कौन हैं चारू पांडेय? 23 साल की उम्र में बिना कोचिंग पास कीं 19 सरकारी परीक्षाएं, अब राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित
Who Is Charu Pandey: आज के दौर में जब एक सरकारी नौकरी (Government Job) पाना युवाओं के लिए एक बड़े सपने जैसा है, वहीं छत्तीसगढ़ की एक 23 साल की बेटी ने वो कर दिखाया है जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के एक छोटे से कस्बे तिल्दा-नेवरा की रहने वाली चारू पांडेय (Charu Pandey) ने बिना किसी महंगे कोचिंग संस्थान का सहारा लिए, एक या दो नहीं बल्कि कुल 19 सरकारी प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर देश भर में इतिहास रच दिया है।

चारू की इस हैरतअंगेज उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। उनकी इस सफलता को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस 2026 के मौके पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित 'एट-होम' (At-Home) समारोह में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) चारू पांडेय को गोल्ड मेडल से सम्मानित करेंगी।
कौन हैं चारू पांडेय जिनके नाम एक नहीं, 19 परीक्षाओं की लंबी लिस्ट है
मैथ से ग्रेजुएट चारू पांडेय वर्तमान में वह विशाखापट्टनम में सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी (Assistant Audit Officer) के पद पर कार्यरत हैं, जिसे वह अपनी ड्रीम जॉब मानती हैं। उन्होंने कॉलेज के दिनों से ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। उनका इरादा केवल एक सुरक्षित सरकारी नौकरी पाने का था, लेकिन एक के बाद एक परीक्षाओं के परिणाम आते गए और उनकी कामयाबी का कारवां बढ़ता चला गया।
SSC की परीक्षाएं
- SSC CGL
- SSC CHSL
- SSC MTS
- SSC GD
- SSC CPO
बैंकिंग परीक्षाएं
- SBI PO
- SBI Clerk
- IBPS PO
- IBPS Clerk
रेलवे की विभिन्न भर्तियां और राज्य सरकार की कई प्रतियोगी परीक्षाएं मिलाकर उन्होंने कुल 19 प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रिकॉर्ड जैसी उपलब्धि दर्ज की।
जब गेस्ट हाउस में रहकर की '20 घंटे की कठिन तपस्या'
चारू पांडेय की यह सफलता बिना किसी त्याग के नहीं मिली है। सोशल मीडिया और बाहरी दुनिया के डिस्ट्रैक्शन से पूरी तरह दूर रहने के लिए चारू ने छह महीने के लिए रायपुर के एक गेस्ट हाउस में खुद को बंद कर लिया था।India Today को दिए एक इंटरव्यू में चारू बताती हैं, "तैयारी के दौरान खुद को फ्रेश रखने के लिए थोड़ी-बहुत एक्टिविटीज जरूरी हैं, लेकिन जब मैं रायपुर के गेस्ट हाउस में रह रही थी, तो उस छह महीने के कठिन दौर में मैं दिन में लगभग 20 घंटे तक पढ़ाई किया करती थी।"
इसी दौरान वे स्कूल के बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाती थीं। चारू के मुताबिक, बच्चों को पढ़ाने के इस अनुभव ने बेसिक सबजेक्ट पर उनकी खुद की समझ और पकड़ को बहुत मजबूत बना दिया।
कोचिंग के बिना कैसे मिली सफलता? AI और यूट्यूब बने मददगार
आजकल जहां सरकारी नौकरियों के लिए लाखों रुपये की फीस वाले कोचिंग सेंटरों की बाढ़ आई हुई है, वहीं चारू ने किसी भी कोचिंग संस्थान का रुख नहीं किया। उन्होंने आधुनिक तकनीक और सेल्फ स्टडी (स्व-अध्ययन) को अपना हथियार बनाया।
बिना कोचिंग के तैयारी करने के लिए चारू ने इंटरनेट का बखूबी इस्तेमाल किया। उन्होंने यूट्यूब पर शिक्षकों के लेक्चर्स देखकर अपने कॉन्सेप्ट क्लियर किए। तैयारी के दौरान जब भी उन्हें किसी विषय या टॉपिक पर कोई डॉउट होता था, तो वे उसे समझने के लिए AI की मदद लेती थीं।
स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित
चारू की असाधारण उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें इस साल 15 अगस्त के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान न केवल चारू के लिए, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने की कोशिश कर रहे हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनीं चारू
आज चारू पांडेय की कहानी यह संदेश देती है कि सफलता का रास्ता महंगी कोचिंग, बड़े शहर या विशेष सुविधाओं से नहीं, बल्कि लगन, अनुशासन, निरंतर मेहनत और सही रणनीति से बनता है। छत्तीसगढ़ के एक छोटे से कस्बे से निकलकर 19 प्रतियोगी परीक्षाएं पास करना और फिर राष्ट्रपति से सम्मानित होना इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।














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