AI Impact Summit: मोदी पर फिदा हुई ये खूबसूरत महिला नेता! तारीफ में पढ़े कसीदे, किस बात से हुईं इम्प्रेस?
AI Impact Summit: नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit के दौरान स्वीडन की उप-प्रधानमंत्री Ebba Busch ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की। उन्होंने साफ कहा कि आज के ग्लोबल अनिश्चित माहौल में भारत यूरोप के लिए एक 'चुना हुआ भागीदार' है। AI, इनोवेशन, व्यापार और जियो-पॉलिटिक्स- हर क्षेत्र में भारत की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
ग्लोबल साउथ में पहला AI शिखर सम्मेलन
एब्बा बुश ने इस बात की सराहना की कि ग्लोबल साउथ में पहली बार कोई वैश्विक AI शिखर सम्मेलन भारत की मेजबानी में हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह संयोग नहीं है, बल्कि भारत के बढ़ते प्रभाव का नतीजा है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि भारत टेक्नोलॉजी को मानवता के हित से जोड़कर देखता है। इस समिट में 20 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्षों और वरिष्ठ मंत्रियों ने हिस्सा लिया। चर्चा सिर्फ AI सुरक्षा और नियमों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इनोवेशन, तैनाती और वैश्विक सहयोग पर भी फोकस रहा।

सिर्फ व्यापार नहीं, उससे कहीं ज्यादा
हाल ही में भारत और European Union के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) संपन्न हुआ है। एब्बा बुश ने इसे 'यूरोप के लिए एक बड़ा दिन' बताया। दो दशकों से ज्यादा बातचीत के बाद यह समझौता संभव हो पाया। उनके मुताबिक यह एफटीए 'सिर्फ व्यापार से कहीं बढ़कर' है। यह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और दूसरे सबसे बड़े बाजार को एक साथ लाता है। इससे न सिर्फ आर्थिक मौके बनेंगे, बल्कि लंबे समय तक चलने वाला रणनीतिक तालमेल भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि यह मूल्य-आधारित संबंध है, जो आने वाली पीढ़ियों तक चलेगा।
भारत-स्वीडन संबंध अब नए फेज में
अब तक विज्ञान, तकनीक और नवाचार भारत-स्वीडन रिश्तों की रीढ़ रहे हैं। लेकिन एब्बा बुश का मानना है कि अब यह रिश्ता एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसके केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है।
उन्होंने कहा कि स्वीडन इनोवेशन के मामले में वैश्विक रैंकिंग में अक्सर पहले, दूसरे या तीसरे स्थान पर रहता है। लेकिन भारत की गति और पैमाना अद्भुत है। स्वीडन ऐसे देशों के साथ काम करना चाहता है जो जटिल समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए तैयार हों-और भारत ऐसा ही भागीदार है।
इंटरनेट बनाम GPT: बदलती टेक्नोलॉजी की रफ्तार
एब्बा बुश ने टेक्नोलॉजी अपनाने की रफ्तार का दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में इंटरनेट को पूरी तरह फैलने में लगभग सात साल लगे थे। लेकिन जब GPT मार्केट में आया, तो लोगों ने उसे अपनाने में सिर्फ लगभग दो महीने लगाए।
यह उदाहरण बताता है कि टेक्नोलॉजी की रफ्तार कितनी तेज हो चुकी है। उनके मुताबिक भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल क्षमता ऐसे रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो सुरक्षा के साथ इनोवेशन को भी आगे बढ़ाए।
'यह युद्ध का युग नहीं है'- भारत की भूमिका
एब्बा बुश ने भारत के उस रुख की सराहना की जिसमें कहा गया है कि 'यह युद्ध का युग नहीं है।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के शांति आह्वान को सकारात्मक बताया। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थायी शांति के लिए सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी जरूरी है।
स्वीडन का संदेश: हम व्यापार के लिए खुले हैं
भारतीय उद्योग और स्टार्टअप्स के लिए एब्बा बुश ने साफ संदेश दिया-स्वीडन 'व्यापार के लिए खुला' है। उन्होंने बताया कि करीब 300 स्वीडिश कंपनियां पहले से भारत में काम कर रही हैं। ये कंपनियां अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 2.5 मिलियन (25 लाख) नौकरियों का समर्थन करती हैं। उन्होंने कहा कि वे और ज्यादा निवेश चाहते हैं, खासकर इंडस्ट्री और हेल्थकेयर सेक्टर में-जहां इनोवेशन और AI अहम भूमिका निभा सकते हैं।
भारत: सिर्फ बाजार नहीं, रणनीतिक सहयोगी
जैसे-जैसे दुनिया के नेता AI के भविष्य को लेकर नई दिल्ली में इकट्ठा हो रहे हैं, स्वीडन का संदेश साफ है। भारत सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं है, बल्कि एक नियम-आधारित, इनोवेशन-ड्रिवन वैश्विक व्यवस्था बनाने में रणनीतिक साझेदार है।
ग्लोबल साउथ में पहली बार वैश्विक AI समिट की मेजबानी, यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक एफटीए, और 300 स्वीडिश कंपनियों की मौजूदगी-ये सभी संकेत बताते हैं कि भारत और स्वीडन का रिश्ता अब नए स्तर पर पहुंच चुका है।
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