Ali Khamenei Funeral: Iran में जुटेंगे 30 देशों के बड़े नेता, भारत-रूस-चीन और पाकिस्तान से कौन-कौन जा रहा?
Ali Khamenei Funeral: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के राजकीय जनाजे में शामिल होने के लिए दुनिया भर के नेताओं का तेहरान पहुंचना शुरू हो गया है। भारत भी इस अहम मौके पर अपना उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेज रहा है। भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ईरान जाएंगे और देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, जनाजे की मुख्य रस्में 4 जुलाई 2026 से तेहरान में शुरू होंगी। यह कार्यक्रम करीब पांच दिनों तक चलेगा। इसके बाद 9 जुलाई 2026 को खामेनेई को उनके गृह नगर और पवित्र शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस दौरान कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि ईरान पहुंचेंगे।

भारत ने दिखाया मजबूत कूटनीतिक संदेश
भारत का प्रतिनिधिमंडल 3 जुलाई 2026 को तेहरान के लिए रवाना होगा। विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि इस कार्यक्रम में भारत की भागीदारी दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत रिश्तों को दर्शाती है। साथ ही यह भारत और ईरान के मजबूत राजनीतिक और आर्थिक संबंधों का भी प्रतीक है।
अभी तक कि खबर के मुताबिक बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ईरान जाकर अली खामेनेई के जनाजे में शामिल होंगे। उनके साथ विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा भी भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व करेंगे। इसके अलावा कांग्रेस की तरफ से सीनियर लीडर सलमान खुर्शीद भी तेहरान जाएंगे।
30 से ज्यादा देशों के नेता होंगे मौजूद
ईरान के इस राजकीय कार्यक्रम में भारत के अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी शामिल होंगे। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, उनके साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी तेहरान जाएगा। हाल के महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में आए उतार-चढ़ाव के बीच इस यात्रा को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, रूस की ओर से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव जनाजे में शामिल होंगे। वहीं चीन की तरफ से नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति के उपाध्यक्ष हे वेई भी ईरान पहुंचेंगे। ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन भी इस आयोजन में हिस्सा लेंगे।
ईरानी गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस कार्यक्रम में 30 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा करीब 90 देशों के धार्मिक नेताओं और अन्य प्रतिनिधियों के भी तेहरान पहुंचने की उम्मीद है।
ईरान में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी
खामेनेई के निधन के बाद ईरान में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने देशवासियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में जनाजे में शामिल होकर राष्ट्रीय एकता का संदेश दें। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता हमेशा कठिन समय में एकजुट रही है और विदेशी दबाव के सामने कभी नहीं झुकी। पांच दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान तेहरान से मशहद तक सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां विदेशी प्रतिनिधियों और लाखों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी कर रही हैं।
पश्चिम एशिया की राजनीति के लिए अहम मौका
खामेनेई का निधन सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की राजनीति के लिए एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। जनाजे के दौरान दुनिया के कई बड़े नेता तेहरान में मौजूद रहेंगे, जिससे नए नेतृत्व के साथ कूटनीतिक बातचीत और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत की इस कार्यक्रम में भागीदारी यह दिखाती है कि वह पश्चिम एशिया में अपने संतुलित कूटनीतिक रिश्तों को बनाए रखना चाहता है। भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी और ऐतिहासिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। ऐसे में इस संवेदनशील मौके पर भारत की मौजूदगी दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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