ISS से लौटे Shubhanshu Shukla, धरती पर रखा कदम! भारत सरकार ने मिशन के लिए Axiom Space को दिए कितने पैसे?
Shubhanshu Shukla: आज भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलट और ग्रुप कैप्टेन शुभांशु शुक्ला ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिस पर पूरे देश को गर्व है। वे आज अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में 19 दिनों तक रह कर धरती पर वापस आ चुके हैं।
ये सिर्फ एक उड़ान नहीं है, बल्कि विज्ञान, तकनीक और देशभक्ति के जज्बे का एक ऐसा मिशन है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा। पहली बार कोई भारतीय वैज्ञानिक इतने हाईटेक अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा बना है। शुभांशु न सिर्फ भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, बल्कि वे अंतरिक्ष में भारतीय संस्कृति, शोध और तकनीकी क्षमताओं की छाप भी छोड़ी है।

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अमेरिकी स्पेस कंपनी एक्सिओम स्पेस के मिशन Ax-4 का हिस्सा हैं। एक्सिओम स्पेस के ऐतिहासिक मिशन Ax-4 के जरिए वह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जा रहे हैं। शुभांशु अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से बुधवार 25 जून को ISS के लिए रवाना हुए थे। 15 जुलाई 2025 को उनकी धरती पर वापसी हुई है।
ये भी पढ़ें: अंतरिक्ष में इतिहास रचने निकले IAF पायलट शुभांशु शुक्ला, मूंग दाल हलवा से आमरस तक, क्या-क्या ले गए हैं साथ?
लगभग 28 घंटे 50 मिनट के सफर के बाद 26 जून को उनका स्पेसक्राफ्ट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से जुड़ गया था। आइए जानते हैं इस मिशन पर जाने के लिए शुभांशु को कितनी पैसे दिए जा रहे हैं और भारत सरकार ने इसके लिए कितना खर्च किया है...
मिशन पर नहीं मिल रही सैलरी
खास बात यह है कि इस मिशन के लिए शुभांशु को कोई प्रति घंटे की सैलरी या अलग मानदेय नहीं मिल रहा है। इस पूरी अंतरिक्ष यात्रा का खर्च भारत सरकार खुद उठा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने अमेरिका की प्राइवेट स्पेस कंपनी Axiom Space को इस मिशन के लिए करीब 548 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। इस राशि से शुभांशु की ट्रेनिंग, स्पेस सूट, रिसर्च किट और दूसरी जरूरी चीजों का इंतजाम किया गया है।
14 दिन का मिशन, 60 से ज्यादा प्रयोग
शुभांशु का यह मिशन कुल 14 दिनों का था लेकिन मौसम से जुड़ी कुछ वजहों से उन्हें 19 दिन ISS में रहना पड़ा। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में करीब 60 वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लिया जिसमें भारत के मुख्य 7 प्रयोग हैं। इनमें माइक्रोग्रैविटी में शरीर पर असर, अंतरिक्ष भोजन की जांच, बायोलॉजिकल रिसर्च और भविष्य की तकनीकों से जुड़े प्रयोग शामिल हैं।
लखनऊ से है संबंध, NDA और IISc से पढ़ाई
शुभांशु शुक्ला उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं। उन्होंने NDA से अपनी पढ़ाई की और फिर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), बेंगलुरु से M.Tech किया। वे 2006 में भारतीय वायुसेना में पायलट बने और अब तक 2000 घंटे से ज्यादा फाइटर जेट उड़ाने का अनुभव हासिल कर चुके हैं।
गगनयान के लिए भी चुने गए थे
शुभांशु को 2019 में भारत के गगनयान मिशन के लिए चुना गया था। इस मिशन की तैयारी के दौरान उन्होंने रूस और भारत में कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया था। अंतरिक्ष के लिए यह उनका पहला मिशन है।
पहले टल चुका था मिशन
इससे पहले यह मिशन कुछ तकनीकी और मौसम से जुड़ी वजहों के कारण टाल दिया गया था। लेकिन अब आखिरकार शुभांशु अपने साथी यात्रियों के साथ अंतरिक्ष की ओर रवाना हो चुके हैं। भारत के लिए यह एक गर्व का पल है।
ये भी पढ़ें: Shubhanshu Shukla: 'मेरे कंधे पर मेरा तिरंगा', अंतरिक्ष के रास्ते से शुभांशु शुक्ला का पहला संदेश












Click it and Unblock the Notifications