Ahmedabad Crash: 260 मौतें, आंसू और इंतजार, नहीं मिले जवाब, क्यों खामोश है सरकार?

Ahmedabad Crash: अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 के दुर्घटनाग्रस्त हुए एक साल पूरा हो चुका है। लेकिन इस हादसे में जान गंवाने वाले 260 लोगों के परिवारों को आज भी उस सबसे अहम सवाल का जवाब नहीं मिला है कि उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद बोइंग 787 ड्रीमलाइनर के दोनों इंजन आखिर बंद कैसे हो गए।

यह हादसा पिछले एक दशक की दुनिया की सबसे बड़ी विमान दुर्घटनाओं में से एक माना जाता है। इसके साथ ही यह बोइंग 787 ड्रीमलाइनर की पहली घातक दुर्घटना भी थी। हादसे की जांच अब भी जारी है और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) एक साल बीत जाने के बावजूद अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं कर पाया है। शुरुआती जांच के मुताबिक, इंजन सिस्टम और टेक्निकल प्रोसेस से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए जांच एजेंसियों को और समय चाहिए।

Ahmedabad Crash

जांच क्यों हो रही है इतनी लंबी?

अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक किसी भी विमान दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट एक साल के भीतर जारी की जानी चाहिए। लेकिन अगर मामला बेहद जटिल हो तो जांच एजेंसियां एक्स्ट्रा समय ले सकती हैं। एयर इंडिया AI171 मामले में भी यही स्थिति बनी हुई है। भारतीय विमानन अधिकारी तय समय सीमा के भीतर अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं कर पाए क्योंकि कई अहम तकनीकी परीक्षण अब भी जारी हैं। फिलहाल खबरें हैं कि अंतिम रिपोर्ट की जगह एक अंतरिम रिपोर्ट जारी की जा सकती है।

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जांच का फोकस GE Aerospace इंजनों पर

इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों का मेन फोकस विमान में लगे GE Aerospace इंजनों पर है। जांच अधिकारियों ने इंजन मैनेजमेंट यूनिट (Engine Management Unit) की गहन जांच के लिए हाल ही में फ्रांस का दौरा किया था। वहीं, इंजन के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को डिटेल टेक्निकल एनालिसिस के लिए अमेरिका भेजा गया है। इसी वजह से AAIB और अन्य अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां किसी जल्दबाजी में नतीजे पर पहुंचने के बजाय पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ रही हैं।

हादसे वाले दिन क्या हुआ था?

दुर्घटना वाले दिन एयर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान 242 यात्रियों और क्रू सदस्यों को लेकर अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ था। लेकिन टेक-ऑफ के कुछ ही सेकंड बाद विमान अहमदाबाद एयरपोर्ट के पास स्थित एक हॉस्टल भवन से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे में विमान में मौजूद अधिकांश लोगों के अलावा जमीन पर मौजूद 19 लोगों की भी मौत हो गई। कुल मिलाकर 260 लोगों ने अपनी जान गंवाई।

आखिर कॉकपिट में हुआ क्या था?

12 जुलाई 2025 को AAIB ने एक शुरुआती रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कुछ चौंकाने वाले खुलासे सामने आए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, टेक-ऑफ के कुछ ही सेकंड बाद दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच अचानक "RUN" मोड से "CUTOFF" मोड में चले गए। इसका मतलब था कि इंजनों तक ईंधन पहुंचना बंद हो गया और विमान ने अपनी जरूरी शक्ति खो दी।

केवल एक सेकंड के अंतर पर बंद हुए दोनों इंजन

रिपोर्ट में कहा गया था-

"इंजन 1 और इंजन 2 के फ्यूल कटऑफ स्विच एक के बाद एक केवल 01 सेकंड के अंतर से RUN से CUTOFF स्थिति में चले गए।"

इसके बाद दोनों इंजनों का N1 और N2 स्तर तेजी से गिरने लगा और इंजन सामान्य शक्ति पैदा करने में असमर्थ हो गए।

कॉकपिट रिकॉर्डिंग ने बढ़ाए सवाल

कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से भी बेहद महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता हुआ सुनाई देता है-

"तुमने फ्यूल क्यों काट दिया?"

इसके जवाब में दूसरे पायलट ने कहा-

"मैंने ऐसा नहीं किया।"

यही बातचीत आज भी जांच का सबसे बड़ा रहस्य बनी हुई है।

सीसीटीवी फुटेज में भी दिखी असामान्य स्थिति एयरपोर्ट के सुरक्षा कैमरों की रिकॉर्डिंग ने भी जांचकर्ताओं को हैरान कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक-

"अहमदाबाद एयरपोर्ट की CCTV फुटेज में टेक-ऑफ के तुरंत बाद Ram Air Turbine (RAT) सक्रिय होती दिखाई दी।"

RAT आमतौर पर तभी सक्रिय होती है जब विमान में गंभीर विद्युत या इंजन संबंधी समस्या उत्पन्न हो। फुटेज में यह भी दिखा कि विमान एयरपोर्ट की सीमा पार करने से पहले ही ऊंचाई खोने लगा था।

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हवा में ही इंजन दोबारा चालू करने की कोशिश

जांच रिपोर्ट बताती है कि पायलटों ने हवा में रहते हुए दोनों इंजनों को दोबारा चालू करने की पूरी कोशिश की।

रिपोर्ट में कहा गया-

"जब फ्यूल स्विच CUTOFF से दोबारा RUN मोड में लाए जाते हैं, तो FADEC सिस्टम स्वचालित रूप से इंजन को पुनः चालू करने का प्रयास करता है।"

हालांकि विमान की ऊंचाई बेहद कम थी, इसलिए पायलटों को पर्याप्त समय नहीं मिल सका।

एक इंजन में सुधार दिखा, दूसरा जूझता रहा

रिपोर्ट के मुताबिक-

"इंजन 1 की गति गिरना बंद हुई और उसमें रिकवरी के संकेत दिखाई देने लगे।" लेकिन "इंजन 2 दोबारा चालू होने के बाद भी स्थिर गति हासिल नहीं कर पाया और लगातार ईंधन लेकर खुद को पुनः सक्रिय करने की कोशिश करता रहा।" इसी दौरान पायलटों ने "Mayday Mayday Mayday" कॉल जारी की। इसके कुछ ही क्षण बाद रिकॉर्डिंग बंद हो गई।

हादसे से पहले की पूरी टाइमलाइन

दुर्घटना वाले दिन विमान VT-ANB पहले नई दिल्ली से अहमदाबाद पहुंचा था।

सुबह 05:47 GMT पर विमान अहमदाबाद उतरा।
लगभग दो घंटे बाद लंदन उड़ान की तैयारी शुरू हुई।
सुबह 07:55 GMT पर विमान टैक्सीवे पर पहुंचा।
टेक-ऑफ की अनुमति मिलने के बाद
सुबह 08:08:39 GMT पर ड्रीमलाइनर ने अपनी अंतिम उड़ान भरी।

क्या यह पायलट की गलती थी?

सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि पूरी तरह लॉक होने वाले फ्यूल स्विच अचानक कटऑफ मोड में कैसे चले गए। कुछ शुरुआती अमेरिकी रिपोर्टों में पायलट सुमीत सभ्रवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंडर की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिना पूरी जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

पायलट संगठन ने जताई आपत्ति

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने पायलटों को जिम्मेदार ठहराने की कोशिशों का विरोध किया है। फेडरेशन का कहना है कि विमान में पहले से तकनीकी समस्याओं के संकेत मौजूद थे। फेडरेशन के लोगों ने कहा- "इससे केवल अटकलें और गलतफहमियां बढ़ेंगी।" उन्होंने AAIB से अंतरिम रिपोर्ट जारी न करने की भी अपील की।

तकनीकी खराबी की भी जांच जारी

पायलट फेडरेशन का दावा है कि विमान में फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम से जुड़ी कुछ पुरानी शिकायतें मौजूद थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, टेक-ऑफ से ठीक पहले स्टेबलाइजर सिस्टम से जुड़े मोटर भी बदले गए थे। कुछ विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि कोई सॉफ्टवेयर बग या संवेदनशील इलेक्ट्रिकल फेल्योर भी इस दुर्घटना की वजह हो सकता है।

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परिवारों को अब सिर्फ सच का इंतजार

इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए तकनीकी बहसों से ज्यादा महत्वपूर्ण सच्चाई का सामने आना है। एकमात्र जीवित बचे यात्री विश्वासकुमार रमेश सहित सभी पीड़ित परिवार लगातार मांग कर रहे हैं कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए। उनका कहना है कि हादसे की असली वजह सामने आनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो और विमानन सुरक्षा को और मजबूत बनाया जा सके।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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