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जानिए निर्भया केस में दी गयी फांसी कानून की किताबों में क्यों बन जाएगी नज़ीर ?

The Death Sentence Awarded in the Nirbhaya Case Will Be Present in the Books of Law As a Nazir.निर्भया केस में निर्भया को चारों हत्‍यारों को 22 जनवरी को फांसी के फंदे पर लटका दिया जाएगा। इसके साथ ही निर्भया केस में दी गयी यह फांसी की सजा कानून की किताब में एक नजीर के तौर पर दर्ज हो जाएगी।

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    बेंगलुरु। निर्भया मामले में दोषियों को फांसी देने के लिए डेथ वारंट जारी कर दिया गया है। चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी दी जाएगी। भारत में फांसी के मामले बहुत ज्यादा नहीं हैं। इसकी प्रमुख वजह है कि देश में फांसी की सजा बेहद दुर्लभ मामलों में ही दी जाती है। भारत में उन्‍हीं मामलों में अभी तक फांसी दी गयी है जिसने कुछ जघन्य अपराध ऐसे हैं, जिन्होंने देश को झकझोर दिया था। इन्हीं में से एक मामला निर्भया का है।

    nirbhyacase

    निर्भया केस से पहले बलात्कार और हत्या के आरोपी धनंजय चटर्जी को कोलकाता की जेल में 14 अगस्त 2004 को फांसी दी गई थी। फांसी के ऐसे कई मामले हैं जिनकी बरसों बाद आज तक चर्चा की जाती है लेकिन निर्भया केस में अगर 22 तारीख को निर्भया के हत्यारों को फांसी के तख्ते पर लटकाए जाते हैं तो तिहाड़ जेल में फांसी का इतिहास बदल जाएगा। कानून की किताबों में यह सजा एक नज़ीर के तौर पर मौजूद रहेगी। आइए जानते हैं निर्भया केस में देश के फांसी के इतिहास में क्या नया होने जा रहा हैं?

    निर्भया केस का ऐतिहासिक फैसला

    निर्भया केस का ऐतिहासिक फैसला

    बता दें निर्भया कांड में मंगलवार को दिल्ली पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा चारों हत्यारों की फांसी का वारंट जारी कर तारीख मुकर्रर कर दी गयी हैं। दिसंबर, 2012 में भारत की राजधानी दिल्ली में घटी निर्भया हत्याकांड की घटना कोई आम घटना नहीं थी। यह घटना समाज को झकझोर देने वाली थी। भारत की आजादी के बाद के फांसी के इतिहास पर गौर किया जाए तो इस बात का उत्तर मिल जाएगा कि निर्भया केस में ऐसा कुछ नया हो रहा जो भारत के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ।

     निर्भया केस में दी गयी फांसी से रच जाएगा ये इतिहास

    निर्भया केस में दी गयी फांसी से रच जाएगा ये इतिहास

    निर्भया केस में 22 जनवरी को चारों हत्यारों को एक साथ फांसी पर लटकाया जाएगा जो तिहाड़ जेल के इतिहास में पहली बार होग। इससे पहले कभी भी किसी केस में सामूहिक बलात्कार के मुलजिमों को एक साथ फांसी पर लटकाए जाने के हुक्म की मुनादी नहीं हुई। निर्भया कांड के मुजरिम अगर एक साथ फांसी के तख्ते पर लटकाए जाते हैं, तो देश में तिहाड़ जेल का फांसी का इतिहास बदल जाएगा और सदा के लिए कानून की किताबों में दर्ज होकर एक नजीर बन जाएगा।

    पुलिस अधिकारियों ने भी नहीं की थी ये कल्‍पना

    पुलिस अधिकारियों ने भी नहीं की थी ये कल्‍पना

    निर्भया केस का यह ऐतिहासिक फैसला ऐसा है जिसकी कल्‍पना आम आदमी क्या जेल में तैनात पुलिस के वरिष्‍ठ अलाधिकारियों ने भी नहीं की थी कि कभी 4-4 मुजरिमों को भी एक जेल में एक साथ फांसी के फंदे पर झुलाने का हुक्म भी जारी हो सकेगा। ये बात तो है कि इस ऐतिहासिक फैसले के बाद ऐसे जघन्‍य अपराध करने वाले लोगों में भय होगा और ऐसे अंजाम से डर के कारण अपराधों पर लगाम लगेगी।

    क्रूर हत्यारों के लिए यह सजा जायज है

    क्रूर हत्यारों के लिए यह सजा जायज है

    उत्तर प्रदेश राज्य पुलिस भर्ती बोर्ड के सदस्य व पूर्व आईपीएस आर के चतुर्वेदी जो तिहाड़ जेल के पूर्व कानूनी सलाहकार भी रह चुके है। उन्‍होंने हाल ही में तिहाड़ जेल की नौकरी के अपने निजी अनुभवों पर आधारित किताब 'ब्लैक-वारंट' किताब भी लिखी है। उन्‍होंने मीडिया को दिए गए साक्षात्कार में बताया कि तिहाड़ जेल में पहली बार चार दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाया जाएगा। यह क्रूर हत्यारे बलात्कारी हैं। उनकी यही सजा जायज है। इन्‍हें फांसी पर लटकाए जाने के बाद फांसी के इतिहास में एक ऐसा पन्ना जुड़ा है, जिसके ऊपर किन्हीं चार मुजरिमों को एक साथ फांसी के फंदे पर लटकाए जाने की रूह कंपा देने वाली डरावनी कहानी लिखी जा रही है।

    अब तक हुई इन्‍हें हो चुकी है फांसी

    अब तक हुई इन्‍हें हो चुकी है फांसी

    धनंजय चटर्जी
    धनंजय चटर्जी को कोलकाता की अलीपोर सेंट्रल जेल में 14 अगस्त 2004 को फांसी दी गई थी। कोर्ट ने धनंजय को दक्षिणी कोलकाता के एक अपार्टमेंट में 5 मार्च 1990 को किशोरी से दुष्कर्म और हत्या का दोषी माना। धनंजय उस अपार्टमेंट में सुरक्षा गार्ड था।इस जघन्‍य अपराध के कारण राष्‍ट्रपति ने भी उसकी दया याचिका खारिज कर दी थी। ध
    याकूब मेमन

    याकूब मेमन

    याकूब मेमन

    12 मार्च 1993 के मुंबई सीरियल धमाकों में 257 लोग मारे गए थे और करीब सात सौ लोग घायल हुए। इस धमाके में चार्टर्ड अकाउंटेंट याकूब मेमन को दोषी पाया गया। जिसे 30 जुलाई 2015 को फांसी पर चढ़ा दिया गया। याकूब मेमन की फांसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रात के तीन बजे सुनवाई हुई थी। हालांकि इसके बाद कोर्ट ने फांसी की सजा को बरकरार रखा।

    अजमल कसाब

    अजमल कसाब

    लश्कर ए तैयबा के आतंकी आमिर अजमल कसाब को 21 नवंबर 2012 में मुंबई की यरवडा जेल में फांसी दी गई। 26 नवंबर 2008 में कसाब और उसके 10 साथियों ने मुंबई के पांच प्रमुख स्थानों पर हमला किया था। इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी और करीब 300 लोग घायल हुए थे। हमलावरों में से पाकिस्‍तानी कसाब को जिंदा पकड़ा गया था।

    अफजल गुरु

    अफजल गुरु

    अफजल गुरु को दिल्ली की तिहाड़ जेल में 9 फरवरी 2013 को फांसी दी गई। संसद पर 13 दिसंबर 2001 को पांच आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में आतंकियों सहित 14 लोग मारे गए थे और 16 घायल हुए थे। लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद की भूमिका सामने आई थी। इस हमले में अफजल गुरु की भूमिका थी। उसने स्वीकार किया था कि वह तीन महीने की हथियारों की ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान गया था। इसे लेकर फांसी की सजा सुनाई गई।

    मकबूल बट

    मकबूल बट

    कश्मीरी अलगाववादी नेता मकबूल बट को हत्या के मामले में 11 फरवरी 1984 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। मकबूल बट आतंकी संगठन नेशनल लिबरेशन फ्रंट का संस्थापक था। फांसी की सजा के पाने के बाद कई संगठनों ने उन्हें छुड़वाने के लिए कोशिशें की। यहां तक की एक विमान अपहरण की भी साजिश रची लेकिन वह मकबूल को छुड़ाने में नाकाम रही।


    इसे भी पढ़े- फांसी की सजा पाए इन 35 लोगों की दया याचिका भी खारिज कर चुके हैं राष्ट्रपति

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