प्रवासियों को स्‍टेशन से विदा करने पहुंचे सोनू सूद को प्‍लेटफार्म पर जाने की नहीं दी गई इजाजत

प्रवासियों को स्‍टेशन से विदा करने पहुंचे सोनू सूद को प्‍लेटफार्म पर जाने की नहीं दी गई इजाजत

मुंबई। लॉकडाउन में जब राजनीतिक पार्टियां और प्रदेश सरकार प्रवासी मजदूरों को उनके गृह जनपद वापस भिजवाने को लेकर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्‍यारोप कर रही थी तब बॉलीवुड एक्‍टर सोनू सूद ने इन प्रवासियों के दर्द को समझा और उन्‍हें घर उनके घर पहुंचवाया। लेकिन सोनू सूद के इस नेक काम को लेकर जबरदस्‍त राजनीतिक ड्रामा शुरु हो चुका हैं। मुश्किल समय में प्रवासी मजदूरों के मसीहा बनें सोनू सूद को लेकर अब महाराष्‍ट्र की राजनीति गर्मानें लगी हैं। सोनू सूद की दरियादिली से महाराष्‍ट्र राज्य की सत्‍ता पर काबिज शिवसेना जबरदस्‍त घबराई हुई हैं। पहले शिवसेना के प्रवक्‍ता संजय राऊत ने सोनू सूद पर रविवार को शिवसेना के मुखपत्र सामना में कटाक्ष किया और सोनू को बीजेपी का आदमी बताकर पर्दे के बाहर भी एक्टिंग करनेवाला शख्स बताया था। इसके बाद सोमवार को सोनू सूद को मुम्बई के बांद्रा टर्मिनस पर प्रवासी मजदूरों को विदा करने आने की अनुमति नहीं दी गई। मुंबई में बांद्रा टर्मिनस के बाहर पुलिस ने मजदूरों से मुलाकात करने से रोक दिया।

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    सोनू सूद को प्‍लेटफार्म पर जाने की नहीं दी गई इजाजत

    सोनू सूद को प्‍लेटफार्म पर जाने की नहीं दी गई इजाजत

    दरअसल अब तक हजारों प्रवासियों को उनके घर भिजवा चुके सोनू सूद प्रवासी मजदूरों और उनके परिवार वालों के लिए उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के लिए एक ट्रेन की व्यवस्था की थी। और हर बार की तरह खुद सोनू सूद प्रवासी मजदूरों को विदा करने के लिए मुंबई के बांद्रा स्‍टेशन पर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें प्लेटफॉर्म पर ट्रेन के पास जाकर लोगों को विदा करने की अनुमति नहीं दी गयी।

    रेलवे के पुलिस अधिकारी उन्‍हें 45 मिनट तक बातों में उलझाए रखा

    रेलवे के पुलिस अधिकारी उन्‍हें 45 मिनट तक बातों में उलझाए रखा

    प्‍लेटफार्म पर रोके जाने के बाद सोनू सूद लगभग 45 मिनट तक बांद्रा टर्मिनस में स्थित आरपीएफ के कार्यालय में बैठाकर रेलवे के पुलिस अधिकारी उनसे बात करते रहे, लेकिन जब वो जब बाहर निकलकर आये, तो तब तक 8.00 बजे छूटने वाली श्रमिक ट्रेन के छूटने का वक्त हो चुका था। ऐसे में सोनू सूद जब वापस आरपीएफ कार्यालय से स्टेशन के मुख्य गेट पर आये तो उन्हें ऐसे लोगों ने घेर लिया था, जो उस श्रमिक ट्रे‌न से अपने‌ घरों के लिए नहीं जा पाये थे। इसके बाद स्टेशन‌ के बाहर खड़े कई प्रवासी लोग सोनू से शिकायत करते नजर आये कि उन्हें इस ट्रेन‌ से जाने‌ के लिए जगह नहीं मिली। ऐसे में‌ सोनू सूद सभी को आश्वासन देते नजर आये कि वे उ‌नके भी जाने की व्यवस्था भी‌ जल्द करेंगे।

    प्‍लेटफार्म पर जाने की इजाजत न मिलने पर सोनू सूद ने दिया ये दिलेरी से भरा जवाब

    प्‍लेटफार्म पर जाने की इजाजत न मिलने पर सोनू सूद ने दिया ये दिलेरी से भरा जवाब

    जब सोनू सूद से जब मीडिया ने पूछा कि उन्हें आज प्लेटफॉर्म पर जाने की इजाजत क्यों नहीं दी गयी है, तो‌ सोनू ने कहा, "मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है‌ कि मुझे प्लेटफॉर्म पर जाने मिला या नहीं/ मेरा काम मजदूरों को उनके घर भेजना‌ है और मैं उन्हें यहां विश करने आया था। बांद्रा टर्मिनस पर जब सोनू से संजय राऊत के‌ आलोचनात्मक रवैये के बारे में पूछा गया, तो एक बार फिर से उन्होंने एक बार फिर कहा कि प्रवासी मजदूरों को भेजने‌ के लिए सभी का भरपूर सहयोग मिल रहा है, जिसके लिए वे सभी के शुक्रगुजार हैं। प्रवासी मजदूरों को भेजने की व्यवस्था में बीजेपी के सहयोग के सवाल पर सोनू ने कहा कि देश के अलग अलग राज्यों में जहां प्रवासी मजदूरों को भेजा जा रहा है, वहां सिर्फ बीजेपी की नहीं, बल्कि अलग पार्टी की सरकारें हैं और उन सबकी मदद से वे लोगों को‌ भेजने के काम को अंजाम दे पा रहे हैं.बता दें कि 1 जून की रात को सोनू सूद ने मुम्बई से सटे ठाणे से 2 श्रमिक ट्रेनों के जरिए 1000 से ज्यादा श्रमिकों को प्लेटफॉर्म पर जाकर विदा किया था।

    सोनू सूद को प्‍लेटफार्म पर जाने की परमीशन न देने की ये थी खास वजह

    सोनू सूद को प्‍लेटफार्म पर जाने की परमीशन न देने की ये थी खास वजह

    वहीं पुलिस अधिकारियों ने सोनू सूद को प्लेटफॉर्म पर न जाने की इजाजत क्यों नही दी इस पर पुलिस अधिकारियों ने नाम‌ नहीं छापने‌ की शर्त पर मीडिया को बताया कि मुम्बई रेलवे के डिविजनल मैनेजर की ओर से ही सोनू को‌ आज प्लेटफॉर्म पर जाने‌ की अनुमति नहीं दी गयी है। इसके अलावा मुंबई पुलिस ने कहा कि उन्‍हें इस बारे में कोई शिकायत नहीं मिली हैं।

    सोनू सूद की दरियादिली घबराई हैं शिवेसेना

    सोनू सूद की दरियादिली घबराई हैं शिवेसेना

    बता दें लॉकडाउन में महाराष्‍ट्र सरकार प्रवासियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभा पाने में असफल रही और जिसको लेकर प्रदेश सरकार की जमकर आलोचना हुई इसी आलोचना से बचने के लिए अब शिवसेना नए पैतरे चलती नजर आ रही हैं। यहीं कारण है कि संजय राउत ने शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में अपने साप्ताहिक कॉलम 'रोक्थोक' में कहा कि तालाबंदी के दौरान महाराष्ट्र के सामाजिक परिदृश्य पर "महात्मा" सूद के अचानक उदय पर सवाल उठाया। संजय राऊत द्वारा प्रवासी मजदूरों को अलग-अलग राज्यों में भेजने की सोनू सूद की कोशिशों को ढकोसला और बीजेपी की चाल करार दिया था। श्री राउत ने 2019 के आम चुनावों से पहले सोनू सूद के खिलाफ एक कथित "स्टिंग ऑपरेशन" का भी जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने आधिकारिक सोशल मीडिया खातों के माध्यम से विभिन्न प्लेटफार्मों पर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को बढ़ावा देने के लिए सहमत हुए थे। जिसके बाद सोनू सूद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के निजी आवास 'मातोश्री' में जाकर उनसे मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद सोनू सूद ने प्रवासी मजदूरों को विभिन्न राज्यों में भेजे जाने के‌ लिए राज्य सरकार सरकार,‌ उद्धव और आदित्य ठाकरे की भी प्रशंसा की थी।

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