'मां और मातृभूमि स्वर्ग से बढ़कर है...', सूरीनाम के राष्ट्रपति ने हिंदी में दी पीएम मोदी की मां को श्रद्धांजलि

सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि, प्रधानमंत्री भारत आपको हृदय से मेरा नमस्कार और प्रणाम, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी, एक मां और एक मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।

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प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन का शुभारंभ हो चुका है, जहां प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रवासी भारतीय सम्मेलन में हिस्सा लिया है। प्रवासी भारतीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी और गुयाना के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद इरफान अली शामिल हुए हैं। इसी के साथ सम्मेलन में केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी, और प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम शिवराज सिंह चौहान मौजूद रहे। सम्मेलन के दौरान सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिंदी में नमस्कार करते हुए प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन की बधाई दी है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री की मां के निधन पर शोक व्यक्त किया।

सूरीनाम के राष्ट्रपति ने किया संबोधित

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    सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि, प्रधानमंत्री भारत आपको हृदय से मेरा नमस्कार और प्रणाम, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी, एक मां और एक मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। इसी के साथ गुयाना के राष्ट्रपति डॉक्टर मोहम्मद इरफान अली ने भी प्रवासी भारतीय सम्मेलन में आए प्रवासी मेहमानों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी और गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली ने मध्य प्रदेश के इंदौर में 17वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में कमेमोरेटिव स्टांप जारी किया।

    पीएम नरेंद्र मोदी ने किया संबोधित

    पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रवासी भारतीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि, करीब 4 वर्षों बाद प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन एक फिर से अपने मूल्य स्वरूप में हो रहा है। ये सम्मेलन मध्य प्रदेश के उस धरती पर हो रहा है जिसे देश का हृदय क्षेत्र कहा जाता है। यह प्रवासी भारतीय दिवस कई मायनों में खास है। अभी कुछ महीने पहले ही हमने भारत की आजादी के 75 साल मनाए हैं। यहां स्वतंत्रता संग्राम की प्रदर्शनी लगाई गई है। देश अमृत काल में प्रवेश कर चुका है। भारत की वैश्विक दृष्टि को मजबूती मिलेगी। दुनिया के इतने अलग-अलग देशों में जब भारत के लोग एक कॉमन फैक्टर की तरह दिखते हैं तो वसुधैव कुटुंबकम् की भावना के साक्षात दर्शन होते हैं। दुनिया के किसी एक देश में जब भारत के अलग-अलग प्रान्तों और क्षेत्रों के लोग मिलते हैं तो एक भारत, श्रेष्ठ भारत का सुखद एहसास होता है।

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