सुप्रीम कोर्ट में EVM के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज, अदालत ने कहा- आरोप पूरी तरह बेबुनियाद
सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली दोनों याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसके साथ सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिका में ईवीएम को लेकर व्यक्त की गई आशंकाएं और आरोपों पूरी तरह से निराधार हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को ईवीएम के इस्तेमाल का विरोध करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। इस याचिकाओं में 19 लाख से अधिक ईवीएम गायब होने की आशंका और ईवीएम के जरिए वोटिंग पर अविश्वास जताया गया था और मतपत्र के जिरिए वोटिगं कराने की मांग की गई थी। इसको लेकर दो रिट याचिकाएं अदालत में दायर की गई थीं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि 2016-19 के दौरान ईसीआई की हिरासत से गायब 19 लाख ईवीएम का इस्तेमाल आगामी लोकसभा आम चुनाव में हेरफेर करने के लिए किया जा सकता है।

दोनों याचिकाओं पर सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाय। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आशंकाओं और आरोपों को पूरी तरह से निराधार है, जिससे मामला ईसीआई के पक्ष में क्लोज किया जाता है।
अदालत ने आदेश में कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे की शीर्ष अदालत ने विभिन्न याचिकाओं में पड़ताल की है। दरअसल, याचिकाकर्ता नंदिनी शर्मा ने भारत के निर्वाचन आयोग और छह राजनीतिक दलों को पक्षकार बनाया था। ऐसे में पीठ ने याचिकाकर्ता नंदिनी शर्मा से कहा, "हम कितनी याचिकाओं पर विचार करेंगे? हाल ही में, हमने वीवीपीएटी से संबंधित एक याचिका पर विचार किया था। हम धारणाओं पर नहीं चल सकते। हर पद्धति के अपने सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष होते हैं। ऐसे में अनुच्छेद 32 के तहत इस पर विचार नहीं किया जा सकता।"
बता दें न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि अदालत ने इस मुद्दे पर 10 से अधिक मामलों की पड़ताल की। जिसके बाद दलीलें पूरी होने बाद याचिकाएं खारिज करने का आदेश दिया।












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