MP News: ‘नमो’ और ‘मोहन’ की संकल्प शक्ति से एमपी में दुग्ध क्रांति को नई रफ्तार, गौ-संरक्षण बना ग्रामीण विकास का आधार
मध्य प्रदेश राज्य को देश की 'दूध की राजधानी' बनाने के लिए केंद्र और राज्य की योजनाओं के तहत डेयरी और पशुधन विकास में तेजी ला रहा है। पहलों में राष्ट्रीय गोकुल मिशन का समर्थन, बेहतर पशु चिकित्सा सेवाएं, छोटे से मध्यम आकार की डेयरी इकाइयों के लिए सब्सिडी वाले ऋण, और महत्वाकांक्षी ग्रामीण रोजगार और किसान आय लक्ष्यों के साथ-साथ आधुनिक सहकारी प्रयोगशालाएं शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के साथ ही मध्यप्रदेश में पशुधन विकास, गौ-संरक्षण और डेयरी क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के चलते मध्यप्रदेश अब देश की "मिल्क कैपिटल" बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

प्रदेश में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को आर्थिक विकास, किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण रोजगार से जोड़ते हुए बड़े स्तर पर योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल से पशुपालकों को आधुनिक सुविधाएं, बेहतर नस्ल के पशु, स्वास्थ्य सेवाएं और डेयरी कारोबार के नए अवसर मिल रहे हैं।
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत मध्यप्रदेश में देशी नस्लों के संरक्षण, संवर्धन और नस्ल सुधार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे उच्च गुणवत्ता वाले दुधारू पशुओं का तेजी से विकास हो रहा है। वहीं राष्ट्रीय पशुधन मिशन के जरिए पशुधन उत्पादकता बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं और बीमा सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
राज्य में पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रमों के तहत टीकाकरण, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों और महामारी नियंत्रण पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के माध्यम से पशुपालकों को सब्सिडी, ऋण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
भोपाल में सहकारी क्षेत्र की अत्याधुनिक केंद्रीय राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला भी स्थापित की जा रही है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया है। इससे दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
आत्मनिर्भर बन रही हैं गौशालाएं
मध्यप्रदेश सरकार ने "स्वावलंबी गौशाला स्थापना नीति-2025" लागू कर गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत नगरीय क्षेत्रों में 5 हजार से अधिक क्षमता वाली वृहद गौशालाएं स्थापित की जा रही हैं, जिनके लिए 130 एकड़ तक सरकारी जमीन लीज पर उपलब्ध कराई जा रही है।
आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन में आदर्श गौशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि भोपाल, जबलपुर और सागर में निर्माण कार्य जारी है। ग्वालियर में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट गौशाला में स्थापित किया गया है, जहां गोबर से ऊर्जा उत्पादन किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने शासकीय गौशालाओं में प्रति गाय अनुदान राशि भी बढ़ाई है। मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना और ‘कामधेनु निवास’ जैसी योजनाओं के माध्यम से भटकते गोवंश के संरक्षण और गौशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना से पशुपालकों को राहत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा शुरू की गई डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना छोटे और मध्यम स्तर के डेयरी उद्यमियों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। योजना के तहत 25 दुधारू पशुओं की इकाई पर 36 लाख से 42 लाख रुपये तक का ऋण और 25 से 33 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। वहीं बैगा और सहरिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों को मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना के तहत 90 प्रतिशत अनुदान पर दो-दो दुधारू पशु उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
‘मिल्क कैपिटल’ बनने की दिशा में बढ़ता मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को देश की "मिल्क कैपिटल" बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए दुग्ध समृद्धि अभियान और कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत पशुपालन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना, कामधेनु निवास योजना और मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। डेयरी प्लस कार्यक्रम को फिलहाल सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है।
पशुपालन क्षेत्र में डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने के लिए ‘गोरस’ ऐप भी शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से पशुपालकों को पशुओं का डाइट चार्ट, आहार प्रबंधन और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराई जा रही है।
मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाओं से बढ़ी सुविधा
राज्य में चलित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से अब तक 15 लाख से अधिक पशुपालकों के घर पहुंचकर सेवाएं दी जा चुकी हैं। सरकार पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए लगातार नई पहल कर रही है। ग्वालियर में पशु वेलनेस सेंटर स्थापित किए गए हैं और पशुपालकों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
2026 के बजट में डेयरी और पशुपालन पर बड़ा फोकस
मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 के बजट में गहन पशु विकास परियोजना के तहत 838 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके अलावा पशु कल्याण सेवाओं के विस्तार के लिए 79 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
सरकार ने पशुपालकों को 2 लाख रुपये तक का बिना गारंटी ऋण देने का भी प्रावधान किया है। राज्य सरकार का लक्ष्य देश के कुल दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी को 20 प्रतिशत तक पहुंचाना है। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से मध्यप्रदेश में पशुधन विकास, गौ-कल्याण और डेयरी क्षेत्र को नई दिशा मिल रही है। इससे न केवल पशुपालकों और किसानों की आय बढ़ रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है।












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