क्या है केरल की 'पैन्कुनी अरट्टु' शोभायात्रा? जब देवता चलते हैं रनवे पर, थम जाती हैं उड़ानें
Padmanabhaswamy Temple: केरल में तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने आज शाम 4:45 बजे से रात 9 बजे तक लगभग पांच घंटे के लिए अस्थायी रूप से उड़ान संचालन को निलंबित कर दिया है।
यह निर्णय श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (Padmanabhaswamy Temple) की पवित्र 'पैन्कुनी अरट्टु' (Painkuni Aarattu)शोभायात्रा के सुचारू आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। जो दशकों से चली आ रही एक परंपरा है।

रनवे से होकर गुजरती है शोभायात्रा
'पैन्कुनी उत्सव' तिरुवनंतपुरम स्थित श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का भव्य 10-दिवसीय त्योहार है। इस त्योहार के अंतिम दिन 'अरट्टु' के अवसर पर मंदिर से एक भव्य शोभायात्रा निकलती है, जो हवाई अड्डे के रनवे से होकर गुजरती है और शंखुमुगम बीच तक जाती है, जहां भगवान की मूर्तियों का पवित्र स्नान कराया जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और हजारों श्रद्धालु इस शोभायात्रा में भाग लेते हैं।
कैसे निकाली जाती है यात्रा?
इस भव्य शोभायात्रा के दौरान, श्री पद्मनाभस्वामी को स्वर्ण गरुड़ वाहन पर विराजमान कर ले जाया जाता है, जबकि तेक्केदम नरसिंहमूर्ति और तिरुवंबाडी श्री कृष्णस्वामी को रजत गरुड़ वाहनों पर ले जाया जाता है।
यह यात्रा वेस्ट फोर्ट (पश्चिम किला) से शुरू होती है और हवाई अड्डे से होकर गुजरते हुए शंखुमुगम समुद्र तट पर समाप्त होती है। हजारों श्रद्धालु इस दिव्य शोभायात्रा में भाग लेते हैं और इसकी भव्यता सदियों से चली आ रही परंपरा को जीवंत बनाती है।
गौरवशाली है इतिहास?
इस शोभायात्रा में श्री पद्मनाभस्वामी एवं अन्य देवी-देवताओं को शंखुमुगम समुद्र तट तक आरट्टु अनुष्ठान के लिए ले जाया जाता है। यह पारंपरिक यात्रा चंद्रमा के उदय के समय आयोजित की जाती है। तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डा 1932 में शंखुमुगम के पास त्रावणकोर के महाराज चिथिरा तिरुनाल बालाराम वर्मा के नेतृत्व में स्थापित किया गया था।
सरकार के साथ है समझौता
हवाई अड्डे के निर्माण से पहले ही आरट्टु मार्ग विद्यमान था, और राजा ने यह सुनिश्चित किया कि इस मार्ग को मंदिर की शोभायात्राओं के लिए संरक्षित रखा जाए। इस व्यवस्था को केंद्र सरकार के साथ एक औपचारिक समझौते द्वारा मान्यता दी गई, जो आज तक जारी है।
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साल में दो बार किया जाता है बंद
तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे का रनवे वर्ष में दो बार श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की शोभायात्रा के लिए बंद किया जाता है। यह पवित्र परंपरा 1932 में हवाई अड्डा स्थापित होने के बाद भी जारी है, जिससे क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित किया जा रहा है।
'पैन्कुनी' उत्सव, जो मीणम महीने में मनाया जाता है, श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के दो वार्षिक त्योहारों में से एक है। दूसरा त्योहार 'अल्पाशी' उत्सव है, जो तुलाम महीने में मनाया जाता है। दोनों उत्सवों का समापन शंखुमुगम बीच पर आरट्टु अनुष्ठान के साथ होता है।
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