Japanese PM साने तकाइची पहुंचीं दिल्ली, अब तक कितने जापानी पीएम आए भारत? कौन रहा सबसे पॉपुलर?
Japanese PM In India: जापान की प्रधानमंत्री साने तकाइची (Sanae Takaichi) के भारत दौरे ने एक बार फिर दोनों देशों के रिश्तों को सुर्खियों में ला दिया है। भारत और जापान के संबंध सिर्फ व्यापार या रक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बौद्ध संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे कई साझा हितों पर आधारित हैं। पिछले करीब 70 सालों में जापान के कई प्रधानमंत्रियों ने भारत का दौरा किया और हर यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दी। लेकिन इनमें एक ऐसे प्रधानमंत्री भी रहे, जिन्हें भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता माना जाता है।
भारत-जापान रिश्तों की मजबूत नींव
भारत और जापान के राजनयिक संबंध 1952 में शुरू हुए थे। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत उन शुरुआती देशों में शामिल था जिसने जापान के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाया। इसके बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत होता गया।

70 सालों में किन-किन जापानी प्रधानमंत्रियों ने किया भारत दौरा?
भारत की यात्रा करने वाले जापानी प्रधानमंत्रियों में कई नाम शामिल हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में जापानी प्रधानमंत्रियों का भारत के प्रति लगाव बढ़ा है। अगर शुरुआत से देखें तो नोबुसके किशी से लेकर अब तक कई प्रधानमंत्री भारत आ चुके हैं, इस लिस्ट में-
नोबुसुके किशी (1957) – किसी जापानी प्रधानमंत्री का पहला भारत दौरा।
काकुएई तनाका (1974) – आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर।
यासुहिरो नाकासोने (1984) – शीत युद्ध के दौर में रिश्तों को नई दिशा।
रयुतारो हाशिमोतो (1997) – आर्थिक साझेदारी पर फोकस।
योशिरो मोरी (2000) – "ग्लोबल पार्टनरशिप" की शुरुआत।
जुनिचिरो कोइज़ुमी (2005) – रणनीतिक सहयोग को नई गति।
शिंजो आबे (2007, 2008, 2014, 2015, 2017) – सबसे अधिक बार भारत आने वाले जापानी प्रधानमंत्री।
योशिहिदे सुगा ने प्रधानमंत्री रहते हुए भारत का दौरा नहीं किया, लेकिन क्वाड बैठकों में भारत के साथ लगातार जुड़े रहे।
फुमियो किशिदा (2023) – नई दिल्ली में भारत-जापान विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया।
साने तकाइची (2026) – भारत दौरे के जरिए रक्षा, सेमीकंडक्टर, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और इंडो-पैसिफिक सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश।
शिंजो आबे क्यों बने भारत के सबसे लोकप्रिय जापानी प्रधानमंत्री?
अगर भारत में किसी जापानी प्रधानमंत्री को सबसे ज्यादा लोकप्रियता मिली, तो वह थे शिंजो आबे। इसकी कई वजहें हैं। सबसे पहली वजह थी उनका भारत के प्रति व्यक्तिगत लगाव। आबे ने सिर्फ सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक स्तर पर भी भारत से जुड़ने की कोशिश की।
संसद में दिया था ऐतिहासिक भाषण
2007 में भारतीय संसद को संबोधित करते हुए शिंजो आबे ने अपना प्रसिद्ध भाषण "Confluence of the Two Seas" दिया। इसी भाषण में उन्होंने हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को एक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में जोड़ने की बात कही। बाद में यही सोच "फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक" रणनीति की नींव बनी।
बुलेट ट्रेन से लेकर मुंबई-अहमदाबाद प्रोजेक्ट तक
शिंजो आबे के कार्यकाल में भारत-जापान आर्थिक सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। सबसे चर्चित परियोजना रही मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन), जिसमें जापान ने बेहद कम ब्याज पर वित्तीय सहायता दी। इसके अलावा दिल्ली मेट्रो, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, औद्योगिक कॉरिडोर और कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भी जापान की अहम भूमिका रही।
प्रधानमंत्री मोदी और आबे की दोस्ती भी बनी चर्चा का विषय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे के बीच व्यक्तिगत रिश्तों ने भी दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत बनाया। दोनों नेताओं ने कई बार एक-दूसरे के देशों का दौरा किया। 2017 में आबे अहमदाबाद पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ रोड शो किया और बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास किया। यह तस्वीर आज भी भारत-जापान संबंधों की सबसे प्रतीकात्मक तस्वीरों में गिनी जाती है।
डिफेंस और इंडो-पैसिफिक में बढ़ी साझेदारी
चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच भारत और जापान के रणनीतिक रिश्ते पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुए हैं। क्वाड (Quad), समुद्री सुरक्षा, रक्षा अभ्यास, साइबर सुरक्षा और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में दोनों देश लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं। आज जापान भारत का सबसे बड़ा विकास सहयोगी (Development Partner) भी है और भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
साने तकाइची के दौरे से क्या उम्मीदें?
साने तकाइची के भारत दौरे से उम्मीद है कि दोनों देश रक्षा उत्पादन, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस(AI), सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, सप्लाई चेन और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में नए समझौते कर सकते हैं। ऐसे समय में जब एशिया की भू-राजनीति तेजी से बदल रही है, भारत और जापान की साझेदारी पहले से अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या शिंजो आबे को टक्कर दे पाएंगी तकाइची?
पिछले सात दशकों में जापान के कई प्रधानमंत्रियों ने भारत का दौरा किया, लेकिन शिंजो आबे ने दोनों देशों के रिश्तों को सबसे मजबूत और व्यापक रूप दिया। उनकी दूरदर्शी सोच, भारत के प्रति सम्मान, बुलेट ट्रेन जैसे बड़े प्रोजेक्ट और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मजबूत व्यक्तिगत केमिस्ट्री ने उन्हें भारतीयों के बीच सबसे लोकप्रिय जापानी प्रधानमंत्री बना दिया। आज साने तकाइची का दौरा उसी मजबूत विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में एक नया अध्याय माना जा रहा है।
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