जल्द ही मिल सकती है 'आधार कार्ड' से आजादी!, सरकार ला रही है नया नियम
नई दिल्ली। सरकार आधार कार्ड को लेकर बड़ा प्रस्ताव लेकर जनता के सामने आने वाली है। इस नए प्रस्ताव के आने के बाद नागरिकों को बायोमेट्रिक्स और डाटा समेत अपना आधार नंबर वापस लेने का ऑप्शन मिल जाएगा। अगर नागरिक चाहें तो आधार से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं। केंद्र सरकार आधार एक्ट में संशोधन की तैयारी कर रही है। इस बाबत एक प्रस्ताव को अंतिम रूप देने की कवायद अपने अंतिम चरण में है। इस पूरे संसोधन की सबसे अहम बात यह है कि, इसका लाभ उन्हीं लोगों को मिलेगा जिनका पैन कार्ड अभी तक नहीं बना है।

आधार छोड़ने के बाद नागरिक को सब्सिडी नहीं मिलेगी
आधार जारी करने वाली अथॉरिटी UIDAI ने इस मामले में नोट जारी कर दिया है और जल्द ही कैबिनेट द्वारा इस पर मुहर लगाई जा सकती है। इस प्रस्ताव को जांच के लिए लॉ मिनिस्ट्री को भेजा जा चुका है। उसके बाद मंत्रालय ने इसे अपनी सिफारिशों के साथ कैबिनेट को भेजा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आधार छोड़ने के बाद नागरिक को सब्सिडी नहीं मिलेगी। इस संशोधन के बाद सभी नागरिकों को बायोमेट्रिक्स और डेटा समेत अपना आधार नंबर वापस लेने का विकल्प दिया जा सकेगा।

अन लोगों का आधार कार्ड नहीं होगा सरेंडर
अगर यह प्रस्ताव अमल में आ जाती है तो इससे उन लोगों को फायदा होगा, जिनके पास पैन कार्ड नहीं है। इसकी वजह है कि अभी भी PAN बनवाने के लिए आधार जरूरी है और बाद में PAN-आधार लिंकिंग भी जरूरी है। इसका अर्थ है कि PAN धारक, आधार कार्ड नहीं छोड़ पाएंगे, क्योंकि अदालत ने आधार के साथ पैन के संबंध को बरकरार रखा है। देश में इस समय करीब 37 करोड़ लोगों को पैन जारी किया गया है, जबकि करीब सवा सौ करोड़ लोग अपना आधार बनवा चुके हैं।

आधार कार्ड की अनिवार्यता खत्म
सरकार द्वारा यह कदम सितंबर में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद किया जा रहा है। इस प्रस्ताव के अनुसार, आधार कार्ड से अपना नाम हटवाने के बाद यूजर्स का डेटा भी हमेशा के लिए डिलीट कर दिया जाएगा। यूजर्स का पूरा डेटा और बायोमेट्रिक्स तब लिया जाता है जब कोई व्यक्ति आधार के लिए खुद को एनरोल करवाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कुछ शर्तों के साथ आधार कार्ड की अनिवार्यता खत्म कर दी थी। हालांकि कुछ चीजों के साथ आधार की वैधता को बरकरार रखा गया।

आधार नंबर जोड़े जाने की बाध्यता असंवैधानिक है
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आधार एक्ट के सेक्शन 57 को रद्द कर दिया था, जो प्राइवेट कंपनियों को वेरिफिकेशन के नाम पर आधार नंबर देने को बाध्य करता है। बेंच ने यह भी माना था कि बैंक खातों और सिम कार्ड से आधार नंबर जोड़े जाने की बाध्यता असंवैधानिक है। प्रारंभिक प्रस्ताव भारत की विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा तैयार किया गया था। इसमें कहा गया कि एक बार जब बच्चा 18 वर्ष का हो जाता है, तो उसे यह तय करने के लिए 6 महीने दिए जाएंगे कि वह आधार नंबर वापस लेना चाहता है या नहीं।
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