Defense deal: दुनिया ने देखा 'मेक इन इंडिया' का दम, कैसे आर्मेनिया का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर बना भारत?
Armenia India Defense deal: दक्षिण काकेशस की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आ रहा है। कभी रूस का सबसे करीबी रहा आर्मेनिया अब अपनी सुरक्षा के लिए भारत और फ्रांस की ओर देख रहा है। यूक्रेन युद्ध में रूस के उलझने और अजरबैजान से मिली हार के बाद, आर्मेनिया का रूसी हथियारों से भरोसा टूट गया है।
अब भारत आर्मेनिया के लिए सबसे भरोसेमंद सैन्य साझीदार बनकर उभरा है। आर्मेनिया न केवल अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर है, बल्कि वह खुद को यूरोपीय नेटवर्क से जोड़कर रूस के प्रभाव से बाहर निकलना चाहता है।

India weapons export to Armenia: रूस से मोहभंग और भारत पर भरोसा
एक समय था जब आर्मेनिया की सेना पूरी तरह रूसी हथियारों पर टिकी थी। लेकिन हालिया युद्धों में रूसी प्रणालियां अजरबैजान के आधुनिक ड्रोनों के सामने नाकाम साबित हुईं। इसके अलावा, रूस का ध्यान पूरी तरह यूक्रेन पर है, जिससे आर्मेनिया खुद को अकेला महसूस करने लगा। ऐसे में भारत ने एक 'सच्चे दोस्त' की तरह हाथ बढ़ाया। भारत की हथियार प्रणालियां न केवल आधुनिक हैं, बल्कि किफायती और प्रभावी भी हैं। यही वजह है कि आर्मेनिया ने अपनी सुरक्षा की कमान अब भारतीय हथियारों को सौंप दी है।
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पिनाका से आकाश तक: भारतीय हथियारों का दम
आर्मेनिया ने भारत से युद्ध के मैदान में पासा पलटने वाले हथियार खरीदे हैं। इनमें पिनाका रॉकेट लॉन्चर, आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम और ATAGS होवित्जर तोपें शामिल हैं। भारतीय रडार 'स्वाति' भी अब वहां की सीमाओं की निगरानी कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि आर्मेनिया अपने सुखोई (Su-30) विमानों को भी भारतीय तकनीक से अपग्रेड कराना चाहता है। आज आर्मेनिया की तोपखाना और वायु रक्षा प्रणाली की रीढ़ पूरी तरह से 'मेड इन इंडिया' उत्पादों पर टिकी है।
India-Armenia Defense Ties: चीन-पाकिस्तान-अजरबैजान का गठजोड़
भारत के लिए आर्मेनिया का साथ देना केवल व्यापार नहीं, बल्कि कूटनीति भी है। दरअसल, अजरबैजान को पाकिस्तान और तुर्की का खुला समर्थन हासिल है। पाकिस्तान अक्सर कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ अजरबैजान का साथ देता है। ऐसे में आर्मेनिया को मजबूत करना भारत की एक सोची-समझी रणनीति है। भारत ने आर्मेनिया को हथियार देकर यह संदेश दिया है कि वह अपने विरोधियों के सहयोगियों को उनके ही क्षेत्र में चुनौती देने की ताकत रखता है।
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यूरोप की राह और भविष्य की योजनाएं
आर्मेनिया अब खुद को रूस के 'सैटेलाइट' देश की छवि से बाहर निकाल रहा है। वह यूरोपीय संघ (EU) के साथ जुड़ना चाहता है और फ्रांस इसमें उसकी मदद कर रहा है। आर्मेनिया भारत के 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) के लिए भी बहुत जरूरी है। भारत से यूरोप तक व्यापार के लिए आर्मेनिया एक अहम रास्ता बन सकता है। रूसी सैनिकों को अपने देश से बाहर निकालने की मांग और भारत-फ्रांस से नजदीकी बताती है कि आर्मेनिया अब एक नई राह पर चल पड़ा है।












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