Siachen day: जानिए क्या है ऑपरेशन मेघदूत? क्यों मनाया जाता है सियाचिन दिवस? बर्फीले रणभूमि की वीरता की कहानी
Siachen day: 13 अप्रैल यानी आज के दिन हर वर्ष सियाचिन दिवस मनाया जाता है। भारतीय सेना (Indian Army) द्वारा 1984 में शुरू किए गए ऑपरेशन मेघदूत (Indian Army's Operation Meghdoot in 1984)की स्मृति में इस दिन को याद किया जाता है।
इसी दिन भारतीय सैनिकों ने बिलाफोंड ला दर्रे पर लैंडिंग कर सियाचिन ग्लेशियर की अहम चोटियों पर कब्ज़ा जमाया था और दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में रणनीतिक बढ़त हासिल की थी।

ऑपरेशन मेघदूत: एक ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई
- 1984 में लॉन्च किया गया यह ऑपरेशन भारतीय सेना की रणनीतिक सोच और साहसिकता का प्रतीक बन गया।
- इस सैन्य अभियान की शुरुआत लेफ्टिनेंट जनरल मनोहर लाल चिब्बर, लेफ्टिनेंट जनरल पी.एन.हून, और मेजर जनरल शिव शर्मा के नेतृत्व में की गई थी।
- भारतीय वायुसेना और थलसेना के बीच अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए, इस ऑपरेशन में सैनिकों को एयरलिफ्ट किया गया और अत्यंत ऊँचाई वाले क्षेत्रों में आपूर्ति ड्रॉप की गई।
भारतीय वायुसेना की अहम भूमिका
- सियाचिन पर वायुसेना की मौजूदगी 1978 से शुरू हुई थी।
- Chetak हेलिकॉप्टर ने 1978 में पहली बार ग्लेशियर पर लैंडिंग की थी।
- ऑपरेशन मेघदूत में Mi-17, Mi-8, Chetak, Cheetah हेलिकॉप्टर्स और An-12, An-32, IL-76 एयरक्राफ्ट्स का उपयोग किया गया।
सियाचिन दिवस का महत्व
इस दिन हम उन सभी "सियाचिन वारियर्स" को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने बर्फीली सीमाओं पर देश की रक्षा में अदम्य साहस दिखाया। आज भी, हमारे सैनिक 'Frozen Frontier' की रक्षा कर रहे हैं, जहां तापमान अक्सर -50°C से नीचे चला जाता है।
सम्मान और कृतज्ञता का दिन
सियाचिन दिवस केवल एक सैन्य अभियान की वर्षगांठ नहीं है, बल्कि यह त्याग, वीरता और मातृभूमि के प्रति अटूट प्रेम की प्रेरणा का प्रतीक है। इन हिम योद्धाओं को हमारा शत-शत नमन।
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सियाचिन का रणनीतिक महत्व
- सियाचिन ग्लेशियर लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई पर काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित है।
- यह शक्सगाम घाटी (जो पाकिस्तान ने 1963 में चीन को सौंप दी थी) पर नजर रखता है।
- यह गिलगित-बाल्टिस्तान से लेह तक के रास्तों, काराकोरम दर्रे और अवैध रूप से कब्जे में लिए गए पाक अधिकृत कश्मीर पर भी रणनीतिक नियंत्रण रखता है।
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