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मायावती के अलावा और कौन-कौन से दल हैं? जो ना NDA में हैं ना INDIA में

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस औऱ बीजेपी ने अभी से कमर कस ली है। जहां कांग्रेस ने करीब 26 पार्टियों के मिलकर एक नया गठबंधन 'इंडिया' बनाया है। तो वहीं बीजेपी ने एनडीए को फिर से एक्टिव कर दिया है। बीजेपी ने एनडीए के तले करीब 38 पार्टियों को एकजुट किया है।

कांग्रेस ने जहां बेंगलुरु में बैठक कर INDIA की नींव रखी। वहीं बीजेपी ने दिल्ली में एनडीए को फिर से एक्टिव कर दिया। भले इन नए गठबंधनों में दर्जनों पार्टियां शामिल हुई हैं, लेकिन कई ऐसे बड़े दल हैं जिन्होंने इन गठबंधनों से दूरी बनाकर रखी है।

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बीएसपी, बीजद, वाईएसआर, जेडीएस, एआईएमआईएम और बीआरएस जैसे कई दल हैं। जिन्होंने किसी भी गठबंधन में शामिल होने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ऐसे करीब 10 दल हैं जो किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनी हैं।

बीएसपी- 10 सांसदों वाली बीएसपी यूपी में अपना बड़ा जनाधार रखने वाली पार्टी है। यूपी के अलावा सटे राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी बसपा का कुछ इलाकों के मतदाताओं पर बड़ा प्रभाव रहा है। दलित और मुस्लिम मतदाताओं पर मायावती की पकड़ मजबूत मानी जाती है। इसकी मुखिया मायावती ने आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

बीजू जनता दल
ओडिशा की सत्ता में कई दशकों से राज कर रहे सीएम नवीन पटनायक की बीजेडी किसी भी खेमे में शामिल नहीं हुई। पार्टी का ओडिशा में बड़ा जनाधार है। मौजूदा लोकसभा में उसके 12 सांसद हैं। हालांकि बीजेडी का झुकाव हमेशा बीजेपी की ओर रहा है, लेकिन उसने एनडीए में शामिल होने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

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    मायावती के अलावा और कौन-कौन से दल हैं? जो ना NDA में हैं ना INDIA में

    बीआरएस

    तेलंगाना की सत्ताधारी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के चीफ और राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव लंबे समय से गैर कांग्रेसी-गैर भाजपाई गठबंधन बनाने की कोशिश करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कई दलों को इकट्ठा करने की भी कोशिश की थी, लेकिन वे असफल रहे। तेलंगाना में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं, जहां पर कांग्रेस बीआरएस को कड़ी टक्कर दे रही है। ऐसे में जहां कांग्रेस ने बीआरएस से दूरी बना रखी है तो वहीं बीजेपी ने भी बीआरएस को अपने पाले में लाने की कोशिश नहीं की।

    जनता दल (सेक्यूलर)
    कर्नाटक की तीसरी बड़ी पार्टी जेडीएस ने भी इन गठबंधनों से खुद को दूर रखा है। 2009 के चुनाव में जेडीएस ने लोकसभा की 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी। ओल्ड मैसूर और हैदराबाद कर्नाटक में पार्टी का बड़ा जनाधार है। माना जा रहा है कि स्थानीय नेताओं के विरोध के चलते कांग्रेस और बीजेपी ने जेडीएस को शामिल होने का न्योता नहीं दिया है।

    वाईएसआर कांग्रेस पार्टी
    आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी वाईएसआर कांग्रेस के मुखिया जगनमोहन रेड्डी को बीजेपी का नजदीकी माना जाता है। लोकसभा में उनके 22 सांसद हैं और 2019 में उसे 2.53 फीसदी वोट मिले थे। आंध्र प्रदेश के अलावा तेलंगाना में भी इस दल का प्रभाव माना जाता है। जगन मोहन भी एनडीए की बैठक में शामिल नहीं हुए हैं।

    टीडीपी
    आंध्र की मुख्य विपक्षी पार्टी टीडीपी भी किसी एलायंस का हिस्सा नहीं बनी है। टीडीपी ने 2019 में एनडीए से नाता तोड़ लिया था। जिसके बाद वह अकेले चुनाव लड़ी थी। हालांकि कुछ दिनों पहले टीडीपी चीफ चंद्रशेखर नायडू की अमित शाह औऱ जेपी नड्डा से मुलाकात हुई थी। जिसके बाद माना जा रहा था कि, वह एनडीए में वापसी कर सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

    शिरोमणि अकाली दल
    बीजेपी की पुरानी सहयोगी पार्टी और पंजाब में लंबे समय तक शासन करने वाली शिरोमणि अकाली दल एनडीए गठबंधन में शामिल नहीं हुई है। 2020 में किसानों के मुद्दे पर अकाली दल ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था। मौजूदा लोकसभा में उसके दो सांसद हैं। 2019 में उसे कुल 0.62 फीसदी वोट मिले थे।

    इनेलो
    हरियाणा की इंडियन लोकदल भी किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं है। फिलहाल लोकसभा में उसके एक भी सांसद नहीं है। इनेलो को न तो विपक्षी मोर्चे से और न ही एनडीए से कोई न्योता आया है। हरियाणा के जाट वोटरों पर इस पार्टी की मजबूत पकड़ रही है। 2014 के चुनाव में इनेलो को 2 सीटों पर जीत मिली थी।

    एआईएमआईएम

    ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन भी किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं हुई है। तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में जनाधार रखने वाली असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के 2 लोकसभा सांसद हैं। 2019 में उसे 0.20 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन पार्टी को किसी भी दल को ओर से गठबंधन में शामिल होने का न्योता नहीं मिला है।

    AIUDF
    असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के विपक्षी दलों के गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन पार्टी ने खुद को इन गठबंधनों से खुद को दूर रखा है। पिछले साल हुए असम चुनावों में कांग्रेस ने AIUDF के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। असम विधानसभा में AIUDF के पास 16 विधायक हैं। पार्टी का 3 सीटों पर दबदबा है।

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