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IAS टॉपर के झूठे दावों की खुली पोल! फर्जी सफलता दिखाने पर दो कोचिंग संस्थानों पर लगा लाखों का जुर्माना

देश के दो बड़े कोचिंग संस्थान, दीक्षांत आईएएस (Dikshant IAS) और अभिमानु आईएएस (Abhimanu IAS), अब बड़ी मुश्किल में फंस गए हैं। ये कोचिंग सेंटर IAS की तैयारी करने वाले सफल छात्रों (टॉपर्स) को झूठ बोलकर अपना बता रहे थे। इस धोखेबाजी के लिए सरकार की सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने दोनों पर आठ-आठ लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है।

सरकार का कहना है कि यह छात्रों के साथ बहुत बड़ा धोखा है, क्योंकि कोचिंग में पैसे लगाने से पहले सही जानकारी जानना उनका हक है।

Two IAS coaching institutes fined

मामला क्या है? टॉपर्स ने ही खोली पोल
CCPA ने यह कार्रवाई तब शुरू की जब कई सफल UPSC कैंडिडेट्स ने शिकायत की। उन्होंने बताया कि उन्होंने इन कोचिंग में खास कोर्स या पूरा कोर्स नहीं किया, लेकिन कोचिंग वालों ने उनके IAS में सेलेक्शन होते ही उनकी फोटो अपने विज्ञापन में छाप दी और दावा किया कि सफलता उनकी कोचिंग की वजह से मिली है।

  • मिनी शुक्ला (AIR 96) की शिकायत: दीक्षांत आईएएस ने दावा किया कि 2021 में उनके 200 से ज्यादा छात्र सफल हुए। लेकिन UPSC टॉपर मिनी शुक्ला ने कहा कि वह इस कोचिंग से कभी जुड़ी ही नहीं थीं। उन्होंने बस एक बार किसी दूसरी एकेडमी के साथ मिलकर हुए मॉक इंटरव्यू में हिस्सा लिया था।
  • नताशा गोयल (AIR 175) की शिकायत: अभिमानु आईएएस ने नताशा गोयल को भी अपना छात्र बताया और उनकी फोटो बिना इजाजत इस्तेमाल की। जबकि नताशा ने कोचिंग में कोई कोर्स नहीं किया था, उन्हें बस मॉक इंटरव्यू के लिए कुछ सवाल भेजे गए थे, वह भी इंटरव्यू हुआ ही नहीं था।

जांच में पता चला कि दोनों कोचिंग संस्थान छात्रों को जानबूझकर अंधेरे में रख रहे थे:

  • 1. कम कोर्स को पूरा बताना: कोचिंग वाले जिन छात्रों ने सिर्फ मॉक इंटरव्यू या कुछ दिन की गाइडेंस ली, उन्हें भी अपने पूरे कोर्स का सफल छात्र बता रहे थे। इससे नए छात्रों को लगा कि पूरी तैयारी यहीं से करने पर टॉप किया जा सकता है।
  • 2. दावा फर्जी निकला: दीक्षांत आईएएस 200+ सेलेक्शन का दावा कर रहा था, पर CCPA के सामने सिर्फ 116 छात्रों के ही कागज दिखा पाया। अभिमानु आईएएस ने "2200+ सेलेक्शन" और "टॉप 10 में 10+ सेलेक्शन" का दावा किया, पर इसका कोई पक्का सबूत नहीं दे पाया।
  • 3. पुरानी सफलता को नया बताना: अभिमानु आईएएस ने जो 'टॉप 10' के दावे किए, उनमें से ज़्यादातर सफलताएँ 2001 से 2012 के बीच की थीं। लेकिन उन्होंने विज्ञापन में यह तारीखें नहीं लिखीं, जिससे आज के छात्रों को लगा कि ये हाल की सफलताएं हैं।

छात्रों के लिए सबक और सरकारी चेतावनी
CCPA का कहना है कि पढ़ाई के मामले में छात्र अपना बहुत सारा समय, मेहनत और पैसा लगाते हैं। इसलिए उन्हें सही जानकारी जानने का पूरा हक है। झूठे विज्ञापन छात्रों के इस हक को छीनते हैं।

नए छात्रों के लिए जरूरी संदेश
अगर कोई कोचिंग संस्थान किसी टॉपर की फोटो लगाए और कहे कि सफलता उनके कारण मिली है, तो यह जरूर पता करें कि टॉपर ने वहां कौन सा कोर्स किया था- सिर्फ मॉक इंटरव्यू या पूरी तैयारी। CCPA ने सभी सफल छात्रों से कहा है कि अगर कोई कोचिंग उनकी फोटो या नाम का गलत इस्तेमाल करे, तो उसकी शिकायत तुरंत सरकार को करें।

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