कभी नक्सलियों का अड्डा, अब विकास की नई गूंज: छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि ने सबको चौंकाया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 134वें एपिसोड में रविवार को छत्तीसगढ़ की बदलती तस्वीर, उभरती खेल प्रतिभाओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गूंज सुनाई दी। इस दौरान अबूझमाड़ में एक बेहद खास नजारा देखने को मिला, जहां ग्रामीण उस मैदान पर प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने के लिए बड़े उत्साह के साथ जुटे, जो कभी नक्सलियों की बैठकों का अड्डा हुआ करता था। इस घटना को क्षेत्र में आ रहे बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जो यह दिखाता है कि कभी उग्रवाद से प्रभावित रहे इलाके अब विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय और बस्तर में हो रहे बदलाव का एक सशक्त प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि 'मन की बात' में प्रधानमंत्री द्वारा राज्य की उपलब्धियों का जिक्र करना यहां के बढ़ते आत्मविश्वास, प्रतिभा और प्रगति को दर्शाता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अबूझमाड़ में उमड़ी यह भीड़ उन सकारात्मक बदलावों की गवाह है, जो कभी पहुंच से दूर और सुरक्षा चुनौतियों से घिरे इलाकों में अब धरातल पर दिख रहे हैं।
एनीमेश कुजूर की उपलब्धि से युवाओं को मिली प्रेरणा
इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण प्रधानमंत्री मोदी की छत्तीसगढ़ के उभरते धावक एनीमेश कुजूर और पंजाब के एथलीट गुरविंदर सिंह के साथ बातचीत रही। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में महज दो दिनों के भीतर तीन बार नेशनल रिकॉर्ड टूटा है। उन्होंने इसे भारतीय एथलेटिक्स में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और बढ़ते स्तर का संकेत बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एनीमेश कुजूर की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ और पूरे देश के लिए गौरव की बात है। जशपुर जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले एनीमेश ने 100 मीटर दौड़ को मात्र 10.15 सेकंड में पूरा कर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया और 2026 के कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अपनी जगह पक्की की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एनीमेश का यह सफर देश भर के युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा है। प्रधानमंत्री से बातचीत में इस धावक ने बताया कि कैसे कोविड-19 के दौरान खेलों में उनकी रुचि जगी और चुनौतियों व अनिश्चितताओं के बावजूद दोस्तों के प्रोत्साहन ने उन्हें एथलेटिक्स में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
मल्हार की प्राचीन खोज से विरासत को मिली नई पहचान
मुख्यमंत्री ने बिलासपुर जिले के ऐतिहासिक स्थल मल्हार में प्राचीन ताम्रपत्रों की खोज का जिक्र करने के लिए भी प्रधानमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस उल्लेख से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की ओर पूरे देश का ध्यान गया है।
करीब 1,400 से 1,500 साल पुराने माने जा रहे ये ताम्रपत्र पांडुवंशी काल, विशेषकर महाराजा बालार्जुन के शासनकाल से संबंधित हैं। इतिहासकारों का मानना है कि इन शिलालेखों से उस दौर की शासन व्यवस्था, धार्मिक मान्यताओं, सामाजिक ढांचे और सांस्कृतिक जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं। प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखे गए ये ताम्रपत्र एक बड़ी पुरातात्विक खोज हैं, जो छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास को प्रमाणित करते हैं।
प्रगति और स्वाभिमान की कहानी
'मन की बात' के इस ताजा एपिसोड ने छत्तीसगढ़ की पहचान के दो अहम पहलुओं—उभरती युवा प्रतिभा और गहरी सांस्कृतिक जड़ों—को दुनिया के सामने रखा है। राज्य के नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान बस्तर जैसे क्षेत्रों की बदलती छवि को दर्शाती है, जो अब विकास, अवसर और उपलब्धियों के लिए जाने जा रहे हैं। खेल के मैदान से लेकर पुरातत्व की खोज तक, राष्ट्रीय पटल पर छत्तीसगढ़ की बढ़ती मौजूदगी भारत की विकास गाथा में उसके योगदान को और मजबूत कर रही है।












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