यूरोप के आसमान से फिर बरसेगा का 'आग का गोला', तो क्या ऊर्जा संकट के कारण इस बार बदतर हो जाएंगे हालात!
पूरी दुनिया इस वक्त ग्लोबल वॉर्मिंग की चपेट में है। कोई भी इससे अछूता नहीं है। इंसान ने अपनी महत्वकांक्षा की पूर्ति की लिए दुनिया को महाविनाश की ढेर पर ला खड़ा किया है।
लंदन, 8 अगस्त : यूरोपीय महाद्वीप जलवायु परिवर्तन की चपेट में है। पिछले दिनों लंदन में भीषण गर्मी खबरों की सुर्खियां बटोर रही थी। ब्रिटेन में अपातकाल की घोषणा कर दी गई थी। लोग बेहाल हुए जा रहे थे लेकिन गर्मी का पारा चढ़ता ही चला जा रहा था। वहीं, उत्तर-पश्चिम और मध्य यूरोप एक और भीषण गर्मी की चपेट झेलने जा रहा है (Another scorching heat wave is set to hit northwest and central Europe this week)। ब्रिटेन सहित यूरोप के कई देशों में बिजली की अवस्था खराब हो चली है। इससे जलवायु संकट के साथ-साथ ऊर्जा संकट की दोहरी मार झेलने की विकट परिस्थिति उत्पन्न हो गई है।

यूरोप के आसमान से फिर बरसेगा आग का गोला!
मैक्सार टेक्नोलॉजी एलएससी ने चेतावनी दी है कि, शुक्रवार को ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस में तापमान 36 डिग्री सेल्सियस (96.8 फारेनहाइट) तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। अब एक बार फिर गर्मी से बचने के लिए एसी, कूलर की मांग बढ़ने वाली है। हालांकि, सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि, रूस और यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोप समेत विश्व के कई देश इस समय ऊर्जा संकट की दौर से गुजर रहा है।

सूखे की मार झेल रहा यूरोप
वहीं, भीषण गर्मी की वजह से यूरोप के कई देश सूखे की चपेट में है और इस कारण यूरोप में मीठे जल के स्रोत सूखते जा रहे हैं। पानी के बिना लहलहाने वाले खेतों के सूखने की वजह से खाद्य संकट उत्पन्न होने का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है।
अत्यधिक गर्मी ने पहले से ही यूरोप के कई देशों को अपनी चपेट में ले रखा है, फ्रांस में जुलाई का महीना सबसे गर्म रहा, जिसके कारण वहां नहीं नदी और नाले सूखने की कगार पर पहुंच गए। वहीं इंग्लैंड भीषण गर्मी के कारण अपने 90 साल के इतिहास में सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है।

नदी बन गए नाले, ऊर्जा संकट झेल रहा यूरोप
भीषण गर्मी की वजह से फ्रांस की राइन नदी का जलस्तर काफी घट गया है, जिसके कारण जलमार्ग से व्यापार नहीं हो पाने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। इससे वहां के लोग आने वाले प्राकृतिक चुनौतियों का कैसे सामना करेंगे, सोचकर परेशान हो रहे हैं। लंदन की बात करें तो यहां मौसम ने आग लगा दी है। अत्यधिक गर्मी के कारण रेलवे लाइनों के टूटने का खतरा उत्पन्न हो गया है। इससे आवाजाही बाघित होने की आशंका प्रबल हो गई है। देश वैसे भी ऊर्जा संकट से जूझ रही है और ऐसे में गर्मी का बढ़ना उसके लिए दोहरी मार साबित हो सकती है। इससे देश की स्थिति बिगड़ जाएगी और आने वाले दिनों में कई और संकट भी उत्पन्न हो सकते हैं।

इंसान की महत्वकांक्षा दुनिया को ले डूबेगी
दुनिया के अधिकांश शक्तिशाली देश पर्यावरण के मानकों को ताक पर रखकर अपनी जरुरतों को पूरा करने में लगी हुई है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि, बड़े-बड़े परमाणु संयंत्र ऊर्जा संकट से बचने के लिए प्राकृतिक नियमों की अंदेखी कर नदियों में गर्म पानी छोड़ने को मजबूर हैं। हालांकि, इससे कई और संकट भी आने वाले दिनों में पैदा हो सकते हैं।

ऊर्जा संकट चरम पर
कई मौसम विज्ञानियों का कहना है कि, इस बार जुलाई के जैसे रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी नहीं होगी। बता दें कि, रूस प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में सबसे मजबूत राष्ट्र है। हालांकि, रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण यूरोप के सबसे बड़े आर्थिक मंदी की ओर जाने का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, जर्मनी और फ्रांस की बात करें तो यहां ऊर्जा संकट चरम पर है और हाल के दिनों में बिजली की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।

इंसान को संभलना होगा
रूस और यूक्रेन युद्ध को छोड़ भी दिया जाए तो जलवायु परिवर्तन के कारण विश्व में एक अलग से नकारात्मक बदलाव के संकेत देखने को मिल रहे हैं। ब्रिटेन समेत यूरोप के कई देश भीषण गर्मी की चपेट में है। वे ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में सबसे पहले जलवायु परिवर्तन से निपटना अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। अगर हम आज से ही धरती के विषय में सोचना शुरू नहीं करेंगे तो आने वाला वक्त हमें सावधान होने का भी वक्त नहीं देगा।
(Photo Credit: Twitter)












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