रामदेव के बाद ललित मोदी के पीछे क्यों पड़ी कांग्रेस
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) बाबा रामदेव और ललित मोदी में क्या समानता है? दरअसल दोनों के पीछे पड़ी रही कांग्रेस पार्टी। ललित मोदी दूध का धुला हुआ नहीं है। और कांग्रेस में भी उसके खैरख्वाहों की कोई कमी नहीं है। जो व्यक्ति जान का खतरा बताकर कानून से भागा हुआ है, उसके साथ किसी को हमदर्दी नहीं होनी चाहिए।
उस पर जो भी सही-गलत आरोप लगे हैं,उनका उसे भारत में रहकर सामना करना चाहिए लेकिन क्या ये हकीकत नहीं है कि कांग्रेस और उसके नेतृत्व वाली यूपीए-२ सरकार तभी से उसके पीछे पड़ी हुई है, जब उसने केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर और उनकी पत्नी (दिवंगत) सुनंदा थरूर के कोच्चि टीम में शेयर होने का राज फाश कर दिया था और उसके बाद थरूर को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
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रामदेव भी हुए शिकार
स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ भी इसी तरह तमाम तरह के मुकदमें दर्ज कराकर उन्हें परेशान किया गया। कौन नहीं जानता कि यूपीए सरकार के दौरान क्या हो रहा था?
खुंदक मोदी से
वरिष्ठ लेखक ओमकार चौधरी कहते हैं कि मोदी के कारण कांग्रेस की फजीहत हुई। खासकर सोनिया गांधी की, क्योंकि थरूर उन्हीं की कृपा से मंत्री बने थे। तभी से कांग्रेस के नेता ललित मोदी से खार खाए बैठे हैं।
उस घटना के बाद ही ललित मोदी के खिलाफ तमाम तरह की जांच बैठायी गयी। उन्हें सींखचों के पीछे डालने का ग्राउंड तैयार किया गया। और ललित मोदी ऐसे अकेले नहीं हैं, जो कांग्रेस की बदले की राजनीति के शिकार हुए हैं।
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छिपकर क्यों रहें
खैर, इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि ललित मोदी को देश से बाहर रहने का या कहें कि छिपकर रहने का कोई अधिकार नहीं है। वे देश और देश के कानून से दूर रहकर एक तरह से बताना चाह रहे हैं कि उन्होंने गलत काम किया है।
ये उस शख्स को शोभा नहीं देता जिसके दादा गुजरमल मोदी और पिता कृष्ण कुमार मोदी को अब भी देश में लाखों लोग आदर कि नजरों से देखते हैं। गुजरमल मोदी ने मोदीनगर की स्थापना की थी।













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