3 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने के ऐलान पर भाजपा की पूर्व सहयोगी शिवसेना ने क्या कहा?

मुंबई। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस संकट के बीच एक बार फिर राष्ट्र को संबोधित किया। पीएम ने अपने संबोधन में बताया कि देशव्यापी लॉकडाउन को बढ़ाकर 3 मई, 2020 तक कर दिया गया है। लॉकडाउन बढ़ाए जाने के बाद देशभर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, इसी बीच शिवसेना और एनसीपी ने आर्थिक मोर्चे पर पीएम मोदी पर निशाना साधा है। मंगलवार को शिवसेना और एनसीपी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संबोधन के दौरान आर्थिक चिंताओं को दूर करने में विफल रहे।

शुक्र है नया काम नहीं दिया: शिवसेना

शुक्र है नया काम नहीं दिया: शिवसेना

शिवसेना की प्रवक्ता मनीषा कयांदे ने भी पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा, शुक्र है कि प्रधानमंत्री ने इस बार लोगों को ऐसी कोई गतिविधि नहीं दी, जैसे बर्तन बजाना या दीपक जलाना। गौरतल है कि मोदी ने मंगलवार को घोषणा की कि देश भर में लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ा दिया गया है। पीएम ने कहा कि लॉकडाउन का कार्यान्वयन अपने दूसरे चरण में सख्ती सुनिश्चित किया जाएगा और बुधवार को विस्तृत दिशा-निर्देश लाया जाएगा।

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    कल ही कर देते लॉकडाउन का भी ऐलान

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    इसके साथ ही पीएम मोदी ने यह भी कहा कि 20 अप्रैल, 2020 तक जिन क्षेत्रों में कोरोना वायरस का प्रकोप कम होगा वहां नियमों में कुछ छूट भी दी जा सकती है। मनीषा कयांदे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कल (बुधवार) नए दिशानिर्देशों के साथ अगल घोषणा करने की बजाए लॉकडाउन के बढ़ाए जाने की घोषणा कर सकते थे। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को अलग-अलग क्षेत्रों में बीमारी के कारण होने वाले खतरे के आधार पर लिया जा सकता है।

    गरीबों की मदद करने की बात की लेकिन...

    गरीबों की मदद करने की बात की लेकिन...

    मनीषा कयांदे कहती है कि पीएम मोदी का भाषण सामान्य रूप से बयानबाजी है। शुक्र है कि लोगों को उन्होंने दीपक जलाना या बर्तन बजाने जैसा कोई काम नहीं दिया। उनके भाषण में कुछ भी जानकारी नहीं थी सिवाए इसके कि लॉकडाउन बढ़ाया गया है। महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक मोदी ने गरीबों की मदद करने की बात की लेकिन वह संबोधन में केंद्र सरकार की ओर से गरीबों, असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों की मदद के लिए एक पैकेज की घोषणा कर सकते थे।

    अर्थव्यवस्था पर नहीं दूर की चिंताएं

    अर्थव्यवस्था पर नहीं दूर की चिंताएं

    एनसीपी के एक अन्य प्रवक्ता महेश तापसे ने कहा कि यह उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री कोरोना वायरस द्वारा सामने आई आर्थिक चिंताओं पर बात करेंगे। कम से कम वह लॉकडाउन खत्म होने के बाद अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने के उपायों की घोषणा तो कर ही सकते थे। महेश तापसे ने कहा कि नियोक्ता और कर्मचारी, सरकार से जानना चाहते थे कि आने वाले समय में मंदी और बेरोजगारी से कैसे निपटा जाएगा।

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