क्यों विशेष संसद सत्र में चंद्रबाबू नायडू की वजह से बढ़ेगी बीजेपी की टेंशन?

आंध्र प्रदेश में टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी का मामला बीजेपी के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है। पार्टी इसका न तो खुलकर विरोध ही कर पा रही है और ना ही समर्थन ही कर पा रही है।

इसके पीछे आंध्र प्रदेश की राजनीति से कहीं ज्यादा केंद्र की राजनीति है, जो बीजेपी के लिए विशेष संसद सत्र में खास तौर पर तनाव का कारण बन सकता है। करोड़ रुपए के कथित कौशल विकास निगम घोटाले में गिरफ्तारी से पहले नायडू लगातार फिर से भाजपा के नजदीक आने की कोशिशों में जुटे हुए थे।

bjp and chandrababu naidu

एनडीए में आने की कोशिशों में जुटे थे नायडू
उनकी पार्टी नए संसद भवन के उद्घाटन का भी गवाह बनी और खुद आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात भी कर चुके थे। लेकिन, एनडीए में टीडीपी की वापसी से पहले ही मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने ऐसा शिकंजा कसा कि बीजेपी सियासी तौर पर बुरी तरह उलझी हुई नजर आ रही है।

दुविधा में बीजेपी, अवसर देख रहे हैं इंडिया ग्रुप के नेता
जहां आंध्र प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष डी पुरंदेश्वरी ने उनकी गिरफ्तारी की आलोचना करने में तो देरी नहीं की, लेकिन इसके विरोध में तेलगू देशम पार्टी ने जो बंद आयोजित किया, पार्टी ने उससे पूरी तरह से दूरी बना ली। भारतीय जनता पार्टी की इस दुविधा में इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस (I.N.D.I.A.) के नेताओं को अवसर नजर आ रहा है।

राज्यसभा के अंकगणित ने बीजेपी को उलझाया
बीजेपी की परेशानी ये है कि इंडिया खेमे के नेता टीडीपी चीफ की गिरफ्तारी को 'बीजेपी के दोस्त' की गैर-कानूनी करतूत बता रहे हैं। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी, समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव से लेकर नेशनल कांफ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला तक नायडू की गिरफ्तारी के विरोध में उतर आए हैं। यह ऐसे समय में हुआ है, जब नायडू की काफी कोशिशों के बावजूद राज्यसभा के अंकगणित की वजह से बीजेपी उनके धुर विरोधी आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को तरजीह देती रही है।

टीडीपी को इंडिया ग्रुप में लाने की कोशिशें तेज
पिछले कुछ समय में ऐसे कई मौके आ चुके हैं, जब लगा कि 2019 के चुनाव में पीएम मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता का झंडा बुलंद करने वाले चंद्रबाबू किसी भी वक्त एनडीए में वापसी कर सकते हैं। लेकिन, आखिरी समय में यह अभियान टलता रहा है। अब टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि इंडिया ग्रुप के लोग टीडीपी के साथ संपर्क में हैं। क्योंकि, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी विपक्ष के साथ नहीं आएगी।

आंध्र प्रदेश में बीजेपी को हो सकता है नुकसान
ऐसे में अगर बीजेपी की उदासीनता देखने के बाद नायडू दोबारा विपक्षी दलों के गठबंधन में शामिल होते हैं तो आंध्र प्रदेश में बीजेपी के लिए ये बड़ा झटका साबित हो सकता है। क्योंकि, राज्य में पार्टी वैसे भी बहुत मजबूत नहीं है। अगर टीडीपी और बीजेपी के बीच लोकसभा चुनावों में रणनीतिक साझेदारी भी हो जाती है या दोस्ताना मुकाबला भी होता है, तो बीजेपी की परफॉर्मेंस उम्मीद से बेहतर हो सकती है। लेकिन, अगर वह इंडिया ग्रुप के साथ चली गई तो इससे पार्टी को ज्यादा नुकसान हो सकता है।

विशेष संसद सत्र में भी मोदी सरकार को पड़ेगी वाईएसआरसीपी की जरूरत
लेकिन, बीजेपी की मजबूरी ये है कि राज्यसभा में किसी भी बिल को पास कराने के लिए उसे हर बार वाईएसआरसीपी और बीजू जनता दल का मुंह देखना पड़ता है। विशेष संसद सत्र में भी मोदी सरकार को इसकी जरूरत पड़ने वाली है, चाहे वह कोई भी एजेंडा लेकर आए। इसलिए, रेड्डी की नाराजगी मोदी सरकार झेल नहीं सकती।

चंद्रबाबू की नजदीकी रिश्तेदार हैं पुरंदेश्वरी
यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने राज्य सरकार को मई में 10,460 करोड़ रुपए की सहायता जारी की थी, जिसकी चंद्रबाबू नायडू की सरकार 2018 में उम्मीद ही करती रह गई थी। अभी तथ्य यह है कि पुरंदेश्वरी के अलावा भाजपा का कोई भी बड़ा नेता नायडू के प्रति सहानुभूति नहीं दिखा रहा है। क्योंकि, बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष की बात अलग है, जो चंद्रबाबू की नजदीकी रिश्तेदार भी हैं।

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