तबाह हो गए 40 Starlink सैटेलाइट, सूर्य के भू-चुंबकीय तूफान की चपेट में आए, एलन मस्क को बड़ा झटका

न्यूयॉर्क, 9 फरवरी: सूर्य पर हुए महाविस्फोट की वजह से अरबपति अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स को बहुत बड़ा झटका लगा है। वैज्ञानिकों ने पहले ही इस तूफान के धरती से टकराने की चेतावनी जारी कर रखी थी। जिसकी चपेट में आए हैं 40 स्टारलिंक सैटेलाइट, जो दुनिया को सस्ती इंटरनेट सेवा देने के लिए लगातार लॉन्च की जा रही हैं। सूरज पर यह महाविस्फोट पिछले महीने ही हुआ था और उससे 23,83,200 किलोटमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कोरोनल मास इजेक्शन का संकेत दिया जा चुका था। स्पेसएक्स कंपनी ने जिस दिन 49 सैटेलाइट लॉन्च किए उसके अगले ही दिन उनमें से 40 इसकी वजह से तबाह हो गए।

तबाह हो गए 40 स्टारलिंक सैटेलाइट

तबाह हो गए 40 स्टारलिंक सैटेलाइट

पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) में स्थापित होने के अगले ही दिन एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की 40 स्टारलिंक सैटेलाइट सूर्य से उठे भू-चुंबकीय तूफान की चपेट में आकर नष्ट हो गए हैं। कंपनी ने पिछले हफ्ते ही 49 स्टारलिंक सैटेलाइट लॉन्च किए थे। कंपनी ने कहा है कि ये सैटेलाइट 3 फरवरी को फाल्कन-9 रॉकेट से छोड़े गए थे और उसके अगले ही दिन पृथ्वी भू-चुंबकीय तूफान की चपेट में आ गई। दरअसल, सूरज की सतह पर पिछले 30 जनवरी को एक महाविस्फोट (कोरोनल मास इजेक्शन) हुआ था और उससे निकली धधकती ऊर्चा के धरती से टकराने को लेकर वैज्ञानिकों ने पहले ही अलर्ट कर दिया था। सूर्य के पृथ्वी से भी बड़ी सतह पर यह स्थिति करीब चार घंटे तक रही थी और उससे निकली ऊर्जा अंतरिक्ष में रिलीज होकर दूसरे ग्रहों की ओर बढ़ी थी, जिसमें पृथ्वी भी शामिल है।

पृथ्वी से 210 किलोमीटर ऊपर कक्षा में स्थापित किए गए थे

पृथ्वी से 210 किलोमीटर ऊपर कक्षा में स्थापित किए गए थे

सूरज पर हुए इस महाविस्फोट को लेकर अमेरिका स्थित स्पेस वेदर प्रीडिक्शन सेंटर जो, नेशनल ओशीऐनिक एंड एटमोस्फेरिक एडिमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के अधीन है, उसने पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र में जी2 (मध्यम) के भू-चुंबकीय तूफान उठने की चेतावनी दे रखी थी। स्पेसएक्स के स्टारलिंक सैटेलाइट को पृथ्वी से करीब 210 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में स्थापित किया गया था। सफलतापूर्वक स्थापित होने के बाद हर सैटेलाइट की फ्लाइट कंट्रोल को भी हासिल कर लिया गया था। एलन मस्क की अगुवाई वाली कंपनी कई तरह की जटिलताओं से हिफाजत के लिए ही निचली कक्षा में सैटेलाइट तैनात करती है, लेकिन इस बार इसे बड़ा झटका लगा है।

स्टारलिंक सैटेलाइट के साथ असल में हुआ क्या ?

स्टारलिंक सैटेलाइट के साथ असल में हुआ क्या ?

49 स्टारलिंक सैटेलाइट को पिछले हफ्ते गुरुवार को ही स्थापित किया गया था, लेकिन अगले ही दिन यानी शुक्रवार को उनसे सूरज से आया भू-चुंबकीय तूफान टकरा गया। स्पेसएक्स ने इस संबंध में अपडेट देते हुए कहा है कि ऐसे तूफान की वजह से वायुमंडल गर्म हो जाता है और हमारी निचली कक्षा वाली ऊंचाई पर वायुमंडलीय घनत्व बढ़ जाता है। जीपीएस डेटा से मालूम होता है कि गति और तूफान की गंभीरता में इजाफे से वायुमंडलीय खिंचाव पिछली लॉन्चिंग की तुलना में 50 फीसदी तक बढ़ गया था। गौरतलब है कि कई तरह से वैज्ञानिक विश्लेषणों के बाद 23,83,200 किलोटमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कोरोनल मास इजेक्शन का संकेत पहले ही दिया गया था।

सेफ मोड में रखे गए थे सैटेलाइट

सेफ मोड में रखे गए थे सैटेलाइट

स्पेसएक्स का कहना है कि स्टारलिंक की टीम ने सैटेलाइट को सेफ मोड के कमांड में रख दिया था, जिसमें वह कागज की शीट की तरह से तैरते रहते और तूफान के प्रभाव को प्रभावी तौर पर कम कर पाते। कंपनी के बयान में यह भी कहा गया है कि 'प्रारंभिक विश्लेषण से पता चलता है कि कम ऊंचाई पर बढ़े हुए दबाव की वजह से घसीटे जाने से उपग्रहों को सुरक्षित मोड छोड़ने से रोक दिया गया।'

क्या अंतरिक्ष में कबाड़ बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है ?

क्या अंतरिक्ष में कबाड़ बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है ?

कंपनी ने कहा है कि क्योंकि कक्षा में घूमने के लिए सैटेलाइट सेफ मोड से बाहर नहीं आ पाए थे, इनमें से 40 सैटेलाइट 'पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करेंगे या पहले ही प्रवेश कर चुके हैं' और विघटित हो चुके हैं। स्पेसएक्स के मुताबिक, 'परिक्रमा नहीं करने वाले सैटेलाइट के दूसरे सैटेलाइट से भिड़ने का जोखिम शून्य रहता है और वायुमंडल में फिर से प्रवेश पर उसे खत्म होने के लिए किए गए डिजाइन का मतलब है कि कोई भी कक्षीय मलबा नहीं बना है और ना ही सैटेलाइट का कोई भाग जमीन से टकराया है।'

कुल 12,000 स्टारलिंक सैटेलाइट लॉन्च करने की है योजना

कुल 12,000 स्टारलिंक सैटेलाइट लॉन्च करने की है योजना

लेकिन, इस प्राकृतिक घटना की वजह से स्पेसएक्स के फाउंडर एलन मस्क के बहुचर्चित सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक को बहुत महंगा झटका लगा है। हाल ही में कंपनी ने 2,000 सैटेलाइट लॉन्च करके बड़ी कामयाबी हासिल की थी। कंपनी की योजना कुल 12,000 ऐसे स्टारलिंक सैटेलाइट लॉन्च करने की है, ताकि पूरी दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सस्ता से सस्ता इंटरनेट सेवा उपलब्ध करवाई जा सके।

केनेडी स्पेस सेंटर से हुई थी सैटेलाइट की लॉन्चिंग

केनेडी स्पेस सेंटर से हुई थी सैटेलाइट की लॉन्चिंग

फाल्कन-9 लॉन्च के दौरान अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से कुल 49 स्टारलिंक सैटेलाइट कक्षा की ओर लॉन्च किए गए थे। यह लॉन्चिंग सेंटर के 39ए (एलसी-39ए) कॉम्पलेक्स से कई गई थी। लेकिन, उनमें से अब 9 ही सही-सलामत बच पाए हैं।

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