

    इनका कहना था कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने वाला एक महत्वपूर्ण नाता अब ख़त्म हो गया.

    पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की पूर्व अध्यक्षा आसमा को शनिवार रात अचानक दिल का दौरा पड़ा था.

    मानवाधिकार कार्यकर्ता होने के अलावा आसमा जहांगीर को भारत और पाकिस्तान के बीच गहरे रिश्तों की वक़ालत करने वाली शख़्सियत के तौर पर जाना जाता है.

    वे हमेशा यही चाहती रहीं कि दोनों मुल्क आपस में मिलकर शांति स्थापित करें और ग़रीबों और ज़रूरतमंदों की भलाई के लिए काम करें.

    भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने के लिए आसमा जहांगीर ने काफी प्रयास किए. दोनों देशों के स्वतंत्रता दिवस के मौकों पर वाघा बॉर्डर पर होने वाली कैंडल लाइट यात्रा में भी वह हिस्सा लेती थीं.

    'शांति का मज़बूत स्तंभ'

    आसमा जहांगीर
    AFP
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    हर साल 'पुनर्ज्योत' नामक एनजीओ की तरफ से सांझ पीस फेस्टिवल मनाया जाता है. इस एनजीओ के अध्यक्ष साहिल संधू ने आसमा की मौत पर गहरा शोक जताया है. उन्होंने कहा, ''हम लोग एक ही मकसद के लिए काम कर रहे थे, दोनों देशों के लोगों को करीब लाना और शांति स्थापित करना.''

    फोकलोर एकेडमी में भी कार्यकर्ताओं ने आसमा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. इस एकेडमी के अध्यक्ष रमेश यादव ने आसमा की बहादुरी और ताकत को याद किया.

    26 नवंबर को हुए मुंबई हमले के बाद आसमा की भारत यात्रा को याद करते हुए यादव ने कहा, ''वे काफी मुखर कार्यकर्ता थीं, उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों में पाकिस्तान के हाथ होने की बात भी मानी थी, जबकि पाकिस्तान हमेशा इससे इंकार करता रहा.''

    यादव ने कहा, ''हमने आज शांति का एक मजबूत स्तंभ खो दिया.''

    'दक्षिण एशिया की आवाज़'

    आसमा जहांगीर
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    स्प्रिंगडेल्स एजुकेशन सोसाइटी की अध्यक्षा ने आसमा के साथ अपनी यादों के बारे में बताया, ''साल 2009 में मुझे आसमा से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. हमारी मुलाकात अमृतसर में मेरे घर में बनी लाइब्रेरी में हुई थी. वे पाकिस्तान के रूढ़िवादी समाज में नागरिक स्वतंत्रता की एक प्रमुख आवाज़ थीं. यहां तक कि उनके सबसे बड़े आलोचक और विरोधी भी अपनी मूलभूत स्वतंत्रता के लिए उनके ऋणि हैं.''

    आसमा की अमृतसर यात्रा के दौरान संदीप सिंह ने उनकी कुछ तस्वीरें खींची थी. संदीप ने भी आसमा के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा, ''ये आसमा ही थीं जिन्होंने पाकिस्तान से लेकर दक्षिण एशिया तक के गंभीर मुद्दे उजागर किए. वे सिर्फ एक देश की नहीं बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की आवाज़ थीं.

    आसमा जहांगीर
    AFP
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    एक रिपोर्टर के तौर पर मेरी मुलाकात आसमा से साल 2011 में हुई थी जब वे पाकिस्तान के 150 वकीलों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आई थीं, उन्होंने कहा था, 'हमें न्याय, कानून और लोकतंत्र के पक्ष में खड़ा होना होगा'.

    उन्होंने मुझसे यह भी कहा था कि भारत और पाकिस्तान के लोगों को एक दूसरे से जोड़ना बेहद ज़रूरी है क्योंकि इससे दोनों देशों के आपसी विचार और ख्याल साझा करने में मदद मिलेगी.

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    BBC Hindi
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    English summary
    Asma Jahangir remembered in this way in India

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