राज ठाकरे ने की उद्धव से शराब की दुकानें खोलने की मांग, शिवसेना ने दिया ये जवाब
नई दिल्ली। मनसे प्रमुख राज ठाकरे की महाराष्ट्र सरकार से शराब की दुकानें खोलने की मांग शिवसेना ने तंज कसा है। शिवसेना की ओर से कहा गया है कि उनके चावल की प्लेट की तरह से ही पैग भी जरूरी है, इसलिए शराब की याद आ रही है। शिवसेना ने शनिवार को अपने मुखपत्र सामना में ये बातें लिखी हैं। सामना के संपादकीय में राज ठाकरे की दो दिन पहले सीएम उद्धव ठाकरे को लिखी उस चिट्ठी को बिल्कुल गैरजरूरी बताया गया है, जिसमें उन्होंने राज्य में शराब की दुकानों को खोल देने की मांग की है।

राज ठाकरे पर निशाना
सामना में कहा गया है,अपनी मांग के जरिये राज ठाकरे ने सरकार को बताया कि शराब भी खाने जैसा महत्वपूर्ण है। जिस तरह चावल की थाली लोगों के लिए जरूरी है उसी तरह वो 'क्वार्टर' और 'पेग' पर निर्भर हैं। आगे संपादकीय में कहा गया है, राज ने कहा है कि वो राजस्व के लिए ऐसा कह रहे हैं लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि केवल दुकानें खुल जाने से राजस्व नहीं मिलता। जब कोई वितरक कारखानों से उत्पाद खरीदता है तो सरकार को उत्पाद शुल्क और बिक्री कर के रूप में राजस्व मिलता है। इन इकाइयों को शुरू करने के लिए श्रमिकों की जरूरत होती है। ऐसे में ये सिर्फ दुकान खोलने का मामला नहीं है।

शराब दुकानें खुलीं तो भीड़ कैसे रुकेगी
सामना में कहा गया है कि कोरोना संकट के चलते कहीं भी भीड़ ना हो ये बहुत जरूरी है। ऐसे में अगर शराब की दुकानें खुलीं तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना मुश्किल काम होगा। ऐसे में इस और भी शराब की दुकानों को खोलने से पहले सरकार को सोचना होगा। लेख में ये भी कहा गया है कि राज ठाकरे ने एक मुद्दा उठाया है और सरकार को समग्र स्थिति पर विचार करते हुए इस पर सोचना चाहिए।

क्या कहा था राज ठाकरे ने
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार को महाराष्ट्र सीएम और अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे से राज्य में शराब की दुकानों को खोलने को लेकर चिट्ठी लिखी है। उद्धव को लिखी चिट्ठी में राज ने कहा है, राज्य कोरोना संकट से जूझ रहा है। इस संकट से उबरने के लिए पैसा चाहिए और राज्य का खजाना खाली है, ऐसे में हमें इस और तुरंत सोचने की आवश्यकता है। 18 मार्च से माहाराष्ट्र में लॉकडाउन है। 3 मई के बाद भी ये कितना बढ़े, इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता है। राज्य में सारा कामकाज बंद है। पेट्रोल-डीजल और जमीन की रजिस्ट्री से कोई कमाई इस वक्त नहीं हो रही है। सरकार की कमाई के ज्यादातर जरिए बंद हैं। इस हालत में बिना पैसे के सरकार कैसे कोरोना से जूझेगी, ये सोचने वाली बात है। ऐसे में राजस्व के लिए शराब की दुकानें खोलने को इजाजत दी जाए।












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