Bokaro Pregnant Woman Murder: झारखंड के बोकारो में 25 साल की गर्भवती महिला की हत्या! 6 आरोपी गिरफ्तार
Bokaro Pregnant Woman Murder: झारखंड के बोकारो जिले में एक बार फिर महिला सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। 25 वर्षीय एक युवा महिला, जो चार महीने की गर्भवती बताई जा रही है, पड़ोसियों के झगड़े में शांति बनाए रखने के लिए दखल दी तो उसके साथ बुरी तरह मारपीट की गई। शुक्रवार रात हुई इस घटना के बाद शनिवार को अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। पुलिस ने रविवार को मामले में मुख्य आरोपी समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
यह घटना बोकारो जिले के बेरमो थाना क्षेत्र अंतर्गत धौरा धोरी रेलवे साइडिंग, 5 नंबर कॉलोनी में हुई। स्थानीय स्तर पर इसे हत्या का मामला बताते हुए आक्रोश फैल गया। भाजपा ने इसे हत्या करार देते हुए पूरे जिले में बंद का आह्वान किया था, जिसे मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद वापस ले लिया गया।

घटना की पूरी Timeline
29 मई की रात को इलाके में दो पड़ोसियों के बीच झगड़ा शुरू हुआ। 25 वर्षीय पीड़िता ने शांति बनाए रखने और दोनों पक्षों को अलग करने की कोशिश की। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी पक्ष ने महिला पर हमला बोल दिया। मारपीट इतनी बुरी थी कि महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।
परिवार ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान 30 मई को उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के लिए शव को तेनुघाट अनुमंडलीय अस्पताल भेजा गया है। परिवार का आरोप है कि मारपीट के कारण महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की जान चली गई।
पुलिस ने मृतका के परिवार के बयान और लिखित शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की। बेरमो थाना प्रभारी रोहित कुमार ने पुष्टि की कि मुख्य आरोपी सुरेंद्र भुइयां सहित छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
गिरफ्तार आरोपी:
- सुरेंद्र भुइयां (मुख्य आरोपी)
- बबलू कुमार
- बीरेंद्र कुमार भारती
- राहुल डेगर
- राजेश भुइयां
- धीरेन भुइयां
पुलिस ने बताया कि अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है और मामले की गहन जांच चल रही है।
BJP का आक्रोश और बंद का आह्वान
भाजपा ने इस घटना को गर्भवती महिला की निर्मम हत्या बताया। पार्टी ने पूरे बोकारो जिले में एक दिन का बंद बुलाया था। बोकारो से भाजपा के पूर्व विधायक बिरंची नारायण ने कहा, 'जब तक मुख्य आरोपी गिरफ्तार नहीं हो जाता, बंद जारी रहता। पुलिस ने कार्रवाई की तो हमने बंद वापस ले लिया।'
राज्य भाजपा महासचिव अमर कुमार बाउरी ने पीड़िता के परिवार के लिए 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की। साथ ही उन्होंने उन पुलिसकर्मियों और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जिन पर पोस्टमार्टम में छेड़छाड़ या बाधा डालने का आरोप है।
बाउरी ने दावा किया कि भाजपा के अल्टीमेटम के बाद ही पुलिस ने तेजी दिखाई। उन्होंने पूरे नेटवर्क की जांच कराने की मांग की, जिसमें कथित राजनीतिक संरक्षण का भी जिक्र किया। भाजपा कार्यकर्ता 1 जून को पीड़ित परिवार से मिलने वाले हैं और जरूरत पड़ने पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से भी संपर्क करेंगे।
कांग्रेस का पलटवार
प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भाजपा के आरोपों को 'दुर्भाग्यपूर्ण, गुमराह करने वाले और राजनीतिक रूप से प्रेरित' बताया। उन्होंने कहा, 'पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय भाजपा इस दुखद घटना का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।'
कांग्रेस ने सभी आरोपों को बेबुनियाद और तथ्यों के विपरीत करार दिया। सिन्हा ने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे मामले का राजनीतिकरण न करें और पुलिस को बिना दबाव के जांच करने दें। उन्होंने कहा कि जनता न्याय, संवेदनशीलता और जवाबदेही चाहती है, न कि नफरत और गलत सूचना पर आधारित राजनीति।
महिला सुरक्षा और गर्भवती माताओं पर खतरा
यह घटना झारखंड में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़ा करती है। एक गर्भवती महिला का पड़ोसियों के छोटे झगड़े में दखल देकर अपनी जान गंवा देना बेहद दुखद है। झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कई मामले सामने आए हैं। इस घटना में मुख्य रूप से दो पहलू उभरकर आए हैं, पड़ोसी विवाद में अनावश्यक दखल और उसकी हिंसक परिणति। पुलिस को इस मामले में सख्ती से जांच करनी चाहिए कि क्या मारपीट जानबूझकर की गई या फिर यह अनियोजित थी।
गर्भवती महिला की मौत न सिर्फ एक जीवन बल्कि एक अजन्मे बच्चे की भी हत्या मानी जा रही है। चिकित्सकीय रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मौत मारपीट से हुई या अन्य कारण थे।
पुलिस की भूमिका और आगे की जांच क्या?
पुलिस ने तेजी दिखाते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो सकारात्मक कदम है। बेरमो थाना प्रभारी ने जांच जारी होने की जानकारी दी। अब जरूरी है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट पारदर्शी तरीके से आए। फॉरेंसिक साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं। गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। बाकी फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। भाजपा द्वारा पुलिस और मेडिकल स्टाफ पर लगाए गए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आए।













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