Venezuela Earthquake: ये चमत्कार नहीं तो क्या? भूकंप के 6 दिन बाद मलबे से जिंदा निकला 3 साल का मासूम- Video
Venezuela Earthquake: वेनेजुएला में आए जानलेवा भूकंप के छह दिन बाद एक ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरे देश को भावुक कर दिया। राजधानी कराकस में राहत और बचाव दल ने मलबे के नीचे दबे एक 3 साल के बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस भीषण आपदा में अब तक 1,700 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में इस मासूम का जिंदा मिलना राहत टीमों और पीड़ित परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बन गया है।
बिना खाना-पानी के 6 दिन तक कैसे बचा मासूम?
राहत अधिकारियों के मुताबिक, बच्चा करीब छह दिनों तक मलबे के नीचे फंसा रहा। इतने लंबे समय तक बिना भोजन और पर्याप्त पानी के जीवित रहना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, जीवित लोगों के मिलने की संभावना कम होती जा रही थी। ऐसे में इस बच्चे का सुरक्षित बाहर निकलना पूरे बचाव अभियान के लिए बेहद खास पल बन गया।

जॉर्डन की रेस्क्यू टीम ने बचाई जान
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में जॉर्डन सिविल डिफेंस की टीम को बेहद सावधानी से बच्चे को मलबे से बाहर निकालते देखा जा सकता है। कंक्रीट और लोहे की सरियों के बीच फंसे बच्चे को जैसे ही बाहर निकाला गया, वहां मौजूद राहतकर्मियों ने तालियां बजाकर खुशी जाहिर की। यह दृश्य पूरी दुनिया में लोगों को भावुक कर रहा है।
अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में बच्चा
जॉर्डन के सार्वजनिक सुरक्षा निदेशालय (PSD) ने बताया कि बच्चे को बाहर निकालने के बाद उसकी हालत स्थिर थी। सुरक्षा कारणों से उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। उसे तुरंत एम्बुलेंस से अस्पताल भेजा गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी पूरी मेडिकल जांच कर रहे हैं। फिलहाल बच्चे को लगातार निगरानी में रखा गया है ताकि किसी भी तरह की अंदरूनी समस्या का समय पर इलाज किया जा सके।
मलबे के नीचे कैसे बच जाती है जान?
डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों के जिंदा बचने की संभावना कई बार वयस्कों से ज्यादा होती है। जब इमारत गिरती है, तो बड़े कंक्रीट ब्लॉकों के बीच छोटी-छोटी खाली जगहें यानी 'एयर पॉकेट्स' बन जाती हैं। बच्चों का शरीर छोटा होने की वजह से वे इन जगहों में फंसकर सीधे दबने से बच सकते हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों को वयस्कों की तुलना में कम ऑक्सीजन की जरूरत होती है, जिससे उनके जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।
डिहाइड्रेशन और संक्रमण का रहता है खतरा
हालांकि, इतने लंबे समय तक मलबे में फंसे रहने से शरीर में पानी की भारी कमी, संक्रमण और धूल के कारण सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए बचाए गए लोगों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कर गहन चिकित्सा निगरानी में रखा जाता है। डॉक्टर बच्चे की हर जरूरी जांच कर रहे हैं ताकि किसी भी छिपी हुई चोट का समय रहते इलाज हो सके।
क्या होता है 'क्रश सिंड्रोम'?
विशेषज्ञों के मुताबिक, मलबे से निकाले गए लोग शुरुआत में ठीक दिख सकते हैं, लेकिन उनमें 'क्रश सिंड्रोम' का खतरा रहता है। यह तब होता है जब लंबे समय तक दबे हुए शरीर के हिस्से पर से अचानक वजन हट जाता है। इससे मांसपेशियों में जमा जहरीले तत्व (टॉक्सिन्स) तेजी से खून में घुल जाते हैं और किडनी, दिल समेत दूसरे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी वजह से ऐसे मरीजों की लगातार निगरानी जरूरी होती है।
एक बच्चे की मुस्कान बनी उम्मीद की नई किरण
फिलहाल इंजीनियरों की टीमें इमारतों की सुरक्षा का आकलन कर रही हैं ताकि लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके। इस भीषण त्रासदी के बीच तीन साल के बच्चे का छह दिन बाद जिंदा मिलना पूरे वेनेजुएला के लिए उम्मीद का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है। यह घटना बता रही है कि सबसे कठिन हालात में भी उम्मीद जिंदा रह सकती है।
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