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अफगानिस्तान के दर्जनों बड़े नेता-सांसद भागकर पहुंचे भारत, पैदा हुआ बहुत बड़ा शरणार्थी संकट, हर तरफ खौफ

अफगान संकट के बीच कई बड़े अफगान नेताओं ने भारत की तरफ रूख कर लिया है और कई बड़े नेता बहुत जल्द भारत आने की कोशिश में हैं।

काबुल/नई दिल्ली, अगस्त 16: अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होते ही अफगानिस्तान के नेता अपनी जान बचाने के लिए अलग अलग देशों में शरण ले रहे है। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी और उनके सहयोगी ताजिकिस्तान चले गये हैं। हालांकि, ताजिकिस्तान उनका स्थायी ठिकाना नहीं है, वो कहीं और जाएंगे, ऐसी खबरें आ रही हैं। वहीं, कुछ और देशों ने भी अफगान नागरिकों के लिए अपने देश की सीमाओं को खोल दिया है। इस बीच बड़ी खबर ये है कि अफगानिस्तान सरकार के कई बड़े नेता भारत आ चुके हैं, वहीं कई बड़े नेताओं के भारत आने की संभावना जताई जा रही है।

भारत आ रहे अफगान नेता

भारत आ रहे अफगान नेता

इंडिया टूडे की खबर के मुताबिक अफगान संकट के बीच कई बड़े अफगान नेताओं ने भारत की तरफ रूख कर लिया है और कई बड़े नेता बहुत जल्द भारत आने की कोशिश में हैं। वहीं, सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार ने राजनीतिक शरणार्थियों को भारत में आने की इजाजत दे दी है। आपको बता दें कि अफगानिस्तान के राजनेताओं से लेकर अफगान नागरिकों के लिए सुरक्षित आवास माना जाता है और काफी ज्यादा संख्या में अफगान नागरिक, विद्यार्थी और आम लोग भारत में रहते हैं। इस वक्त, जब यह खबर लिखी जा रही है, उस वक्त तक अफगानिस्तान में स्थिति ये है कि बरग्राम एयरपोर्ट पर तालिबान का कब्जा हो गया है। वहीं, काबुल एयरपोर्ट अभी भी तुर्की के नियंत्रण में है। वहीं, तालिबान ने तुर्की को काबुल एयरपोर्ट से हटने के लिए कहा है और नहीं हटने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है, जिसे तुर्की ने मानने से मना कर दिया है।

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    कौन-कौन नेता भारत पहुंचे?

    कौन-कौन नेता भारत पहुंचे?

    रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार से ही अफगानिस्तान के बड़े नेता भारत आ रहे हैं। खबर के मुताबिक, शुक्रवार से भारत में आने वाले कुछ बड़े राजनीतिक नामों में वरदक के सांसद वहीदुल्लाह कलीमजई शामिल हैं। वहीं, परवान से सांसद अब्दुल अजीज हकीमी, सांसद अब्दुल कादिर जजई, सीनेटर मालेम लाला गुल, जमील करजई (पूर्व सांसद और पूर्व अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई के दूसरे चचेरे भाई) बगलान सांसद शुक्रिया एसखाइल, मोहम्मद खान, सीनेटर इंजीनियर अब्दुल हादी अरघंडीवाल, पूर्व वित्त मंत्री और पूर्व उप राष्ट्रपति यूनुस कानूननी के भाई मोहम्मद शरीफ शरीफी, सांसद मरियम सोलेमानखाइल और अफ़ग़ानिस्तान के उच्च सदन के वरिष्ठ सलाहकार कैस मोवफाक भारत पहुंच चुके हैं।

    अफगानिस्तान के साथ 'दिल का रिश्ता'

    अफगानिस्तान के साथ 'दिल का रिश्ता'

    अफगानिस्तान और भारत के बीच लोगों के बीच संबंध सदियों से मजबूत रहे हैं, हालांकि, पाकिस्तान और आईएसआई के इशारे पर काम कर रहा तालिबान न केवल भारत के लिए बल्कि समग्र रूप से भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है। जबकि अफगानिस्तान का पूर्वी पड़ोसी पाकिस्तान, तालिबान को सैन्य और आर्थिक सहायता प्रदान कर रहा है। देश की पश्चिमी सीमा पर ईरान, अफगान शरणार्थियों को देश में आने की इजाजत दे रहा है। वहीं, बाद में अफगानिस्तान की सीमा के साथ तीन प्रांतों में शिविर स्थापित किए गए हैं। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान के कई और बड़े नेता जल्द भारत आ सकते हैं।

    अफगानिस्तान शरणार्थी संकट

    अफगानिस्तान शरणार्थी संकट

    रिपोर्ट के मुताबिक, अल्बानिया और कतर अमेरिका के साथ अफगान राजनीतिक शरणार्थियों को रखने के लिए बातचीत कर रहे हैं और यहां तक कि कनाडा ने भी 20,000 शरणार्थियों को देश में रखने की बात की है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के मुताबिक, 2021 की शुरुआत के बाद से अफगानिस्तान में तालिबान की हिंसा की वजह से पांच लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़कर भाग चुके हैं। यूनाइटेड नेशंस की संस्था ने यह भी कहा है कि जुलाई से नौ अगस्त तक करीब एक लाख 26 हजार लोग आधिकारिक तौर पर विस्थापित हुए हैं।

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