MHA में बड़ी जिम्मेदारी और CBSE की कमान, कौन हैं एक साथ दो बड़े पद संभालने वाले IAS लोखंडे प्रशांत सीताराम?
IAS Lokande Prashant Sitaram: देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड CBSE में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। वरिष्ठ IAS अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम (IAS Lokhande Prashant Sitaram) को पहले CBSE का चेयरपर्सन बनाया गया था और अब उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है। खास बात यह है कि वह दोनों जिम्मेदारियां एक साथ संभालेंगे।
जब तक सरकार CBSE के लिए किसी नियमित चेयरपर्सन की नियुक्ति नहीं कर देती तब तक लोकांडे प्रशांत सीताराम इसके चेयरपर्सन रहेंगे। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। तकनीकी शिक्षा से लेकर लंबे प्रशासनिक अनुभव तक का उनका सफर काफी चर्चा में है। आइए जानते हैं उनकी पढ़ाई, करियर और अब तक निभाई गई अहम जिम्मेदारियों के बारे में।

गृह मंत्रालय में मिली नई जिम्मेदारी
गुरुवार को केंद्र सरकार ने लोखंडे प्रशांत सीताराम को केंद्रीय गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया। वह अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश (AGMUT) कैडर के वर्ष 2001 बैच के IAS अधिकारी हैं। कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। साथ ही यह भी तय किया गया है कि नियमित चेयरपर्सन की नियुक्ति होने तक वह CBSE अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार भी संभालते रहेंगे।
ये भी पढ़ें: IIT से पढ़ाई, 12 दिन की नौकरी फिर UPSC का ख्याल! दिलचस्प है 3 बार इंटरव्यू में रिजेक्ट होकर IPS बनने की कहानी
पहले भी निभा रहे थे यही जिम्मेदारी
लोखंडे प्रशांत सीताराम को पिछले महीने CBSE का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया था। उस समय भी वह गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे। उनकी नियुक्ति उस दौर में हुई, जब ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर विवाद सामने आया था। इसी विवाद के बीच तत्कालीन चेयरपर्सन को पद से हटाया गया और प्रशासनिक स्तर पर बदलाव किए गए।
IAS लोखंडे प्रशांत सीताराम का सफर
लोखंडे प्रशांत सीताराम ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद पुणे यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (B.E.) की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने मुंबई के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग (NITIE) से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। तकनीकी शिक्षा और प्रबंधन की समझ ने उनके प्रशासनिक कामकाज में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें कई अहम जिम्मेदारियां संभालने का अवसर मिला।
लोखंडे प्रशांत सीताराम वर्ष 2001 बैच के IAS अधिकारी हैं और AGMUT कैडर से जुड़े हैं। इस कैडर में अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और सभी केंद्र शासित प्रदेश शामिल होते हैं। दो दशक से अधिक समय के प्रशासनिक अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभागों में काम किया और अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं।
कई बड़े पदों पर कर चुके हैं काम
CBSE की जिम्मेदारी मिलने से पहले वह गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्यरत थे। इसके अलावा उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में डिप्टी कमिश्नर की जिम्मेदारी भी निभाई। वह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में निदेशक रह चुके हैं। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में काउंसलर (इकोनॉमिक्स) के रूप में भी उन्होंने सेवाएं दी हैं। इसके साथ ही कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली हैं।
CBSE का चेयरपर्सन क्यों बनाया गया?
सरकार ने उन्हें ऐसे समय में CBSE की कमान सौंपी, जब बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था को लेकर छात्रों की ओर से कई शिकायतें सामने आई थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने जांच के निर्देश दिए और बोर्ड के शीर्ष स्तर पर प्रशासनिक बदलाव किए। इसी प्रक्रिया के तहत लोखंडे प्रशांत सीताराम को चेयरपर्सन नियुक्त किया गया।
लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान लोखंडे प्रशांत सीताराम को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दो बार स्टेट अवॉर्ड (गोल्ड) फॉर मेरिटोरियस सर्विस से सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान उन अधिकारियों को दिया जाता है जिन्होंने प्रशासनिक कामकाज में बेहतर प्रदर्शन और प्रभावी सेवा का उदाहरण पेश किया हो।
ये भी पढ़ें: IAS की नौकरी छोड़ी,संभाली देश की तिजोरी! कौन हैं PM मोदी के 'संकटमोचक' शक्तिकांत दास,बनेंगे अगले वित्त मंत्री?












Click it and Unblock the Notifications