IAS Ravindra Kumar:फिर चर्चा में आए PM मोदी के फेवरेट IAS! कौन हैं 2 बार एवेरेस्ट फतह करने वाले रविंद्र कुमार?
IAS Ravindra Kumar: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपनी सख्त कार्यशैली, जनहित से जुड़े फैसलों और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के लिए पहचान बनाने वाले इस अधिकारी को हाल ही में फेम इंडिया सर्वे ने देश के 25 सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारियों की सूची में शामिल किया है।
2011 बैच के आईएएस अधिकारी रविंद्र कुमार सिर्फ प्रशासनिक कामों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी उपलब्धियों के कारण भी चर्चा में रहते हैं। वह दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर दो बार तिरंगा फहराने वाले देश के पहले IAS अधिकारी हैं। जल संरक्षण, पर्यावरण और जनसरोकारों से जुड़े उनके कामों ने उन्हें देश के चर्चित जिलाधिकारियों में शामिल कर दिया है।

कौन हैं IAS रविंद्र कुमार? (IAS Ravindra Kumar)
रविंद्र कुमार 2011 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी हैं। उनका जन्म 10 अप्रैल 1981 को बिहार में हुआ था। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) की तैयारी शुरू की और वर्ष 2011 में सफलता हासिल की। 29 अगस्त 2011 को उन्हें आधिकारिक रूप से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में नियुक्ति मिली।
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वर्तमान में वह आजमगढ़ के जिलाधिकारी और कलेक्टर हैं। उन्होंने 21 अप्रैल 2025 को जिले का कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह बुलंदशहर, झांसी और बरेली जैसे महत्वपूर्ण जिलों में DM रह चुके हैं। प्रशासनिक क्षेत्र में लगातार बेहतर काम करने की वजह से उनकी पहचान एक सक्रिय और परिणाम देने वाले अधिकारी के रूप में बनी है।
प्रशासनिक सफर और अहम जिम्मेदारियां
IAS बनने के बाद रविंद्र कुमार ने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। मई 2016 में उन्हें सीतापुर का मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया। इसके बाद अप्रैल 2017 में वह फर्रुखाबाद के जिलाधिकारी बने।
फर्रुखाबाद में कार्यकाल पूरा करने के बाद उन्हें लखनऊ में वाणिज्य कर विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई। दिसंबर 2017 में वह नई दिल्ली में केंद्र सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री के निजी सचिव के रूप में भी तैनात रहे। इन जिम्मेदारियों ने उन्हें प्रशासन और जनसेवा से जुड़े कई महत्वपूर्ण अनुभव दिए।
बुलंदशहर में नीम नदी से बनाई पहचान
जुलाई 2019 में रविंद्र कुमार को बुलंदशहर का जिलाधिकारी बनाया गया। यहां उन्होंने जल संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े कई अभियान शुरू किए। उनके कार्यकाल का सबसे चर्चित काम नीम नदी का पुनर्जीवन माना जाता है।
एक समय ऐसा था जब यह नदी लगभग अपना अस्तित्व खो चुकी थी। नदी का प्रवाह रुक चुका था और उसका बड़ा हिस्सा उपेक्षित पड़ा था। रविंद्र कुमार के नेतृत्व में प्रशासन और स्थानीय लोगों ने मिलकर नदी को फिर से जीवित करने का अभियान चलाया। इस प्रयास के बाद नीम नदी को नया जीवन मिला और यह पहल पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई।
बुंदेलखंड में पानी बचाने के लिए चलाए अभियान
अक्टूबर 2021 में रविंद्र कुमार को झांसी का जिलाधिकारी बनाया गया। बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से पानी की कमी और सूखे की समस्या से जूझता रहा है। ऐसे में उन्होंने जल संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बनाया।
उनके नेतृत्व में नदियों, तालाबों और पोखरों की सफाई कराई गई। कई जल स्रोतों को संरक्षित करने और उन्हें फिर से उपयोगी बनाने के लिए अभियान चलाए गए। ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए गए। भविष्य में पानी की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए उन्होंने पेयजल संवर्धन और जल संरक्षण को हमेशा प्राथमिकता दी।
सितंबर 2023 में उन्हें बरेली का जिलाधिकारी बनाया गया। वहां भी उन्होंने प्रशासनिक कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया। बाद में अप्रैल 2025 में उनका तबादला आजमगढ़ कर दिया गया, जहां वह वर्तमान में DM के रूप में कार्यरत हैं।
तमसा नदी को नया जीवन देने का मिशन
बुलंदशहर में नीम नदी के पुनर्जीवन के बाद रविंद्र कुमार ने आजमगढ़ में तमसा नदी के संरक्षण और सफाई अभियान को आगे बढ़ाया। करीब 89 किलोमीटर तक जिले में बहने वाली इस नदी की सफाई, संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए व्यापक अभियान चलाया गया।
इस अभियान में प्रशासन के साथ स्थानीय लोगों की भी बड़ी भूमिका रही। नदी संरक्षण से जुड़ी इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। इसी काम की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में की थी। प्रधानमंत्री ने तमसा नदी संरक्षण अभियान को जनभागीदारी और पर्यावरण संरक्षण का बेहतरीन उदाहरण बताया था। इसके बाद रविंद्र कुमार के काम की चर्चा और अधिक बढ़ गई।
दो बार फतह किया माउंट एवरेस्ट
रविंद्र कुमार प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ-साथ एक कुशल पर्वतारोही भी हैं। वह देश के पहले ऐसे IAS अधिकारी हैं जिन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर दो बार सफलतापूर्वक चढ़ाई की है। एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर उन्होंने तिरंगा फहराया और वहां से भी जल संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने लोगों से भविष्य की जरूरतों को देखते हुए पानी बचाने और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने की अपील की। उनकी यह उपलब्धि उन्हें अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से अलग पहचान दिलाती है।
सख्त प्रशासन, सरल व्यवहार और टीम को दिया सफलता का श्रेय
रविंद्र कुमार को कानून व्यवस्था के मामलों में सख्त अधिकारी माना जाता है। आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण और प्रशासनिक अनुशासन को लेकर उनका रवैया हमेशा स्पष्ट रहा है। यही कारण है कि जहां भी उनकी तैनाती रही, वहां प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयास दिखाई दिए।
देश के 25 सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारियों की सूची में शामिल होने के बाद रविंद्र कुमार ने इस उपलब्धि का श्रेय अपनी वर्तमान और पूर्व टीमों को दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन का कोई भी काम सिर्फ एक व्यक्ति के प्रयास से पूरा नहीं होता। जनसहयोग और टीमवर्क किसी भी सफलता की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। उनके अनुसार, ऐसे सम्मान अधिकारियों और कर्मचारियों को और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं।
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