नितिन गडकरी के रोल में होगा बदलाव? मोदी कैबिनेट में हो सकते हैं ये 5 बदलाव! किन-किन नेताओं की बढ़ेगी ताकत?
Modi Cabinet Reshuffle: केंद्र की सत्ता में काबिज मोदी सरकार के नए कैबिनेट फेरबदल को लेकर इस समय दिल्ली के सियासी गलियारों में भारी हलचल है। मिड जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है। इस संभावित फेरबदल में सबसे बड़ा नाम केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का सामने आ रहा है। सवाल यह है कि क्या गडकरी को मौजूदा मंत्रालय के साथ कोई नई जिम्मेदारी मिलेगी, या फिर सरकार उनकी भूमिका को नए तरीके से तय करेगी।
पिछले 12 सालों से सड़क और परिवहन मंत्रालय को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाने वाले नितिन गडकरी को लेकर संभावनाएं हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें कोई बड़ी और नई जिम्मेदारी सौंप सकते हैं। अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कई नामों को लेकर चर्चाएं लगातार चल रही हैं। ऐसे में आइए जानें मोदी कैबिनेट में क्या-क्या 5 बदलाव की संभावनाए हैं।

1. नितिन गडकरी के रोल में क्या बड़ा बदलाव होने जा रहा है?
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स में इस बात की संभावना जताई गई है कि नितिन गडकरी के पास इस समय जो काम है, उसमें कुछ और नए विभागों को जोड़ा जा सकता है। चर्चाएं तो यहां तक हैं कि उन्हें एक से ज्यादा बड़े मंत्रालयों की कमान दी जा सकती है। हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक इस बारे में कोई भी पत्ता नहीं खोला गया है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रदीप सिंह ने भी मोदी कैबिनेट में बड़े रीसेट की बात कही है।
उन्होंने ने भी इस बात की भी संभावना जताई है कि नितिन गडकरी का या तो कैबिनेट में प्रमोशन हो सकता है या फिर एक और मंत्रालय दिया जा सकता है। उन्होंने ये भी कहा है कि राजनाथ सिंह को भी रक्षा मंत्रालय के पद से हटाकर कोई और बड़ी जिम्मेदारी दी सकती है।
नितिन गडकरी के अलावा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी लगातार कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा है कि धर्मेंद्र प्रधान को सरकार से हटाकर संगठन को मजबूत करने के लिए भारतीय जनता पार्टी की टीम में वापस भेजा जा सकता है या फिर वे अपने पद पर बने रहकर काम संभालते रहेंगे। संभवना है कि धर्मेंद्र प्रधान की जगह देश की नई शिक्षा मंत्री वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बनाई जा सकती है।
2. क्या मानसून सत्र से पहले होगा बड़ा फैसला?
संभावित फेरबदल को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले नई टीम का ऐलान हो सकता है। वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि सरकार फिलहाल संसद में अहम विधेयकों पर फोकस कर रही है, इसलिए कैबिनेट विस्तार मानसून सत्र के बाद सितंबर या अक्टूबर तक भी टल सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विदेश दौरा और राष्ट्रपति का कार्यक्रम भी संभावित तारीखों को सीमित करता है। यही वजह है कि फिलहाल किसी निश्चित तारीख को लेकर आधिकारिक स्थिति साफ नहीं है।

अमित शाह और नितिन नबीन की मुलाकात से बढ़ी हलचल
पार्टी के भीतर और सरकार में इस बड़े बदलाव की स्क्रिप्ट लिखने के लिए गुरुवार को एक बेहद अहम बैठक हुई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संगठन महासचिव बीएल संतोष के साथ लंबी मुलाकात की। जनवरी में अध्यक्ष पद संभालने के बाद नवी नबीन अपनी नई केंद्रीय टीम तैयार कर रहे हैं।
माना जा रहा है कि इस नई टीम में युवाओं और अनुभवी नेताओं का एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन दिखेगा। कयास यह भी हैं कि कैबिनेट से जिन मंत्रियों की छुट्टी होगी, उन्हें संगठन में राष्ट्रीय पदाधिकारी या फिर चुनावी राज्यों में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक बैठक में भाजपा की नई केंद्रीय टीम, राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नियुक्ति और संगठन में संभावित बदलावों पर चर्चा हुई। साथ ही सरकार और संगठन के बीच जिम्मेदारियों के संतुलन पर भी विचार किया गया।
सूत्रों का कहना है कि इस बार पार्टी अनुभवी नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी बड़ी जिम्मेदारी देना चाहती है। यही वजह है कि कुछ केंद्रीय मंत्रियों को संगठन में भेजे जाने और कुछ संगठन नेताओं को सरकार में शामिल किए जाने की चर्चाएं भी तेज हैं।

3. अब जानिए किन-किन मंत्रियों को कैबिनेट से हो सकती है छुट्टी?
कैबिनेट फेरबदल की इस तलवार के नीचे कई मौजूदा मंत्रियों के नाम भी चल रहे हैं। कैबिनेट फेरबदल की अटकलों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम भी लगातार सामने आ रहा है। चर्चा है कि उन्हें संगठन में नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। पंजाब चुनाव को देखते हुए रवनीत सिंह बिट्टू को संगठन में अहम पद देकर हरदीप सिंह पुरी के साथ कैबिनेट से बाहर किया जा सकता है। इसके अलावा जॉर्ज कुरियन पहले ही अपना इस्तीफा दे चुके हैं।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास की इस बार मोदी टीम में लैटरल एंट्री हो सकती है। इसके पीछे की वजह यह बताई जा रही है कि मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पार्टी या सरकार में कोई दूसरी बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो आर्थिक मोर्चे पर देश को संभालने के लिए शक्तिकांत दास एक मजबूत और भरोसेमंद चेहरा साबित हो सकते हैं।
इसके अलावा पकंज चौधरी, हर्ष मल्होत्रा के भी हटाए जाने की चर्चा है। भाजपा अपने 'एक व्यक्ति-एक पद' के नीति के तहत पकंज चौधरी, हर्ष मल्होत्रा को कैबिनेट से हटा सकती है। पकंज चौधरी को यूपी भाजपा का अध्यक्ष और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी का चीफ बनाया गया है।
4. राघव चड्ढा और विपक्षी बागियों की एंट्री की चर्चा
इस फेरबदल का सबसे दिलचस्प पहलू आम आदमी पार्टी (AAP) से पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर है। राजनीति में कदम रखने से पहले राघव चड्ढा पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) रहे हैं, इसलिए कयास हैं कि उन्हें सरकार में कोई वित्तीय या अहम राज्य मंत्री का पद मिल सकता है।
इनके साथ ही पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत करके आए कुछ बड़े सांसदों को भी सरकार में जगह दी जा सकती है, जिनमें सुखेंदु शेखर रे और संदीप बंदोपाध्याय के नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।

5. किन पैमानों पर मोदी कैबिनेट से मंत्रियों को हटाए जा सकते हैं?
इस पूरे बदलाव के पीछे पांच सबसे बड़े फैक्टर्स हो सकते हैं।
1. कामकाज का रिपोर्ट कार्ड: प्रधानमंत्री मोदी ने 21 मई को मंत्रियों के कामकाज की जो समीक्षा की थी, उसे ही इस फेरबदल का मुख्य आधार बनाया जाएगा।
2. युवा चेहरों को मौका: पार्टी अध्यक्ष की उम्र 50 से कम है, इसलिए कैबिनेट में भी 70 से 80 साल की उम्र वाले कुछ मंत्रियों की जगह युवाओं को तरजीह दी जा सकती है।
3. चुनावी राज्यों पर फोकस: अगले साल जिन सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां के समीकरणों को साधने के लिए नए चेहरों को मंत्री बनाया जाएगा।
4. महिलाओं की हिस्सेदारी: साल 2029 से लागू होने वाले 33 फीसदी महिला आरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस बार कैबिनेट में महिला मंत्रियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
5. 'एक व्यक्ति-एक पद' (One Person, One Post) की नीति: असल में ऐसे नेताओं को भी कैबिनेट से बाहर किया जा सकता है जो,कैबिनेट में होते हुए संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
फेरबदल का सबसे बड़ा फोकस क्या हो सकता है?
असल में संभावित फेरबदल केवल मंत्रालय बदलने तक सीमित नहीं रहेगा। अगले साल जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उन्हें ध्यान में रखकर क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश हो सकती है। युवा चेहरों को आगे लाना, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना, ओबीसी प्रतिनिधित्व मजबूत करना और प्रशासनिक प्रदर्शन के आधार पर जिम्मेदारियां तय करना भी सरकार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
फिलहाल इतना तय है कि जब तक सरकार आधिकारिक घोषणा नहीं करती, तब तक नितिन गडकरी, धर्मेंद्र प्रधान, निर्मला सीतारमण, शक्तिकांत दास या किसी अन्य नेता की नई भूमिका को लेकर चल रही सभी चर्चाओं को राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में कैबिनेट और भाजपा संगठन दोनों में होने वाले फैसले इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ करेंगे।
(डिस्क्लेमर: यह लेख मौजूदा राजनीतिक चर्चाओं और पॉलटिकल एक्सपर्ट से आई जानकारी के विश्लेषण पर आधारित है। कैबिनेट में किसी भी आधिकारिक नियुक्ति या विभागों में बदलाव की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इस लेख को राजनीतिक कयास के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।)















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