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Tulbul Barrage पर गरमाई सियासत, उमर अब्दुल्ला पर भड़की महबूबा ने कहा, 'पानी को हथियार न बनाएं'

Tulbul Barrage Project: भारत और पाकिस्तान तनाव के बीच जम्मू कश्मीर में तुलबुल बैराज को लेकर टकराव शुरू हो गया है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर तीखा हमला बोला है।

महबूबा ने तुलबुल नौवहन परियोजना (Tulbul Navigation Project) को फिर से शुरू करने की उमर अब्दुल्ला की मांग को "गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक रूप से भड़काऊ" करार दिया है।

Tulbul-Barrage-Controversy

PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, "जिस समय भारत और पाकिस्तान एक पूर्ण युद्ध के कगार से पीछे हटे हैं, उस समय तुलबुल परियोजना को फिर से शुरू करने की बात करना जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए "असंवेदनशील और उकसाने वाला" कदम है।"

आईए जानते हैं क्या है तुलबुल परियोजना जिस पर आपस में टकराए महबुबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला

What is Tulbul Navigation Project: क्या है तुलबुल बैराज परियोजना?

तुलबुल परियोजना कश्मीर के वुलर झील (Wular Lake) पर आधारित एक नौवहन और बैराज परियोजना है, जिसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। इसका उद्देश्य झेलम नदी में नौवहन को बेहतर बनाना और सर्दियों में नीचे की ओर बिजली उत्पादन परियोजनाओं की कार्यक्षमता को सुधारना है।

भारत ने इसका काम 1984 में शुरू किया था। इसके बनने से दक्षिण से उत्तरी कश्मीर तक लगभग 100 KM का नौवहन कॉरिडोर बनता जिससे कश्मीर की लाइफलाइन कही जाने वाली झेलम नदी का पानी रुक जाता। इससे नदी के पानी में कभी कमी नहीं होती सूखा नहीं पड़ता जिसका सीधा फायदा एक लाख एकड़ खेतों की सिंचाई को मिलता। हालांकि 1987 में पाकिस्तान ने इसे सिंधु जल संधि का उल्लंघन बताते हुए काम रुकवा दिया था।

चूंकी सिंधु जल समझौता रद्द कर दिया गया है और अब हालात बदले हैं। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी गुरुवार, मई को संकेत दिए कि जब सिंधु संधि निलंबित हो चुकी है तो तुलबुल प्रोजेक्ट फिर शुरू करना चाहिए। इससे सर्दियों में 24 घंटे बिजली मिलेगी।

Tulbul Barrage Controversy: उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा जिससे भड़क गई महबूबा

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में तुलबुल परियोजना को फिर से शुरू करने की वकालत की थी। उन्होंने कहा कि अप्रैल 22 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जब भारत ने IWT को अस्थायी रूप से निलंबित किया है, तो अब समय आ गया है कि इस परियोजना पर पुनर्विचार किया जाए।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "उत्तर कश्मीर में स्थित वुलर झील पर जो सिविल वर्क्स आप देख रहे हैं, वही तुलबुल नौवहन बैराज है। 1980 के दशक में इसे शुरू किया गया था, लेकिन पाकिस्तान के विरोध के चलते इसे रोकना पड़ा। अब जब सिंधु जल संधि अस्थायी रूप से निलंबित हो गई है, तो मुझे लगता है कि हमें इस परियोजना को फिर से शुरू करने का अवसर मिल सकता है।"

Mehbooba Mufti on Tulbul Barrage: "पानी को हथियार बनाना अमानवीय" - मुफ्ती

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पहले ही बहुत झेल चुका है। जम्मू-कश्मीर ने निर्दोष लोगों की जानें गंवाई हैं, व्यापक तबाही और पीड़ा झेली है, ऐसे समय में इस तरह के बयान न केवल गैर-जिम्मेदाराना हैं बल्कि बेहद खतरनाक रूप से भड़काऊ भी हैं।

महबूबा ने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी शांति का अधिकार है, और पानी जैसी जीवनदायिनी चीज को "हथियार बनाना अमानवीय" है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की मांगें द्विपक्षीय मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का खतरा पैदा करती हैं। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती ने कहा कि हमारे लोगों को भी उतनी ही शांति का अधिकार है जितना देश के बाकी नागरिकों को।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनावों में कुछ नरमी आई है और दोनों देश संवाद और शांति की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की यह टिप्पणी न केवल राजनीतिक विवाद का विषय बन गई है, बल्कि इससे भारत-पाक कूटनीतिक वार्ता पर भी असर पड़ सकता है।

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