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अंतरिक्ष में इतिहास रचने निकले IAF पायलट शुभांशु शुक्ला, मूंग दाल हलवा से आमरस तक, क्या-क्या ले गए हैं साथ?

Shubhanshu Shukla: लखनऊ के एक साधारण परिवार से निकलकर भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलट शुभांशु शुक्ला अब अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूने के लिए रवाना हो गए हैं। बचपन में जिन तारों को निहारते हुए उन्होंने सपने देखे थे, अब वह उन्हीं सितारों के बीच अपनी जगह बनाने जा रहे हैं। 39 वर्षीय शुभांशु अब भारत के उन गिने-चुने नामों में शामिल होने जा रहे हैं जो अंतरिक्ष तक पहुंचे हैं।

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अमेरिकी स्पेस कंपनी एक्सिओम स्पेस के मिशन Ax-4 का हिस्सा हैं। एक्सिओम स्पेस के ऐतिहासिक मिशन Ax-4 के जरिए वह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक सफर में वह देश की उम्मीदों और गौरव के साथ-साथ कुछ खास चीजें साथ लेकर जा रहे हैं। इनमें कुछ खास इंडियन डीसेज भी शामिल है।

Shubhanshu Shukla

शुभांशु अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से 10 जून को शाम 5:52 बजे (भारतीय समय अनुसार) उड़ान भरने वाले थे लेकिन इसे पोस्टपोंड कर दिया गया था। आज, बुधवार 25 जून को शुभांशु ISS के लिए रवाना हो गए हैं। 28 घंटे 50 मिनट के सफर के बाद 26 जून को उनका स्पेसक्राफ्ट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से जुड़ जाएगा।
ये भी पढ़ें: 'हमें डर नहीं लग रहा, हमें तो गर्व है', कैप्टन शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्ष में जाने के चयन पर क्या बोला परिवार

अपने साथ क्या-क्या लेकर गए हैं शुभांशु?

अंतरिक्ष मिशन पर गए शुभांशु अपने साथ भारतीय संस्कृति की झलक भी ले गए हैं। वह आमरस, गाजर का हलवा और मूंग दाल का हलवा जैसे खास भारतीय व्यंजन अंतरिक्ष में लेकर गए हैं। इनके अलावा एक सफेद रंग का खिलौना हंस "जॉय" भी उनके साथ है, जो ज्ञान और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।

मिशन से जुड़े वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए शुभांशु माइक्रोएल्गी की तीन अलग-अलग किस्में भी लेकर गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने छह तरह की फसलों के बीज भी साथ रखे हैं, जिनसे अंतरिक्ष में पौधों की बढ़त और अनुकूलन को लेकर अध्ययन किया जाएगा। शुभांशु ने कुछ निजी चीजें भी साथ रखी हैं, जो उनके लिए भावनात्मक रूप से खास हैं।

यहां देखिए शुभांशु जो साथ ले गए उसकी पूरी लिस्ट-

  • भारतीय व्यंजन: आमरस, गाजर का हलवा और मूंग दाल का हलवा और चावल
  • एक सफेद रंग का खिलौना हंस "जॉय"
  • वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए माइक्रोएल्गी (काई) की तीन अलग-अलग किस्में
  • 6 तरह की फसलों के बीज
  • कुछ निजी और भावनात्मक रूप से खास चीजें

धरती से अंतरिक्ष के सफर से पहले शुभांशु का वीडियो

एक्सिओम स्पेस द्वारा जारी वीडियो में शुभांशु हाथ जोड़कर अभिवादन करते नजर आ रहे हैं। अपनी ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा से पहले इस वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, "नमस्ते, मैं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला हूं..."। करीब 15 साल तक कॉम्बैट पायलट के रूप में देश की सेवा करने वाले शुभांशु अब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर उड़ान भरने वाले भारतीय नागरिक बनने वाले हैं।

1984 के बाद भारतीय पायलट की दूसरी उड़ान

39 वर्षीय शुभांशु शुक्ला, राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष उड़ान भरने वाले दूसरे भारतीय पायलट बनेंगे। उनके इस मिशन को लेकर उनके गृहनगर लखनऊ में जबरदस्त उत्साह है। परिवार, रिश्तेदार और दोस्त सभी उनके लिए दुआ कर रहे हैं।

परिवार कर रहा है पूजा-पाठ

शुभांशु के पिता शंभू दयाल शुक्ला, जो कि एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं, ने बताया कि परिवार ने उनके सफल मिशन के लिए 'सत्यनारायण भगवान की कथा' और हवन का आयोजन किया है। उन्होंने कहा, "अब डर नहीं लग रहा, हम बस खुश हैं कि बेटा इतिहास रचने जा रहा है।"

उनकी मां आस्था शुक्ला ने कहा, "वह खुद बहुत उत्साहित हैं कि वह भारत के लिए कुछ नया करने जा रहे हैं। हम तो बस यही चाहेंगे कि वो मिशन पूरा कर के जल्दी लौट आएं।"

हर दिन करता है परिवार से बात

शुभांशु की बहन सुचि शुक्ला, जो लखनऊ में साइंस टीचर हैं, ने बताया, "वह पिछले दो हफ्तों से क्वारंटीन में हैं लेकिन हर दिन एक बार वीडियो कॉल करते हैं। उनकी पत्नी डॉ. कामना शुभा शुक्ला और उनका पांच साल का बेटा इस वक्त फ्लोरिडा में ही है। हम सभी एक साथ कॉल पर मिलते हैं। मैं इन दिनों माता-पिता के घर शिफ्ट हो गई हूं और हमारी बड़ी बहन भी नोएडा से आ रही हैं ताकि हम सब साथ में उसका हौसला बढ़ा सकें।"

स्पेस में भी रहेगा भारतीय स्वाद

शुभांशु भारतीय व्यंजन अपने साथ अंतरिक्ष ले जा रहे हैं। उनकी बहन बताती हैं, "वो मूंग दाल का हलवा, गाजर का हलवा, आमरस और चावल ले जा रहे हैं। शुरुआत में मसालेदार खाना ले जाने की अनुमति नहीं थी, लेकिन बाद में कुछ खास डिशेज की इजाजत मिल गई। वह फिटनेस लवर हैं और योगा के बहुत शौकीन हैं, तो खाना और फिटनेस दोनों बैलेंस करेंगे।"

कुछ यादें भी ले जाएंगे साथ

हालांकि उन्हें अपने पर्सनल सामान की जानकारी सार्वजनिक करने की इजाजत नहीं है, लेकिन उनकी बहन को लगता है कि वह परिवार की तस्वीरें साथ ले जा रहे हैं। सुचि कहती हैं, "स्पेस में जो चीज जाती है, वह एक सर्टिफाइड स्पेस ऑब्जेक्ट बन जाती है। वो जब लौटेंगे, तब ही हमें पता चलेगा कि वो क्या लेकर गए थे।"

स्कूल में जश्न का माहौल

लखनऊ के सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, जहां से शुभांशु ने पढ़ाई की थी, वहां उनके मिशन को लेकर जश्न मनाया जा रहा है। स्कूल की मैनेजर प्रो. गीता गांधी किंगडन ने बताया कि "हमारा स्कूल गर्व महसूस कर रहा है कि हमारे छात्र ने यह उपलब्धि हासिल की है। वह न केवल हमारे स्कूल बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।"

स्कूल के कानपुर रोड ब्रांच में "YyomNite Carnival" आयोजित किया जा रहा है, जिसमें स्पेस से जुड़ी एक्टिविटीज, फोटोशूट और मिशन कंट्रोल सेंटर की झलक भी होगी। शुभांशु का परिवार भी इस कार्यक्रम में शामिल होगा।

देश को है शुभांशु पर गर्व

पूरे देश की निगाहें अब शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक उड़ान पर टिकी हैं। भारत एक बार फिर अंतरिक्ष में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने जा रहा है और लखनऊ का यह बेटा एक नए युग की शुरुआत करने वाला है।
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