वेनेजुएला से समझिए, जहां मुफ्त की राजनीति में खेत, किसान और बाजार सब नष्ट हो गए?
नई दिल्ली। भारत में नए कृषि कानून 2020 को लेकर पिछले 15 दिनों से जारी हंगामा खत्म होता नहीं दिख रहा है, जिसका खामियाजा ही कहेंगे कि महामारी की चोट से उबरने की कोशिश कर रही भारतीय अर्थव्यवस्था को रोजाना लाखों की चपत लग रही है। ऐसे में सवाल है कि आखिर हरियाणा और पंजाब के किसान एमएसपी, मंडी और एपीएमसी एक्ट को लेकर इतनी जद्दोजहद में क्यों हैं, जबकि देश के अन्य राज्यों के किसान शांत है और अपनी कृषि कार्यों में व्यस्त हैं, लेकिन पंजाब और हरियाणा के किसान आंदोलनरत हैं।


परंपरागत किसानी को छोड़ नहीं पाए हैं हरियाणा और पंजाब के किसान
गौरतलब है हरियाणा और पंजाब के किसान परंपरागत किसानी को अभी छोड़ नहीं पाए हैं और हर साल धान और गेहूं की खेती कर थोक के भाव में अपनी फसल सरकार को एमएमसपी पर बेंचकर फारिक हो जाते हैं, जबकि अन्य राज्यों के किसान बदलते समय के साथ किसानी में परिवर्तन किए हैं और नकदी फसलों पर ध्यान दिया है। यही कारण है कि पंजाब और हरियाणा को छोड़कर अन्य राज्यों के किसान एमएसपी पर उतना आश्रित नहीं है, जबकि पंजाब और हरियाणा पूरी तरह से एमएसपी पर आश्रित हैं।

एमएसपी पर निर्भरता पंजाब और हरियाणा किसानों की नियति बन गई है
कह सकते हैं कि एमएसपी पर निर्भरता पंजाब और हरियाणा किसानों की नियति बन गई है, क्योंकि कृषि में नवाचार नहीं करते हैं। मसलन, पंजाब औ हरियाणा के किसी किसान के पास 10 बीघा जमीन है, तो वह गेहूं की फसल लगा रहा है और उसके पास 100 बीघा जमीन है तब भी वह गेहूं की उगा रहा है और सरकार द्वारा सब्सिडाइज्ड यानी एमएसपी पर अपनी फसल बेचकर फारिक हो जाता है, जिसे सरकार को खरीदना ही पड़ता है, जबकि अन्य राज्यों में परंपरागत रबी और खरीफ फसलों के अलावा मिश्रित और नकदी फसल उगाकर सरकार पर निर्भर नहीं है।

MSP की अवधारणा की नीति कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए लाई गई
दरअसल, सरकार समाजवादी और लोक कल्याणकारी भावनाओं के तहत कृषि क्षेत्र और किसानों को प्रोत्साहित करने और उनके उपज को लागत की तुलना में बेहतर मूल्य प्रदान करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की अवधारणा लेकर आई थी, जिसका मतलब था कि अगर किसान की उपज को मार्केट में उसकी लागत की तुलना में कम कीमत मिल रही है, तो सरकार प्रोत्साहन राशि पर उनके उपज खरीद लेगी, जिसका उपयोग सरकार गरीबों को पीडीएस के जरिए मुफ्त में राशन देने में करती है।

पंजाब और हरियाणा के किसान भारी मात्रा फसल एमएसपी पर बेंचते हैं
दिलचस्प बात यह है कि हरियाणा और किसान पूरी तरह से सरकार द्वारा घोषित प्रोत्साहन राशि पर फसल खऱीदने के लिए निर्धारित एमएसपी पर आश्रित हो गई और धान और गेहूं का व्यवसायिक उत्पादन शुरू कर दिया और अपनी फसल लेकर सीधे मंडी पर पहुंचने लगी, क्योंकि एमएसपी पर सरकार को गेंहू और धान खरीदनी मजबूरी बन गई। विशेषकर पंजाब और हरियाणा के किसान भारी मात्रा गेंहू और धान सरकार को एमएसपी पर बेंचती है और सरकार को भारी मात्रा में गेंहू और धान खऱीदने के लिए भंडारण की जरूरत होती है और फिर उसे मुफ्त में गरीबों को बांटना पड़ता है।

सरकार ने एमएसपी पर निर्भरता कम करने के लिए कानून लेकर आई
माना जाता है इसका असर सरकारी खजाने पर पड़ता है, जिससे निपटने के लिए सरकार ने नए कृषि कानून 2020 में तीन कानून लेकर आई, जिसके जरिए एमएसपी पर फसल बेचने की किसानों की निर्भरता को कम करते हुए, उन्हें एक और विकल्प दिया कि वो कहीं भी अपनी फसल बेच सकते हैं। यह फैसला किसानों के हित में था, लेकिन किसान जब तक इसे समझ पाते कि देश में सर्वाधिक कमीशनखोर एंजेट ने कृषि कानून को किसानों के खिलाफ बताकर किसानों को भड़का दिया कि सरकार एमएसपी को खत्म करने जा रही है, जबकि कानून में इसका कहीं भी उल्लेख नहीं हैं।

कल्याणकारी योजना के बेजा इस्तेमाल का असर देश के खजाने पर पड़ता है
आइए अब समझते हैं कि लोक कल्याणकारी योजनाएं के बेजा इस्तेमाल का असर देश के खजाने पर जब पड़ता है, तो देश का क्या हाल हो सकता है। इसके लिए हमें दक्षिणी अमेरिकी देश वेनेजुएला का उदाहरण लेना होगा, जो अभी बेहद आर्थिक संकट से गुजर रहा है। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शुमार वेनेजुएला वर्तमान में दीवालिया होने के कगार पर है, जिसके पीछे की वजह थीं, वहां की समाजवादी नीतियां और लोक कल्याणी योजनाएं, जिसका असर वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पर तब पड़ना शुरू हुआ, जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें गिरनी शुरू हो गईं।

वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था 95 फीसदी तेल निर्यात पर निर्भर थी और...
वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था 95 फीसदी तेल निर्यात पर निर्भर थी और जब तक तेल की कीमतें ऊंचाईयां छूती रहीं, वेनेजुएला की सत्ता पर काबिज समाजवादी सरकारों ने तेल की आमदनी से लबालब खजाने को लोक कल्याणकारी योजनाओं में पानी की तरह बहाया और लोगों को मुफ्त बिजली, पानी, अस्पताल और शिक्षा दी गई। यहां की समाजवादी सरकार ने ओद्योगिकीकरण के विस्तार दिया, जिससे किसानी पीछे छूट गई, जिससे वेनेजुएला में कृषि क्षेत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा और परिणाम स्वरूप वेनेजुएला को जल्द ही घरेलू खाद्य जरूरतों के लिए भी खाद्दान्न को आयात करना पड़ गया।

कल्याणकारी योजनाएं प्रोत्साहन होती है, उनकी गांरटी नहीं होती है
वेनेजुएला के उदाहरण से यह सबक मिलता है कि लोक कल्याणकारी योजनाएं प्रोत्साहन के लिए होती है, उनकी गांरटी नहीं होती है। क्योंकि वेनेजुएला की समाजवादी सरकार ने जैसे ही जनता के लिए सबकुछ मुफ्त मुहैया करना शुरू किया, वहां के मेहनतकश किसानों और काश्तकारों को मेहनत करना भारी पड़ गया और उन्होंने किसानी से भी तौबा कर लिया। जब तक तेल की कीमतें जब तक ऊंची रहीं, तब तक लोक कल्याणकारी योजनाएं चली, लेकिन जैसे ही तेल की कीमतें गिरी समाजवादी सरकार की नीतियां फेल हो गईं, क्योंकि सरकार खजाने पर दवाब बढ़ गया और महंगाई चरम पर पहुंच गई।

किसान एमएसपी से बाहर उपज बेचने की जहमत नहीं उठाना चाहते है
हरियाणा और किसान की हालत भी उसी तरह दिख रही है, वो एमएसपी अपनी निर्भरता के इतने आदी हो चुके हैं कि बाहर किसी और अपनी उपज को बेचने की जहमत उठाना ही नहीं चाहते है, अब भले ही इससे सरकार को जरूरत से अधिक एमएसपी पर अनाज खरीदकर स्टोरेज में सड़ाना क्यों न पड़ जाए। स्टोरेज में अनाजों के सड़ने की खबरें अक्सर सुर्खियां बनती है, क्योंकि बदली हुई व्यवस्था में अब सरकारें गरीबों को मुफ्त अनाज वितरण करने के अलावा लाभार्थियों के खातों में नकद पैसा ट्रांसफर करने लगी है।

एमएसपी पर किसानों की उपज खरीदने के प्रावधान खत्म नहीं हुआ है
नए कानून में एमएसपी पर किसानों की उपज खरीदने के प्रावधान को सरकार ने खत्म नहीं किया है। हरियाणा और पंजाब के किसान अभी भी मंडी में जाकर अपनी फसल सरकार को पहले ही तरह बेच सकते हैं, लेकिन हरियाणा और पंजाब में स्थित अनाज मंडियों में किसानों को फसल बेचने में मदद करने वाले हजारों कमीशन एजेंट यानी बिचौलिया में डर बैठ गया कि अगर किसान मंडी से बाहर अनाज बेचने चला गया तो उनकी दुकान बंद हो जाएगी। इसके बाद ही एमएमसपी बंद होने की निर्मूल आशंकाएं फैलाकर किसानों को सड़क पर उतार दिया गया।

सरकारी खजाने पर दबाव कम करने के लिए किसानों को विकल्प दिया गया
भारत सरकार ने वेनेजुएला से सबक लेते हुए सरकारी खजाने पर दबाव को कम करने के लिए कृषि कानून में उक्त प्रावधान किए ताकि सरकार पर प्रोत्साहित दर यानी एमएसपी पर अनाज खरीदने और उसके भंडारण का दवाब कम हो। इसमें किसानों को भी लाभ है, क्योंकि उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए मंडी पर निर्भरता नहीं रह गई है, वो कहीं भी एमएसपी से ऊंचे भाव में भी सौदा कर सकते हैं और अगर किसान बाहर अपनी उपज नहीं बेच पाते हैं, तो एमएसपी पर अनाज बेचने का विकल्प खुला ही हुआ है, जहां वो जब चाहे अपनी फसल बेच सकती है, जिसे सरकार खरीदेगी ही खरीदेगी।

वर्तमान में दक्षिणी अमेरिकी देश वेनेजुएला में 100 फीसदी से अधिक महंगाई है
वर्तमान में दक्षिणी अमेरिकी देश वेनेजुएला में 100 फीसदी से अधिक महंगाई, गरीबी रेखा के नीचे 94 फीसदी आबादी, कुपोषण के शिकार 75 फीसदी लोग और देश छोड़कर भाग चुके 10 फीसदी लोगों की हालत देश में लोक कल्याणकारी योजनाओं की अति से खाली हुए खजाने की वजह से हुई है। वेनेजुएला में आज बाजार और वहां की करेंसी सब नष्ट हो चुकी है। एक लाख बोलेबियन करेंसी की कीमत 1000 गुना नीचे गिर गई है। यही वजह था कि वेनेजुएला को 2015 में समाजवाद को बॉय-बॉय कहना पड़ गया।
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