तपती गर्मी में विपक्षी दलों ने बैठक के लिए शिमला की जगह पटना क्यों चुना? जानिए

विपक्षी दलों की 23 जून को होने वाली बैठक के लिए पटना के अलावा शिमला के नाम पर भी विचार किया गया था। लेकिन, हिमाचल में कांग्रेस की सरकार होने की वजह से आखिर पटना का नाम ही फाइनल रह गया।

बिहार की राजधानी पटना में 23 जून को तय हुई विपक्षी दलों की बैठक से पहले यह किस जगह पर आयोजित हो इसको लेकर भी अंदरखाने काफी चर्चाओं का दौर चला था। वैसे यह बैठक पटना में होनी चाहिए, इसका सबसे पहला सुझाव पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की ओर से आया था।

विपक्षी दलों को एकजुट करने की मुहिम के तहत जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कोलकाता पहुंचे थे, तब टीएमसी सुप्रीमो ने 70 की दशक के आंदोलन के इतिहास को देखते हुए इस बैठक के लिए भी विपक्षी नेताओं को पटना में इकट्ठा करने के लिए कहा था। लेकिन, बीच में विपक्षी दलों ने इसे शिमला में आयोजित करने पर भी विचार किया था।

Opposition meeting: Shimla Vs Patna

कांग्रेस शासित राज्य होने के चलते शिमला का पत्ता कटा
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में विपक्षी दलों की बैठक आयोजित करने के विचार के पीछे शायद सबसे बड़ी मंशा यह थी कि तपती गर्मी को देखते हुए यह सबसे आरामदायक वेन्यू हो सकता है। विपक्ष के ही कुछ दलों की तरह से ही यह सुझाव भी दिए गए थे। लेकिन, ममता बनर्जी और नीतीश कुमार समेत कई विपक्षी ने साफ कर दिया कि यह बैठक किसी गैर-कांग्रेसी राज्य में होनी चाहिए।

बिहार में सात दलों वाले महागठबंधन की सरकार है
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, जबकि बिहार की सत्ताधारी महागठबंधन में सात दल हैं, जिसकी अगुवाई जेडीयू और आरजेडी के हाथों में है। कांग्रेस के अलावा लेफ्ट पार्टियां भी इसमें शामिल हैं। हालांकि, अंत में पटना में ही यह बैठक आयोजित करने का फैसला हुआ, जिसपर शुरू से ही विचार किया जा रहा था। गौरतलब है कि 23 जून की तारीख पक्की होने से पहले कई बार यह बैठक स्थगित भी हो चुकी है।

विपक्ष की बैठक के लिए बिहार में सक्रिय हुआ महागठबंधन
उधर बिहार के सत्ताधारी महागठबंधन में शामिल सभी सातों दलों ने भाजपा के खिलाफ आयोजित होने वाली विपक्ष की महाबैठक को सफल बनाने के लिए अभी से माहौल बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए गठबंधन में शामिल सभी दलों ने ब्लॉक स्तर पर धरने का कार्यक्रम बनाया है। इसका मकसद जनता को भी बीजेपी के खिलाफ विपक्ष की मुहिम के साथ जोड़ना है।

नीतीश को विपक्ष का चेहरा प्रोजेक्ट करने की तैयारी में जेडीयू?
एक बड़ी बात ये है कि जेडीयू इसी के बहाने नीतीश कुमार को भी भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष का चेहरा प्रोजेक्ट करने में जुट गया है। जेडीयू प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार ने ईटी को बताया है बिहार में महागठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता का एक मॉडल पेश करने की कोशिश कर रहा है।

उनके मुताबिक, 'बेरोजगारी, महंगाई और संवैधानिक संस्थाओं का गलत इस्तेमाल के अलावा हम जाति-आधारित जनगणना कराने में बीजेपी की अनिच्छा के बारे में भी लोगों को जागरूक कर रहे हैं। '

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस अभियान की सफलता के लिए और विपक्ष की मुहिम में जनता की भागीदारी के लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर सभी सात दलों के वरिष्ठ नेताओं को इसको लेकर बनी समन्वय समितियों में जगह दी गई है।

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