कौन हैं EX-आर्मी चीफ Manoj Mukund Naravane? जिनकी किताब का संसद में राहुल ने किया जिक्र, चीन पर क्या है इसमें
Rahul Gandhi Ex-Army Chief Manoj Mukund Naravane: संसद के बजट सत्र के चौथे दिन (02 फरवरी) लोकसभा अचानक उस वक्त गरमा गई, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक ना छपी हुई किताब का जिक्र कर दिया।
राहुल गांधी ने दावा किया कि इस किताब में चीन, डोकलाम और सीमा विवाद को लेकर गंभीर बातें लिखी गई हैं। जैसे ही उन्होंने जनरल नरवणे को कोट करना शुरू किया, सत्ता पक्ष की बेंचों से विरोध तेज हो गया और पूरा सदन हंगामे में बदल गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तुरंत खड़े हुए और सवाल उठाया कि जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है, वह प्रकाशित ही नहीं हुई है। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि वह सदन के सामने वह किताब पेश करें, जिसके बारे में वो बात कर रहे हैं। स्पीकर ओम बिरला ने भी नियमों और संसदीय परंपराओं की याद दिलाई और कहा कि अप्रकाशित किताब या मैग्जीन के लेखों को कोट करना संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।
राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि किताब पूरी तरह ऑथेंटिकेटेड है, लेकिन सरकार उसे प्रकाशित नहीं होने दे रही। इसी बात पर अमित शाह ने कहा कि विवाद राहुल गांधी ने खुद खत्म कर दिया है, क्योंकि वह मान रहे हैं कि किताब छपी ही नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सबका ध्यान उस शख्स की ओर खींच दिया, जिनका नाम संसद के केंद्र में आ गया। सवाल उठा, आखिर कौन हैं जनरल मनोज मुकुंद नरवणे और उनकी किताब में चीन और डोकलाम को लेकर ऐसा क्या लिखा है, जिस पर संसद में इतना बवाल मच गया।

🟡 कौन हैं जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (Who is Manoj Mukund Naravane)
जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भारतीय सेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में रहे हैं, जिन्होंने जमीनी ऑपरेशन से लेकर रणनीतिक कमान तक हर स्तर पर काम किया। वह भारतीय सेना के 28वें थलसेना प्रमुख रहे और 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक इस पद पर सेवाएं दीं। उनसे पहले यह जिम्मेदारी जनरल बिपिन रावत के पास थी।
सेना प्रमुख बनने से पहले जनरल नरवणे ईस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, आर्मी ट्रेनिंग कमांड के प्रमुख और वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। वह सिख लाइट इन्फैंट्री से आने वाले तीसरे अधिकारी थे, जो सेना प्रमुख बने।

🟡 जनरल मनोज मुकुंद नरवणे शुरुआती जीवन और पढ़ाई (Manoj Mukund Naravane Early Life and Education)
मनोज मुकुंद नरवणे का जन्म 22 अप्रैल 1960 को पुणे में हुआ। उनका परिवार सेना और वायुसेना से गहराई से जुड़ा रहा है। उनके पिता मुकुंद नरवणे भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर रहे, जबकि उनकी मां सुधा नरवणे ऑल इंडिया रेडियो में उद्घोषिका थीं।
उन्होंने पुणे के ज्ञान प्रबोधिनी प्रशाला से स्कूली शिक्षा ली। इसके बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने डिफेंस स्टडीज में मास्टर्स और एमफिल किया है और डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज में पीएचडी भी कर रहे हैं। डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन और आर्मी वॉर कॉलेज महू में भी उन्होंने अध्ययन किया।
🟡 मनोज मुकुंद नरवणे सैन्य करियर की कहानी (Manoj Mukund Naravane Military Career Awards)
जनरल नरवणे को जून 1980 में सिख लाइट इन्फैंट्री की 7वीं बटालियन में कमीशन मिला। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स की कमान संभाली और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा वह असम राइफल्स के इंस्पेक्टर जनरल नॉर्थ भी रहे और पूर्वोत्तर में उग्रवाद के खिलाफ ऑपरेशन संभाले।
उन्होंने श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के तहत इंडियन पीस कीपिंग फोर्स के साथ भी सेवा दी। म्यांमार में भारत के सैन्य अताशे के तौर पर भी वह तैनात रहे। दिल्ली एरिया के जीओसी रहते हुए उन्होंने 2017 की गणतंत्र दिवस परेड की कमान संभाली।
Manoj Mukund Naravane Awards: जनरल नरवणे की सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल और थलसेना प्रमुख का प्रशस्ति पत्र दिया गया। वह सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट के कर्नल ऑफ द रेजिमेंट भी रहे।
🟡 मनोज मुकुंद नरवणे निजी जीवन (Manoj Mukund Naravane Personal Life)
जनरल नरवणे पुणे में रहते हैं। उनकी पत्नी वीणा नरवणे शिक्षिका हैं और आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उनकी दो बेटियां हैं। खाली समय में वह योग, पेंटिंग और बागवानी में रुचि रखते हैं।
🟡 किताब और डोकलाम विवाद क्या है (Book Controversy and Doklam Issue)
संसद में जिस किताब का जिक्र हुआ, वह जनरल नरवणे की कथित अप्रकाशित पुस्तक बताई जा रही है। राहुल गांधी का दावा है कि इस किताब में डोकलाम और चीन की गतिविधियों को लेकर सेना के भीतर की सोच और रणनीतिक आकलन दर्ज है। सरकार का पक्ष है कि जब किताब प्रकाशित ही नहीं हुई, तो उसके कंटेंट को संसद में कोट करना गलत है।
यही वजह है कि डोकलाम, चीन की घुसपैठ और सीमा सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे एक बार फिर संसद में टकराव का कारण बन गए। फिलहाल किताब सार्वजनिक नहीं है, लेकिन इस विवाद ने यह साफ कर दिया है कि जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की बातें आज भी देश की राजनीति और सुरक्षा बहस के केंद्र में हैं।












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