Alpha Movie Review: यशराज फिल्म्स की स्पाई यूनिवर्स की 'अल्फा' ने किया निराश, पैसा लगाने से पहले पढ़ें रिव्यू
फिल्म: अल्फा (Alpha)
स्टारकास्ट: आलिया भट्ट, शरवरी वाघ, बॉबी देओल, अनिल कपूर
डायरेक्टर: शिव रवैल
रनटाइम: 2 घंटे 20 मिनट
स्टार: 2 (**)
Alpha Movie Review: आज फिर से सिनेमाघरों में यशराज फिल्म्स की ऐतिहासिक स्पाई यूनिवर्स की फिल्म की अल्फा रिलीज हुई। बीते दिन भी दो फिल्में देखीं, सोचा भोरे-भोरे इसे भी चलकर देख लेते हैं। टाइगर, कबीर और पठान के बाद अब देश को कौन से धुरंधर स्पाई मिलने वाले हैं। कॉफी मचकाई और निकल पड़े, तो अब सीधे फिल्म पर बात करते हैं क्योंकि बहुत उम्मीद लगाकर गए थे, वजह ये कि फिल्म प्रमोशन के दौरान शरवरी वाघ और आलिया भट्ट से मुलाकात हुई तो उन्होंने बहुत सारी बातें बताई थीं। खैर, ये रिव्यू आपके लिए ये तय करेगा कि आपको सिनेमाघर में देखना है या फिर नेटफ्लिक्स पर, आइए करते हैं शुरू।

क्या है फिल्म अल्फा की कहानी
फिल्म की कहानी शुरू होती है 'अल्फा' नाम के प्रोग्राम से, जहां ऐसा सीरम बनाया जाएगा जिससे खतरनाक सोल्जर भारतीय सेना को मिल सकें लेकिन हर कहानी की तरह यहां भी कुछ गड़बड़ी होती और ऑफिशियल्स उसे बंद करने के लिए कहते हैं। इसके बाद अल्फा प्रोग्राम के कर्नल को डिमोट कर लेफ्टिनेंट कर्नल बना देते हैं। फिर भी वो चुपचाप इस प्रोग्राम को रन करता है।
फंडिंग कहां से आती है वो धीरे-धीरे पता चलता है। खैर वो सीता नाम की लड़की को उस सीरम के साथ बड़ा करता है और 18 साल की होने के बाद उसे मिशन देता है लेकिन एक समय के बाद वही लड़की उसकी जान के पीछे पड़ जाती है। आखिर क्यों? यहां सिर्फ एक ही क्यों नहीं है, बहुत सारे हैं। सीता कौन है? क्यों वो अल्फा प्रोग्राम वाले कर्नल को मारना चाहती है? उसका परिवार कहां है? कौन कौन है? ये सब फिल्म में पता चलता है लेकिन इस रिव्यू को पढ़ने के बाद आप तय करिएगा कि आपको ये जानना है या नहीं।
फिल्म की स्टारकास्ट और उनकी एक्टिंग
-सीता आलिया बनी हुई हैं। वो अच्छी एक्ट्रेस हैं लेकिन इस फिल्म में नहीं। उन्होंने फिल्म में अपना स्वैग, एंग्रीवुमेन वाला लुक सब रखा लेकिन बात नहीं बन पाई। हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट में भी कोशिश अच्छी की है। शरवरी ने मैं वापस आऊंगा में जो काम किया है, यहां वो कुछ भी नहीं दिखा है। दोनों ने बस स्वैग दिखाया है लेकिन फिल्म कहानी ने उसे भी खत्म कर दिया है।
-बॉबी देओल अभी भी एनिमल वाले किरदार से नहीं निकल पाए हैं। उन्होंने यहां जो हरियाणवी बोली है, हरियाणा के लोग उसे सुनकर अपना माथा पीट लेंगे। बॉलीवुड में यही दिक्कत है, जिस भाषा के एक्सेंट को पकड़ते हैं उसे तहस-नहस कर देते हैं। क्यों बोलना है हर जगह हरियाणवी एक्सेंट में।
-अनिल कपूर ठीक लगे हैं लेकिन कुछ जगह इमोशनल होना उनका फेक और ओवर लगता है। कई जगह वो अभी अपनी पिछली फिल्म सूबेदार वाले ही अनिल कपूर लगे हैं। इसमें कबीर है यानी ऋतिक रोशन। यहां पर भी डायरेक्टर ने उनके बालों को अच्छे से दिखाया है।
फिल्म का डायरेक्शन और तकनीकी पहलू
-फिल्म की कहानी इस बार आदित्य चोपड़ा के छोटे भाई उदय चोपड़ा ने लिखी है, उनसे इसकी वजह पूछनी पड़ेगी। आखिर क्या मजबूरी रही है? दूसरी चीज कि एक देश के सबसे सवेंदनशील इलाके के आर्मी बेस को दूसरे देश की आर्मी कैसे कैप्चर कर सकती है? सिनेमैटिक लिबर्टी अच्छी चीज है लेकिन इतनी भयंकर?
-वहीं फिल्म का स्क्रीनप्ले श्रीधर राघवन और सौमिल शुक्ला ने लिखा है। वो भी ऐसा है कि सीट के पीछे बैठे अंकल बार-बार ऊबासी ले रहे थे। कितना अच्छा है ये समझ आ ही रहा होगा। निर्देशन की कमान संभाली थी यशराज फिल्म्स के डायेरक्टर शिव रवैल ने, जिन्होंने पहले YRF के लिए द रेलवे मैन बनाई थी। ये उनका थिएट्रिकल डेब्यू है, उन्होंने यशराज स्पाई यूनिवर्स की लेगेसी को मेंटेन करते हुए भव्यता दिखाई है लेकिन इस बार सिर्फ एक विदेशी शहर उनके हिस्से आया है।
-कुल मिलकर शिव रवैल का काम भी उतना ही ठीक है, जितना इस फिल्म की थिएटर में हालत। वैसे शिव रवैल से ये भी कहना चाहूंगा कि आप बाहर आर्मी कैंप और उनके अस्पताल देखकर आइए। आपको बहुत कुछ पता चलेगा।
फाइनल वर्डिक्ट
कुल जमा बात ये है कि जिस उत्सुकता से फिल्म देखने गया था, उतनी ही निराशा के साथ इस रिव्यू को लिखा है क्योंकि फिल्म पूरी उम्मीद तोड़ देती है। जिगरा के बाद आलिया के हाथ लगी ये दूसरी फिल्म है। इस फिल्म के साथ दो और फिल्म नागबंधम और बेबी डू डाई डू भी रिलीज हुई है। अगर आप इसे इग्नोर कर बेबी डू डाई डू भी देख लेते हैं तो आपका पैसा सार्थक होगा। इसे तो आप कुछ समय बाद नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं।











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