कौन हैं रामकमल दास? कैसे हुए इनके 50 बच्चे? SIR में राहुल के दावे पर भड़के साधु-संतों ने खोला मोर्चा

Who is Ram Kamal Das: वाराणसी में हाल ही में मतदाता सूची को लेकर जो विवाद उठा, उसने राजनीति की गर्माहट बढ़ा दी। कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि वाराणसी के कश्मीरिगंज वार्ड में एक ही नाम के 50 से ज्यादा पुत्र मतदाता सूची में दर्ज हैं, जिससे चुनाव में धोखाधड़ी की आशंका जताई गई। लेकिन इस मामले ने धार्मिक समुदाय के बीच भी चर्चा शुरू कर दी है।

इंडिया टू़डे की रिपोर्ट के अनुसार, रामजानकी मठ के संतों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई वोटर फ्रॉड नहीं बल्कि सदियों पुरानी गुरु-शिष्य परंपरा का हिस्सा है, जिसे समझे बिना राजनीतिक लाभ के लिए इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इस परंपरा में शिष्य अपने गुरु को पिता मानते हैं और दस्तावेजों में गुरु का नाम दर्ज कराया जाता है। संतों ने राजनीतिक आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मामले को धार्मिक आस्था का विषय बताया है।

Ram Kamal Das Rahul Gandhi

कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया था कि यहां एक ही व्यक्ति 'रामकमल दास' के 50 से ज्यादा पुत्र मतदाता सूची में दर्ज हैं, जिसे उन्होंने मतदाता धोखाधड़ी बताया था। लेकिन रामजानकी मठ के संतों ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज करते हुए बताया कि यह मामला वोटर फ्रॉड का नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा का है।
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गुरु-शिष्य परंपरा का खास महत्व

रामजानकी मठ के प्रबंधक रामभरत शास्त्री ने बताया कि सूची में दर्ज पता मंदिर का है, जो आचार्य रामकमल दास द्वारा स्थापित है। मठ के शिष्य अपने गुरु को पिता मानते हैं, इसलिए आधिकारिक दस्तावेजों में जैविक पिता की जगह गुरु का नाम लिखा जाता है। यह परंपरा धार्मिक जीवन का हिस्सा है और इसे सम्मान दिया जाता है।

सरकार ने भी दी मंजूरी

वरिष्ठ शिष्य अभिराम ने कहा कि 2016 में भारत सरकार ने साधु-संन्यासियों को यह अधिकार दिया है कि वे अपने दस्तावेजों में गुरु का नाम पिता के स्थान पर लिखवा सकते हैं। यह पूरी तरह कानूनी और वैध है, ना कि किसी भी तरह की धोखाधड़ी।

राजनीतिक आरोपों पर संतों का कड़ा जवाब

अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कांग्रेस के आरोपों को सनातन परंपरा को बदनाम करने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल के छात्रों और साधुओं के वोटर आईडी में पिता की जगह गुरु का नाम होना सामान्य और मान्य परंपरा है। संतों ने इस मामले को राजनीतिक रंग देने वालों से बचने की अपील की और शांति बनाए रखने के लिए 'बुद्धि शुद्धि पूजन' भी किया।
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