Khamenei Funeral: कौन हैं वो महिला जहरा हद्दाद अदेल? जो अली खामेनेई के साथ होंगी दफन
Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई को उनके गृह शहर मशहद में दफन के साथ पूरी होगी। इस दौरान एक और नाम चर्चा में है, उनकी बहू जहरा हद्दाद-अदेल। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहरा की मौत उसी हवाई हमले में हुई थी, जिसमें अली खामेनेई की भी जान गई।
ऐसे में उन्हें भी खामेनेई के साथ ही दफनाया जाएगा। जहरा, मोजतबा खामेनेई की पत्नी और ईरान के प्रभावशाली कंजर्वेटिव नेता घोलम-अली हद्दाद-अदेल की बेटी थीं। आइए जानते हैं कि जहरा हद्दाद-अदेल कौन थीं और उनका राजनीतिक परिवार से क्या रिश्ता था।

मोजतबा खामेनेई की पत्नी थीं जहरा हद्दाद-अदेल
रिपोर्ट्स के अनुसार, मोजतबा खामेनेई और जहरा हद्दाद-अदेल का निकाह 1999 में हुआ था। जहरा, ईरान के वरिष्ठ कंजर्वेटिव नेता और पूर्व संसद स्पीकर घोलम-अली हद्दाद-अदेल की बेटी थीं। उस समय इस शादी को सिर्फ पारिवारिक रिश्ता नहीं बल्कि ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान के दो प्रभावशाली परिवारों के बीच मजबूत संबंध के रूप में देखा गया। शादी के बाद जहरा सार्वजनिक जीवन से काफी दूर रहीं और उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को हमेशा गोपनीय रखा।
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शादी को माना गया था बड़ा राजनीतिक गठजोड़
मोजतबा और जहरा की शादी को ईरान की राजनीति में अहम घटनाओं में गिना गया। इससे खामेनेई परिवार और कंजर्वेटिव राजनीतिक धड़े के बीच रिश्ते और मजबूत हुए। उस समय घोलम-अली हद्दाद-अदेल का राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा था। राजनीतिक जानकारों का मानना था कि इस रिश्ते ने सत्ता के शीर्ष पर मौजूद धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व के बीच भरोसे को और मजबूत किया। हालांकि परिवार ने कभी इस शादी को राजनीतिक समझौता नहीं बताया।
तीन बच्चों की मां, लेकिन परिवार रहा लाइमलाइट से दूर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई और जहरा हद्दाद-अदेल के तीन बच्चे हैं। हालांकि सुरक्षा कारणों और परिवार की गोपनीयता की नीति के चलते उनके बच्चों के नाम और निजी जीवन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े परिवार आमतौर पर मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं। यही वजह है कि जहरा की सार्वजनिक मौजूदगी भी बहुत कम देखने को मिली और उनके बारे में सीमित जानकारी ही सामने आई।
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हवाई हमले में गई जान, अब खामेनेई के साथ होगा अंतिम संस्कार
रिपोर्ट्स के अनुसार, जहरा हद्दाद-अदेल की मौत उसी संयुक्त हवाई हमले में हुई, जिसमें अयातुल्ला अली खामेनेई की भी जान गई। इस घटना ने ईरान की राजनीति के साथ-साथ खामेनेई परिवार को भी गहरा झटका दिया। अब अंतिम यात्रा के दौरान दोनों को एक साथ श्रद्धांजलि दी जाएगी और मशहद में दफनाया जाएगा। इससे यह अंतिम यात्रा राजनीतिक होने के साथ-साथ परिवार के लिए भावनात्मक विदाई भी बन गई है।
मशहद में साथ दफनाए जाएंगे, अंतिम यात्रा पर दुनिया की नजर
अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा 4 जुलाई से शुरू होकर तेहरान, कोम, कर्बला, नजफ और आखिर में मशहद पहुंचेगी। मशहद खामेनेई का जन्मस्थान भी है और शिया मुसलमानों का प्रमुख धार्मिक शहर माना जाता है। यहीं इमाम रजा की मजार स्थित है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहरा हद्दाद-अदेल को भी अली खामेनेई के साथ यहीं सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस वजह से पूरी दुनिया की नजर इस अंतिम यात्रा पर बनी हुई है।












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