कौन-कौन से नौकरशाह मोदी की नई कैबिनेट में बन सकते हैं मंत्री? क्या मिलेगा मंत्रालय? मास्टर प्लान जान लीजिए

Modi Cabinet Reshuffle: केंद्र की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet Reshuffle) के विस्तार को लेकर चर्चाएं बेहद तेज हैं। इस बार का फेरबदल बेहद चौंकाने वाला और लीक से हटकर हो सकता है। पीएम मोदी अपनी नई टीम में कुछ बेहद अनुभवी रिटायर्ड नौकरशाहों (Bureaucrats) को बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी में हैं।

मोदी सरकार का एक ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि जो अधिकारी 'परफॉर्मेंस' और 'लॉयल्टी' के पैमाने पर फिट बैठते हैं, उन्हें सरकार आसानी से जाने नहीं देती। यही वजह है कि देश को नई दिशा देने के लिए इस बार भी प्रशासनिक अनुभव को तरजीह दी जा रही है। आइए समझते हैं कि इस बार मोदी कैबिनेट में कौन-से नए चेहरे शामिल हो सकते हैं और किसे कौन-सा विभाग मिल सकता है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है।

Modi Cabinet Reshuffle

कौन-कौन से नौकरशाह मोदी की नई कैबिनेट में बन सकते हैं मंत्री?

मीडिया रिपोर्ट और पॉलटिकल एक्सपर्ट प्रदीप सिंह के मुताबिक रिटायर्ड नौकरशाहों में जो सबसे बड़ा नाम इस वक्त रेस में चल रहा है, वो है पूर्व रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास और खुफिया ब्यूरो (IB) के पूर्व प्रमुख तपन डेका का। इन दोनों ही अधिकारियों के पास संकट प्रबंधन और देश की सुरक्षा व अर्थव्यवस्था को संभालने का दशकों का अनुभव है।

अगर शक्तिकांत दास की कैबिनेट में एंट्री होती है, तो उन्हें वित्त मंत्रालय या आर्थिक मामलों से जुड़ा कोई बड़ा पोर्टफोलियो सौंपा जा सकता है। वहीं तपन डेका को देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री (MoS Interal Security) या रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कोई अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।

पीएम मोदी की कार्यशैली को करीब से देखें तो आपको पता चलेगा कि यह पहली बार नहीं है जब अफसरों को सीधे मंत्री बनाया जा रहा हो। इससे पहले एस जयशंकर (विदेश मंत्री) और हरदीप सिंह पुरी (नागरिक उड्डयन व आवास मंत्री) इसके सबसे उदाहरण हैं। रिटायर हो चुके अधिकारियों को टीम में शामिल करने से सरकार को जटिल पॉलिसियों को लागू करने और बड़े रिफॉर्म्स को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

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शक्तिकांत दास कौन हैं? (Who is Shaktikanta Das)

शक्तिकांत दास भारत के सबसे अनुभवी नौकरशाहों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 26 फरवरी 1957 को हुआ था। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव (Principal Secretary to the Prime Minister) के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 25वें गवर्नर भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने 15वें वित्त आयोग के सदस्य और जी-20 (G20) में भारत के शेरपा के तौर पर भी अहम भूमिका निभाई है।

करीब चार दशक लंबे प्रशासनिक करियर में शक्तिकांत दास ने केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार में कई अहम पदों पर काम किया। वे आर्थिक मामलों के सचिव, राजस्व सचिव और उर्वरक सचिव जैसे अहम पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वित्तीय नीतियों, टैक्स सिस्टम, बजट और आर्थिक सुधारों से जुड़े कई बड़े फैसलों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

Shaktikanta Das

शक्तिकांत दास का अनुभव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, न्यू डेवलपमेंट बैंक और एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक में भारत की ओर से वैकल्पिक गवर्नर के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इसके साथ ही वे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF),G20, ब्रिक्स (BRICS) और सार्क (SAARC) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत का पक्ष रखते रहे हैं।

तपन डेका कौन हैं? (Who is Tapan Deka)

तपन कुमार डेका भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के सबसे अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 25 फरवरी 1963 को हुआ था। वे भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 1988 बैच के अधिकारी हैं और हिमाचल प्रदेश कैडर से आते हैं। उन्होंने 1 जुलाई 2022 को देश की खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के 28वें निदेशक का पद संभाला था।

तपन डेका ने अपने पुलिस करियर का बड़ा हिस्सा इंटेलिजेंस ब्यूरो में बिताया। 1988 में आईपीएस बनने के बाद ही उन्होंने खुफिया एजेंसी में काम शुरू किया। आतंकरोधी अभियानों, आंतरिक सुरक्षा और संवेदनशील खुफिया मामलों में उन्हें लंबा अनुभव हासिल है।

Who is Tapan Deka

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ कई अहम सुरक्षा अभियानों में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। साल 2021 में उन्हें पुलिस महानिदेशक रैंक के लिए चयनित किया गया। निदेशक बनने के बाद कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उनका कार्यकाल जून 2025 तक बढ़ाया। इसके बाद मई 2025 में उन्हें एक और वर्ष का सेवा विस्तार दिया गया, जिससे उनका कार्यकाल जून 2026 तक हो गया। इस विस्तार के साथ तपन कुमार डेका देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो निदेशक बन गए।

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नौकरशाहों को क्यों सरकार में लाया जाता है?

रिटायर्ड अधिकारियों को सीधे सरकार चलाने की कमान सौंपना सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई विकसित देश इस फॉर्मूले का इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन दोनों के कार्यकाल में रिटायर्ड जनरलों (जैसे जेम्स मैटिस और लॉयड ऑस्टिन) को रक्षा मंत्री बनाया गया। पूर्व फेड चेयर जेनेट येलेन को वित्त मंत्रालय सौंपा गया।

सिंगापुर में यह नियम जैसा है कि टॉप ब्यूरोक्रेट्स रिटायरमेंट के बाद सरकारी कंपनियों और बड़ी नीतिगत संस्थाओं के मुखिया बनते हैं। जापान में 'अमकुदरी' परंपरा के तहत वरिष्ठ अधिकारी रिटायरमेंट के बाद व्यवस्था को संभालते हैं, जबकि ब्रिटेन में सीनियर सिविल सर्वेंट्स को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में जगह दी जाती है।

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राघव चड्ढा और श्रीकांत शिंदे को लेकर बड़ी अटकलें

इस कैबिनेट विस्तार में केवल ब्यूरोक्रेट्स ही नहीं, बल्कि कुछ बेहद चौंकाने वाले राजनीतिक नाम भी सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली चर्चा आम आदमी पार्टी (AAP) से भाजपा में आए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर है। राघव चड्ढा को मोदी कैबिनेट में शामिल कर कोई बड़ा आर्थिक या रणनीतिक मंत्रालय दिया जा सकता है। उनके साथ ही लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक मित्तल का नाम भी चर्चा में बना हुआ है।

इसके अलावा महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे और लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे का नाम भी रेस में सबसे आगे है। श्रीकांत शिंदे ने हाल ही में उद्धव गुट के कई सांसदों को एनडीए के पाले में लाने में बड़ी भूमिका निभाई थी, जिसका इनाम उन्हें भारी उद्योग या शिपिंग जैसे मंत्रालय के रूप में मिल सकता है। बिहार से पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पश्चिम बंगाल में टीएमसी छोड़ बीजेपी में शामिल हुए सुखेंदु शेखर राय को भी कैबिनेट में जगह मिलने की संभावना है।

इस बार कैबिनेट विस्तार में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों को इस बार कैबिनेट में ज्यादा और संतुलित प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद है। पीएम मोदी के नेतृत्व में मंत्रालयों का बंटवारा पूरी तरह से 'स्कोर कार्ड' और 'परफॉर्मेंस' पर आधारित होता है। जो मंत्री या अधिकारी फाइल क्लियरेंस, प्रोजेक्ट डिलीवरी और पब्लिक शिकायतों के निपटारे में टॉप पर रहते हैं, उन्हें प्रमोट किया जाता है।

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कब होगा मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार?

पहले खबरें थीं कि यह फेरबदल संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) से ठीक पहले निपटा लिया जाएगा। लेकिन ताजा अपडेट के मुताबिक अब यह विस्तार मानसून सत्र के बाद ही मुमकिन हो पाएगा। इसकी दो मुख्य वजहें हैं।

  • पहला- पीएम मोदी का विदेशी दौरा: प्रधानमंत्री आज से ही इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के तीन देशों के महत्वपूर्ण दौरे पर रवाना हो रहे हैं, जिसके चलते दिल्ली में फिलहाल बड़ी सियासी हलचल पर कुछ दिनों का विराम लगेगा।
  • दूसरा- संगठनात्मक बदलाव: बीजेपी के भीतर "टीम नबिन" (बीजेपी अध्यक्ष नबिन के नेतृत्व वाली टीम) का एलान जल्द होने वाला है। इसके तहत कुछ मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन की जिम्मेदारी दी जाएगी, और संगठन के युवा चेहरों को मोदी कैबिनेट में एंट्री मिलेगी।
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