शिव सेना को डिप्टी सीएम के लिए भी बीजेपी से करनी पड़ सकती है मोल-तोल!

बेंगलुरू। तेजी से बदलते महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 चुनाव के नतीजों ने चुनावी पंडितों और राजनीतिक विश्लेषकों दोनों का दिमाग चकरा दिया है। सुबह 6 बजे जब काउंटिग शुरू हुई तो एग्जिट पोल के नतीजों की तरह बीजेपी दोनों प्रदेशों में लैंड स्लाइड जीत की ओर बढ़ती दिख रही थी, लेकिन सुबह के 9 बजे तक कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों की सीटों पर बढ़त दोनों राज्यों में बराबर दिखने लग गई थी।

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    लेकिन 11 बजे तक दोनों राज्यों के आए रूझानों में महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों राज्यों में कांग्रेस और शिव सेना की विभिन्न सीटों पर बढ़त ने बीजेपी का अंकगणित बिगाड़ दिया। 12 बजे तक तस्वीर साफ हो गई। बीजेपी महाराष्ट्र में 102 और शिव सेना 60 सीटों पर बढ़त पर कायम है, जिससे एक बार फिर महाराष्ट्र में एनडीए की सरकार बननी तय हो गई है।

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    महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में एनडीए के साथ चुनाव में उतरी शिव सेना और शिव सैनिक शुरूआती रूझानों को परिणाम समझते हुए ऊल-जुलूल बयान देने लगे। शिव सेना के प्रवक्ता संजय रावत ने तो आदित्य ठाकरे (शिव सेना चीफ उद्धव ठाकरे के सुपुत्र) को महाराष्ट्र का अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग रख दी।

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    शुरूआती रूझानों में शिव सेना के कार्यकर्ताओं के खून में भी उबाल आ गया था और आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठाने लग गए। हालांकि 12 बजे तक रूझानों में जब बीजेपी की बढ़त 100 सीटों के ऊपर पहुंच गई तो शिव सैनिक का उत्साह धीमा पड़ गया और मायूसी होकर आदित्य ठाकरे के लिए डिप्टी सीएम की डिमांड करने लगे।

    गौरतलब है 288 सीटों वाले महाराष्ट्र विधानसभा के लिए बीजेपी और शिव सेना क्रमशः 162 और 126 सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। बीजेपी के 162 उम्मीदवारों में 104 उम्मीदवार अपनी सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं और पूरी संभावना है कि बीजेपी 102-104 सीटों को जीतने में कामयाब होगी जबकि शिव सेना के 126 उम्मीदवारों में केवल 61 उम्मीदवार अपनी सीटों पर बढ़त बनाने में कामयाब हुए हैं।

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    1 बजे तक के रूझानों में बीजेपी और शिव सेना क्रमश 104 और 61 सीटों पर बढ़त कायम है, जो संभवतः अंतिम परिणाम हो सकते हैं। दोनों की जीत का प्रतिशत की तुलना की जाए तो बीजेपी ने शिव सेना की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इन आकंड़ों ने शिव सेना को आदित्य ठाकरे के लिए डिप्टी सीएम पद हासिल करने के लिए बीजेपी से तोल-मोल करनी पड़ सकती है।

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    आकंड़ों के मुताबिक 162 सीटों पर लड़ी बीजेपी की जीत का औसत 62 प्रतिशत है जबकि शिव सेना का जीत का औसत बीजेपी से काफी कम यानी महज 48 प्रतिशत बैठता है। बीजेपी और शिव सेना की सीटों में किसी बड़े फेरबदल की संभावना नहीं दीखती है। हो सकता है कि बीजेपी की सीटें घटकर 100-102 हो जाएं।

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    लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शिव सेना 100 सीट जीत सकती है और वह आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर दवाब बना सके। हालांकि रूझानों और परिणामों में पिछड़ने के बाद शिव सैनिक ही नहीं बल्कि शिव सेना के बड़े नेताओं की बोलती बंद हो गई। शायद यही कारण है कि अब आदित्य ठाकरे को डिप्टी सीएम सीएम बनाने की जोर पकड़ने लगी है।

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    कुछ ऐसा ही हाल हरियाणा विधानसभा चुनावों के परिणाम का रहा, जो बीजेपी के लिए चौंकाऊ कहे जा सकते हैं, क्योंकि अभी तक रूझानों और परिणामों के आधार पर यही राय बन रही है कि हरियाणा में किसी भी दल का जनता ने स्पष्ट जनादेश नहीं दिया है। हरियाणा में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस अथवा बीजेपी को 10-12 सीटों पर बढ़त लेकर चल रही जेजेपी का समर्थन मांगना होगा।

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    फिलहाल 2 बजे तक के रूझानों कांग्रेस और बीजेपी दोनों 35-35 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं और किंगमेकर की भूमिका में आई जेजेपी 10 सीटों पर बढ़त ले चुकी है, लेकिन 10 ही सीटों पर निर्दलीय का भी बढ़त कायम है, जो दोनों दलों के लिए जेजेपी से मोल-तोल के लिए बड़ा हथियार साबित हो सकता है।

    वैसे, हरियाणा विधानसभा चुनाव परिणामो की काउंटिंग सुबह 6 बजे जब काउंटिंग शुरू हुई थी तब रूझानों में बीजेपी छाई हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता बीजेपी के स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाए के सपने काफूर हो गए। मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में हरियाणा में दोबारा सरकार बनाने की जुगत में जुटी बीजेपी 11 बजे तक रूझानों में 36 सीटों पर लीड बनाए हुई थी।

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    जबकि कांग्रेस का 32 सीटों पर बढ़त कायम रखे हुए थे, लेकिन अब दोनों दलों के आंकड़े बदल चुके हैं। संभव है कि दोनों दलों के आंकड़ों में एक दो सीटों का अंतर हो जाए, लेकिन यह तय है कि हरियाणा में सरकार बनाने के लिए दोनों दलों को बैसाखियों की जरूरत पड़ेगी।

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    हरियाणा में किंगमेकर और सत्ता की चाभी बन चुके जेजेपी चीफ दुष्यंत चौटाला को फांसने के लिए कांग्रेस ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का ऑफर दे दिया है। बीजेपी ने भी जेजेपी चीफ से बात करने के लिए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और एनडीए सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के चीफ प्रकाश सिंह बादल को लगा दिया है। हरियाणा में अपनी किंगमेकर की अपनी भूमिका को पहचानते हुए जेजेपी चीफ दुष्यंत चौटाला भी मोल-तोल के मूड में आ गए है। उन्होंने मीडिया के सामने आकर बकायदा मुख्यमंत्री पद के साथ किसी भी दल के समर्थन करने की घोषणा की है।

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    बीजेपी और जेजेपी का गठबंधन हरियाणा में मुश्किल लग रहा है, लेकिन कांग्रेस कर्नाटक की तरह हरियाणा में भी जेजेपी के साथ गठबंधन करके सरकार बना सकती है। हालांकि उसके मुश्किल यह है कि चुनाव से पूर्व विद्रोही मूड में दिखे पूर्व हरियाणा सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा उसका खेल बिगाड़ सकते हैं।

    हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस को हरियाणा में बीजेपी के मुकाबले खड़ा करने वाले हुड्डा शहादत को तैयार होंगे, यह बड़ा सवाल है और अगर कांग्रेस ने महज सत्ता के लिए जेजेपी को मुख्यमंत्री की चाभी सौंपती है, तो हुड्डा भविष्य में कांग्रेस-जेजेपी गठबंधन सरकार गिराने में अग्रणी भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।

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