Telangana: क्या अपने पोस्ट बॉय के दबाव के आगे झुकेगी बीजेपी, जानें क्या है राजा सिंह की डिमांड?
तेलंगाना विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी भले ही सत्ता से बहुत दूर रह गई हो, लेकिन उसका प्रदर्शन अबतक का सबसे बढ़िया रहा है। 119 विधायकों वाले सदन में पहली बार भाजपा के 8 विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं। लेकिन, पार्टी के सामने इन आठों को भी एकजुट करके रखना मुश्किल हो गया है।
सबसे ज्यादा दिक्कत बीजेपी विधायक दल के नेता के वजह से हो रही है। वैसे राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी पार्टी 9 दिनों से इसी माथापच्ची में जुटी है। छत्तीसगढ़ में विधायक दल का नेता चुनने में एक हफ्ता लग गया। लेकिन, उन तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री की नियुक्ति होनी है।

बीजेपी विधायक दल का नेता बनने की है डिमांड
तेलंगाना में बीजेपी विधायक दल का नेता न तो मुख्यमंत्री बनेगा और न ही उसे विपक्ष के नेता के रूप में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलने वाला है। लेकिन, जानकारी के मुताबिक हैदराबाद के गोशामहल सीट से विधायक टी राजा सिंह अपना नाम बीजेपी विधायक दल के नेता के तौर पर घोषित किए जाने को लेकर अड़ गए हैं।
प्रोटेम-स्पीकर के मुद्दे पर भी पार्टी में मतभेद की रिपोर्ट
यही नहीं रिपोर्ट यह भी है कि एआईएमआईएम के अकबरुद्दीन ओवैसी के प्रोटेम स्पीकर वाले मुद्दे पर भी भाजपा विधायकों में मतभेद थे।
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक सूत्र ने बताया है, 'शनिवार को जब चुने हुए विधायकों की बैठक हुई, कुछ ने कहा कि उन्हें शपथ लेनी चाहिए, लेकिन सिंह ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि एमआईएम नेता की ओर से होने वाले शपथग्रहण समारोह का विधायक बायकॉट करेंगे। मामला शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा और उन्होंने कहा कि एमएलए पूर्णकालिक स्पीकर की नियुक्ति के बाद शपथ लेंगे।'
पार्टी कार्यालय में अपने लिए कमरा भी चाहते हैं राजा सिंह!
अब राजा सिंह की दलील है कि वे लगातार तीन बार से एमएलए होने के नाते सबसे सीनियर हैं और ए माहेश्वर रेड्डी (दो बार के एमएलए) के अलावा पार्टी के सारे पहली बार के विधायक हैं। सूत्र ने कहा, 'वे प्रदेश के पार्टी कार्यालय में अपने लिए एक कमरा भी चाहते हैं, क्योंकि अब त्रिपुरा के राज्यपाल बन चुके इंद्रसेन रेड्डी का कमरा खाली है। शनिवार से पार्टी नेताओं से उनका संपर्क बंद है।'
भाजपा नेतृत्व नहीं दे पाया सीधा जवाब
इसके (विधायक दल के नेता) बारे में जब प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी से पत्रकारों ने सवाल पूछे तो उन्होंने सीधा जवाब नहीं दिया और सिर्फ इतना कहकर निकलने की कोशिश की, 'जब फैसला लिया जाएगा तो इसकी सूचना दी जाएगी, यह एक आंतरिक मामला है।'
पिछली बार पार्टी विधायक दल पर फैसला ही नहीं कर सकी
2018 के विधानसभा चुनावों में तेलंगाना में भाजपा से सिर्फ राजा सिंह ही जीते थे। लेकिन, बाद के उपचुनावों में एटाला राजेंदर और रघुनंदन राव की भी जीत हुई थी। तीनों ही विधायकों की ओर से विधायक दल का नेता बनाए जाने की मांग होने लगी, लेकिन पार्टी ने कोई फैसला ही नहीं लिया।
पार्टी के एक नेता ने कहा, 'इनमें से किसी को नाराज नहीं करने के लिए तब के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बंदी संजय ने कोई फैसला ही नहीं लिया और पूरे कार्यकाल में पार्टी बिना किसी बीजेपी विधायक दल के नेता के रही। लेकिन, इस बार कोई फैसला करना होगा।'
अबकी बार मामला इसलिए फंसता नजर आ रहा है कि भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में तीन नामों की चर्चा हो रही है। इनमें राजा सिंह के अलावा कामारेड्डी के एमएलए के वेंकटरमण रेड्डी और महेश्वर रेड्डी का नाम भी शामिल है।












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