पिता Ali Khamenei की जनाजे में नहीं जाएंगे बेटे Mojtaba, Israel का डर या टूट गए हैं पैर! क्या है असली वजह?
Ali Khamenei Funeral: ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं। लेकिन इस बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है। भारत में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने बताया कि खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई अपने पिता की अंतिम विदाई में सार्वजनिक रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे। इजरायल के साथ जारी तनाव और सुरक्षा खतरे को देखते हुए ईरानी एजेंसियां कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं।
दिल्ली से तेहरान रवाना होने से पहले दी अहम जानकारी
अयातुल्ला हकीम इलाही ने दिल्ली से तेहरान रवाना होने से पहले कहा कि वहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई खुद आम लोगों के बीच जाकर अपने पिता को अंतिम विदाई देना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा अधिकारियों ने इसे बेहद खतरनाक माना है। मौजूदा हालात में उनकी सुरक्षा की पूरी गारंटी देना संभव नहीं है। यही वजह है कि उनके सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना बहुत कम मानी जा रही है।

ईरान-इजरायल तनाव के बीच हो रहा जनाजे
अमेरिका और इजरायल के हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ऐसे माहौल में ईरान कई दिनों तक चलने वाले राजकीय जनाजे की तैयारी कर रहा है। सरकार इस आयोजन को सिर्फ अंतिम विदाई नहीं, बल्कि देश की एकजुटता और इस्लामी गणराज्य की मजबूती दिखाने का मौका भी मान रही है।
देशभर से उमड़ रही है भारी भीड़
खामेनेई के निधन को ईरान में बड़ी राष्ट्रीय क्षति माना जा रहा है। पूरे देश में शोक का माहौल है और लाखों लोग श्रद्धांजलि देने के लिए अलग-अलग शहरों से पहुंच रहे हैं। विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग जनाजे में शामिल होने आ रहे हैं। यही वजह है कि इस पूरे कार्यक्रम को कई चरणों में अलग-अलग शहरों और धार्मिक स्थलों पर आयोजित किया जा रहा है।
भारत भी निभाएगा पुरानी दोस्ती का रिश्ता
इस मुश्किल समय में भारत भी ईरान के साथ अपनी संवेदना व्यक्त कर रहा है। ईरान सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद को जनाजे में शामिल होने का विशेष निमंत्रण भेजा है। कांग्रेस ने इस निमंत्रण को स्वीकार करते हुए सलमान खुर्शीद को अपना आधिकारिक प्रतिनिधि बनाया है। वह पार्टी का शोक संदेश लेकर तेहरान जाएंगे।
तेहरान से मशहद और इराक तक जाएगी अंतिम यात्रा
अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन ईरान के पिछले 47 सालों के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। उनकी अंतिम यात्रा तेहरान से शुरू होकर कोम, मशहद और पड़ोसी देश इराक के पवित्र शिया स्थलों तक जाएगी। इस दौरान प्रमुख शहरों को काले झंडों और बैनरों से सजाया गया है, जो शिया परंपराओं का हिस्सा हैं।
दुनिया की नजर इस जनाजे पर
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच यह जनाजा सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक आयोजन भी माना जा रहा है। ईरान इस मौके पर अपनी एकजुटता और वैश्विक समर्थन दिखाना चाहता है। वहीं भारत जैसे पुराने मित्र देशों की मौजूदगी दोनों देशों के मजबूत रिश्तों और आपसी भरोसे को भी दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगी।
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