क्या बिना नागरिकता लिए वोटर बन गईं सोनिया गांधी? 1980 की वोटर लिस्ट पर कोर्ट ने भेजा नोटिस, पढ़ें पूरा मामला
Sonia Gandhi voter list: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी को एक पुराने लेकिन गंभीर आरोप पर नोटिस जारी किया है। आरोप यह कि वह भारत की नागरिक बनने से तीन साल पहले ही देश की वोटर लिस्ट में शामिल हो गई थीं।
मामला बेहद पेचीदा है और कोर्ट ने अब इसका पूरा रिकॉर्ड मंगाकर अगली सुनवाई 6 जनवरी को तय की है। सोनिया गांधी पर यह कार्रवाई उस याचिका पर हुई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 1980-81 की मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम गलत तरीके से शामिल किया गया था। आखिर यह पूरा विवाद है क्या, और किस आधार पर सवाल उठाए जा रहे हैं, आइए विस्तार से समझते हैं।

🟡 सोनिया गांधी को वोटर लिस्ट नोटिस क्यों भेजा गया?
- एडवोकेट विकास त्रिपाठी ने एक रिवीजन याचिका दाखिल की है। इससे पहले मजिस्ट्रेट अदालत ने सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को 11 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया था।
- याचिकाकर्ता का आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की वोटर लिस्ट में शामिल था, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को हासिल की।
- राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है और TCR यानी पूरा केस रिकॉर्ड भी तलब किया है।
🟡 आखिर मामला शुरू कहां से हुआ?
याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की 1980-81 की वोटर लिस्ट में था। उस समय वह इटली की नागरिक थीं और भारतीय नागरिकता लेने से पहले ही मतदाता सूची में शामिल होना नियमों के खिलाफ बताया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि बाद में 1982 में सोनिया का नाम लिस्ट से हटा दिया गया। सवाल यह उठता है कि:
- 1980 में कौन से दस्तावेजों के आधार पर उनका नाम जोड़ा गया?
- क्या इसके लिए गलत या फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल हुए?
- 1982 में नाम हटाने की वजह क्या थी?
इन्हीं बिंदुओं पर कोर्ट ने जवाब मांगा है।
🟡 बीजेपी ने भी उठाए थे सवाल
13 अगस्त को बीजेपी की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया था कि सोनिया गांधी का नाम दो बार वोटर लिस्ट में शामिल हुआ और दोनों बार वह भारतीय नागरिक नहीं थीं।
उनके आरोप इस प्रकार हैं...
🔹पहली बार - 1980 की वोटर लिस्ट
- पता: 1, सफदरजंग रोड (इंदिरा गांधी का आवास)
- पोलिंग स्टेशन 145, क्रम संख्या: 388
- उस समय वे इटली की नागरिक थीं।
🔹दूसरी बार - 1983 की वोटर लिस्ट
- पोलिंग स्टेशन 140, क्रम संख्या: 236
- समस्या यह कि 1983 की लिस्ट की योग्यता तारीख 1 जनवरी 1983 थी
- जबकि सोनिया गांधी ने नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को ली।
- अमित मालवीय के अनुसार यह पूरा मामला "चुनावी गड़बड़ी" का उदाहरण है और कानून का सीधा उल्लंघन।
🟡 मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पहले क्यों खारिज की थी याचिका?
ACMM वैभव चौरेसिया ने सितंबर 2025 में याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि...
- चुनाव संबंधी मामलों में अदालतें सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं
- ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 329 का उल्लंघन होगा
- इसी फैसले के खिलाफ अब रिवीजन याचिका दायर की गई है, जिस पर कोर्ट ने सोनिया गांधी को नोटिस भेजा है।
🟡 याचिकाकर्ता के मुख्य सवाल
याचिका में पांच बड़े प्रश्न उठाए गए हैं:
- अगर 1983 में नागरिकता ली, तो 1980 में नाम कैसे जुड़ा?
- कौन से दस्तावेज दिए गए थे?
- क्या कोई गलत कागज़ जमा किया गया था?
- 1982 में नाम क्यों हटाया गया?
- दो बार बिना नागरिकता के वोटर लिस्ट में नाम कैसे जुड़ गया?
- कोर्ट इन सभी सवालों पर अब जवाब मांग रही है।
🟡 अब आगे क्या?
सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस का जवाब देना होगा। 6 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई है। कोर्ट TCR यानी पूरा रिकॉर्ड जांचेगी, इसके बाद तय होगा कि FIR दर्ज हो सकती है या नहीं
यह मामला न केवल कानूनी रूप से दिलचस्प है बल्कि राजनीतिक तौर पर भी बेहद संवेदनशील बन चुका है, क्योंकि आरोप सीधे चुनावी दस्तावेजों और नागरिकता से जुड़े हैं।












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