सीनियर के उत्पीड़न से परेशान महिला जज ने CJI को पत्र लिख मांगी इच्छा मृत्यु, कहा,"न्याय की कोई उम्मीद नहीं"
उत्तर प्रदेश की एक युवा महिला न्यायिक अधिकारी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को एक खुला पत्र लिखकर अपना जीवन समाप्त करने की अनुमति मांगी है। उन्होंने अपनी पिछली पोस्टिंग के दौरान अपने वरिष्ठ पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने पत्र में यह भी लिखा कि उन्हें निष्पक्ष जांच की भी उम्मीद नहीं है न्याय तो बहुत दूर की बात है।
युवा महिला जज ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को 2 पन्नों का पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने अपने साथ हुए उत्पीड़न के बारे में बताया। साथ ही उन्होंने ये भी लिखा है कि उन्होंने अपनी जान लेने की भी कोशिश की पर उनका ये प्रयास सफल नहीं हो सका। महिला न्यायिक अधिकारी का लिखा ये लेटर गुरुवार से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

क्या लिखा है लेटर में?
दो पन्नों के पत्र में महिला जज ने लिखा, "मैं बहुत उत्साह और विश्वास के साथ न्यायिक सेवा में शामिल हुई थी। मुझे लगा था कि मैं आम लोगों को न्याय दिलाऊंगी। मुझे क्या पता था कि मैं जिस दरवाजे पर जाऊंगी, जल्द ही मुझे न्याय के लिए भिखारी बना दिया जाएगा। मेरी सेवा के थोड़े से समय बाद ही मुझे खुले मंच पर दुर्व्यवहार सहने का दुर्लभ सम्मान मिला है।"
"मेरे साथ बहुत बुरा और हद दर्जे का बर्ताव किया गया"
अपने पत्र में उन्होंने लिखा, "मेरा यौन उत्पीड़न हद दर्जे तक किया गया है। मेरे साथ बिल्कुल कूड़े जैसा व्यवहार किया गया। मैं एक अवांछित कीट की तरह महसूस करती हूं, और मुझे दूसरों को न्याय दिलाने की आशा थी।"
"मुझे सीनियर ने रात में मिलने बुलाया"
पत्र में उन्होंने आगे लिखा, "मुझे उम्मीद नहीं थी कि मेरी शिकायतों और बयान को मूलभूत सत्य के रूप में लिया जाएगा। मैं बस निष्पक्ष जांच की कामना करती थी।'' उनका आरोप है कि उनके सीनियर ने उन्हें रात में मिलने बुलाया। महिला जज का दावा है कि उन्होंने आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी, लेकिन प्रयास सफल नहीं हुआ।
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ को लिखे अपने पत्र में महिला न्यायधीश ने लिखा,"मुझे अब जीने की कोई इच्छा नहीं है। पिछले डेढ़ साल में मुझे चलती-फिरती लाश बना दिया गया है। इस निष्प्राण और निर्जीव शरीर को अब इधर-उधर ढोने का कोई प्रयोजन नहीं है। मेरी जिंदगी का कोई मकसद नहीं बचा है। कृपया मुझे अपना जीवन सम्मानजनक तरीके से खत्म करने की अनुमति दें। मेरी जिंदगी खारिज कर दी जाए।"
साथ ही उन्होंने भारत में कामकाजी महिलाओं को सिस्टम के खिलाफ लड़ने का प्रयास न करने की सलाह दी। उन्होंने लिखा,"अगर कोई महिला सोचती है कि आप सिस्टम के खिलाफ लड़ेंगी। मैं आपको बता दूं, मैं नहीं कर सकी और मैं जज हूं। मैं अपने लिए निष्पक्ष जांच कराने की भी हिम्मत नहीं जुटा सकी। न्याय तो दूर की बात है। मैं सभी महिलाओं को सलाह देती हूं कि वे खिलौना या निर्जीव वस्तु बनना सीखें।"
मामले के संज्ञान में आने के बाद से लगातार महिला न्यायिक अधिकारी और उनके वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन दोनों ही लोगों से अब तक संपर्क नहीं हो सका है।
पत्र पर CJI चंद्रचूड़ ने क्या एक्शन लिया?
न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार लेटर वायरल होने के बाद गुरुवार की देर रात को चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट के सेकेट्री जनरल अतुल एम कुरहेकर को इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट मांगने को कहा। एसजी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर महिला जज की साड़ी शिकायतों के बारे में जानकारी मांगी है।
रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई चंद्रचूड़ के निर्देश पर उनके कार्यालय ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से शिकायत की वर्तमान स्थिति की जानकारी आज दोपहर तक भेजने को कहा है। हालांकि, जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने भी महिला जज के खुले पत्र का संज्ञान लिया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 13 दिसंबर को महिला जज की याचिका यह कह कर खारिज कर दी थी कि अंदरूनी कमेटी मामले को देख रही है, लिहाजा इसमें दखल देने का कोई कारण नजर नहीं आता।
यह देखें: Haryana News: संसद की घटना पर बोले सीएम खट्टर, कहा-'दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई'












Click it and Unblock the Notifications