राष्ट्रगान गाना और वीडियो बनाना गैर-इस्लामिक: मुस्लिम धर्मगुरु

बरेली। 15 अगस्त को पूरा देश अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा लेकिन इसके पहले कुछ स्थानों पर आजादी के जश्न को लेकर विरोध के सुर खड़े हो गए है, दरअसल कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस्लामिक समुदाय से अपील की है कि वह 15 अगस्त का दिन देशभक्ति दिवस के रूप में मनायें लेकिन राष्ट्रगान गाने और वीडियो रिकॉर्ड करने से बचें क्योंकि यह इस्लाम के खिलाफ है।

आपको बता दें कि मुस्लिम धर्मगुरुओं की ओर से ये बयान इसलिए आया है क्योंकि दो दिन पहले ही उप्र मदरसा शिक्षा परिषद ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी मदरसों में झंडारोहण के बाद छात्र-छात्राओं द्वारा राष्ट्रगान गाने और पूरे कार्यक्रम की पहली बार फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराए जाने के निर्देश दिए हैं।

सभी मदरसों में स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जाए

मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से यह आदेश तीन अगस्त को जारी किया गया था। इसमें साफ कहा गया कि प्रदेश के सभी मदरसों में स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जाए।

टैगोर ने राष्ट्रगान ब्रिटिश राजा जॉर्ज पंचन की प्रशंसा में लिखा

जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए बरेली के शहर काजी मौलाना असजद खान ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि रविंद्रनाथ टैगोर ने राष्ट्रगान ब्रिटिश राजा जॉर्ज पंचन की प्रशंसा में लिखा था। इस्लाम के मुताबिक हमारा 'अधिनायक' अल्लाह है किंग जॉर्ज नहीं, हम राष्ट्रगान का अपमान नहीं करते हैं लेकिन अपनी धार्मिक भावनाओं के चलते इसे नहीं गा सकते।

फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी गैर-इस्लामिक

खान ने कहा कि शरिया के मुताबिक फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी गैर-इस्लामिक है। उन्होंने मदरसों के संचालकों को अपील की है कि वे राष्ट्रीय ध्वज फहराएं और सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान गाएं, मिठाइयां बांटें और स्वतंत्रता संग्राम में अपनी जान कुर्बान करने वाले सैनानियों को याद करें लेकिन राष्ट्रगान गाना और वीडियोग्राफी ना करें।

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