Abhishek Banerjee Case: Amit Shah को धमकी देने के आरोप में Mamata के भतीजे पर FIR, कौन-कौन सी लगी धाराएं?
Abhishek Banerjee Case: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे घोषित होने के महज एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव और डायमंड हार्बर लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है। बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज इस एफआईआर को राज्य पुलिस द्वारा अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पहली बड़ी कानूनी कार्रवाई माना जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता राजीव सरकार की लिखित शिकायत पर बागुइयाटी पुलिस स्टेशन में प्रारंभिक शिकायत दर्ज हुई, जिसे बाद में साइबर क्राइम यूनिट को ट्रांसफर कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने अभिषेक बनर्जी पर चुनाव प्रचार के दौरान कई जगहों पर दिए गए भड़काऊ भाषणों और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी देने का आरोप लगाया है।

एफआईआर में कौन-कौन सी धाराएं?
पुलिस ने कुल 5 धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:
- BNS 192 (जमानती): दंगे भड़काने से संबंधित।
- BNS 196 (गैर-जमानती): विभिन्न समूहों के बीच सद्भाव बिगाड़ना और घृणा फैलाना।
- BNS 351(2) (गैर-जमानती): मृत्यु की धमकी देना और मानवीय गरिमा को ठेस पहुंचाना।
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) की धारा 123(2) और 125: चुनाव प्रचार के दौरान भ्रामक बयान, दबाव और समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना।
ये धाराएं गंभीर हैं और अभिषेक बनर्जी की संसदीय सदस्यता तथा राजनीतिक भविष्य पर भी असर डाल सकती हैं।
विवाद की जड़: चुनावी रैलियों में दिए गए भाषण
2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। परिणाम आने से पहले और बाद में अभिषेक बनर्जी ने कई रैलियों में BJP, अमित शाह, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए थे।
शिकायतकर्ता राजीव सरकार ने अभिषेक के विभिन्न भाषणों के वीडियो लिंक और क्लिप्स संलग्न कर शिकायत दी। आरोप है कि इन भाषणों में:
- अमित शाह को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाकर धमकी भरे बयान दिए गए।
- विभिन्न समुदायों और राजनीतिक विरोधियों के बीच वैमनस्य फैलाने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया गया।
- चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए भ्रामक बयान दिए गए।
अभिषेक बनर्जी ने पहले भी अमित शाह पर तीखे हमले किए थे और 'बंगाल में BJP को घुसने नहीं देंगे' जैसे आक्रामक बयान दिए थे।
हार के बाद TMC पर दबाव
2026 के चुनाव में TMC की हार के बाद पार्टी के अंदर और बाहर कई सवाल उठ रहे हैं। अभिषेक बनर्जी को पार्टी का दूसरा सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। ममता बनर्जी के भतीजे होने के नाते उनकी भूमिका हमेशा चर्चा में रही है।
हार के बाद:
- TMC नेताओं के एक वर्ग ने अभिषेक की रणनीति और IPAC (I-PAC) जैसी एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए।
- विपक्ष (BJP) ने TMC पर हिंसा, धमकी और ध्रुवीकरण की राजनीति का आरोप लगाया।
- अभिषेक ने खुद चुनाव आयोग पर धांधली के आरोप लगाए और कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही।
इसी माहौल में यह एफआईआर दर्ज हुई है, जिसे राजनीतिक प्रतिशोध भी माना जा रहा है। TMC सूत्रों का कहना है कि यह 'BJP की साजिश' है, जबकि BJP इसे 'कानून का राज' बता रही है।
Who Is Abhishek Banerjee: अभिषेक बनर्जी कौन हैं?
- अभिषेक बनर्जी (उम्र 38 वर्ष) ममता बनर्जी के भतीजे और TMC के युवा चेहरे हैं। वे:
- डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद हैं।
- TMC के अखिल भारतीय महासचिव हैं।
- पार्टी की रणनीति और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
- बंगाल की युवा और ग्रामीण राजनीति में मजबूत पकड़ रखते हैं।
पिछले कई वर्षों से वे ममता बनर्जी के बाद पार्टी के सबसे चर्चित नेता रहे हैं। 2021 और 2024 के चुनावों में उनकी भूमिका अहम रही थी।
TMC का रुख क्या?
TMC ने अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि पार्टी कानूनी रूप से इस मामले का मुकाबला करेगी। अभिषेक बनर्जी के करीबी इसे 'चुनावी हार के बाद बदला' मान रहे हैं।
बंगाल की सियासत में नया अध्याय
पश्चिम बंगाल में BJP के सत्ता में आने के बाद कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और नेताओं पर केस की बहस फिर गरम हो गई है। अभिषेक बनर्जी का मामला इस माहौल में एक नया अध्याय जोड़ता है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि:
- क्या अभिषेक को गिरफ्तार किया जाता है?
- क्या मामला सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट तक जाता है?
- क्या यह TMC के अंदरूनी कलह को बढ़ावा देगा?
अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एफआईआर 2026 बंगाल चुनाव के बाद की उथल-पुथल का प्रतीक है। जहां एक तरफ TMC हार का सामना कर रही है, वहीं विपक्ष इसे 'अकाउंटेबिलिटी' बता रहा है। अभिषेक बनर्जी बंगाल की युवा राजनीति के बड़े चेहरे हैं। इस मामले का नतीजा न सिर्फ उनकी राजनीतिक छवि, बल्कि पूरे राज्य की सियासी दिशा को प्रभावित कर सकता है।













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