इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ नाम! कौन हैं लेफ्टिनेंट शानन ढाका, NDA टॉपर को कहां मिली पहली पोस्टिंग?

Shanan Dhaka: हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा जीवन में कुछ बड़ा करे, लेकिन जब वही बच्चा देश की वर्दी पहनकर सीमाओं की रक्षा की जिम्मेदारी संभालने पहुंचे तो वह गर्व कई गुना बढ़ जाता है। हरियाणा के रोहतक जिले के सुंदराना गांव की बेटी शानन ढाका (Shanan Dhaka) ने ऐसा ही कर दिखाया है। सेना के माहौल में पली-बढ़ी शानन ने बचपन में जो सपना देखा था, उसे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और लगन के दम पर सच कर दिखाया। NDA में महिलाओं के लिए रास्ता खुलने के बाद उन्होंने मिले अवसर को दोनों हाथों से पकड़ा और इतिहास रच दिया।

शानन को देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA) की पासिंग आउट परेड में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला। कमीशन मिलने के साथ उनका सफर एक नए मुकाम पर पहुंच गया है। खास बात यह है कि वह उन पहली महिला कैडेट्स में शामिल हैं जिन्होंने NDA से लेकर IMA तक का पूरा सैन्य प्रशिक्षण हासिल किया। उनकी यह सफलता सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि देशभर की उन बेटियों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं।

Shanan Dhaka NDA Success Story

सेना से जुड़ा रहा है शानन का परिवार

रोहतक जिले के सुंदराना गांव की रहने वाली शानन ढाका का बचपन सेना के माहौल में बीता। उनके दादा सूबेदार चंदरभान ढाका और पिता नायब सूबेदार विजय कुमार ढाका भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। परिवार की इस पृष्ठभूमि का असर शानन पर भी पड़ा और बचपन से ही उनके मन में सेना में जाने की इच्छा पैदा हो गई। रुड़की, दिल्ली, चंडीमंदिर और चंडीगढ़ की सैन्य छावनियों में बिताए गए वर्षों ने उन्हें अनुशासन, जिम्मेदारी और देश सेवा की भावना से जोड़ा। परिवार ने भी हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और उनके हर फैसले में साथ खड़ा रहा।

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पढ़ाई में भी रहीं अव्वल

शानन सिर्फ खेल और अनुशासन में ही नहीं, पढ़ाई में भी शानदार प्रदर्शन करती रहीं हैं। उन्होंने 10वीं कक्षा में 97.4 प्रतिशत और 12वीं में 98.2 प्रतिशत अंक हासिल किए। उनकी शुरुआती पढ़ाई आर्मी पब्लिक स्कूलों में हुई, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में दाखिला लिया। स्कूल और कॉलेज के दौरान भी उनका लक्ष्य साफ था। वह हमेशा कुछ ऐसा करना चाहती थीं जिससे देश के लिए काम करने का मौका मिले।

Shanan School

NDA परिक्षा में AIR 10

साल 2021 में महिलाओं को NDA परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिलने के बाद शानन के सामने नया रास्ता खुला। उन्होंने बिना समय गंवाए परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उसी वर्ष नवंबर में हुई NDA परीक्षा में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया रैंक 10 हासिल करने वाली शानन महिलाओं की श्रेणी में पूरे देश में पहले स्थान पर रहीं।

इस सफलता ने उन्हें NDA के पहले महिला बैच का हिस्सा बना दिया और उनका सपना हकीकत के और करीब पहुंच गया। जून 2022 में शानन ने NDA में प्रशिक्षण शुरू किया। यहां उन्होंने पुरुष कैडेट्स के साथ समान स्तर पर कठिन सैन्य प्रशिक्षण लिया। शारीरिक फिटनेस, नेतृत्व क्षमता, रणनीतिक समझ और अनुशासन से जुड़े कई चरणों को पार करते हुए उन्होंने तीन वर्षों का प्रशिक्षण पूरा किया। मई 2025 में NDA से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्हें सेना में अधिकारी बनने की अंतिम तैयारी के लिए देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी भेजा गया, जहां एक साल का अतिरिक्त प्रशिक्षण दिया गया।

IMA में मिला लेफ्टिनेंट का दर्जा

13 जून 2026 को आयोजित IMA की 158वीं पासिंग आउट परेड शानन और उनके परिवार के लिए यादगार दिन बन गई। इसी समारोह में उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन दिया गया। इस बैच से कुल 515 कैडेट्स सेना में शामिल हुए, जिनमें 9 महिला अधिकारी भी थीं। परेड के बाद आयोजित पिपिंग सेरेमनी में उनके माता-पिता ने उनके कंधों पर लेफ्टिनेंट के सितारे लगाए। यह पल परिवार के लिए भावुक होने के साथ-साथ गर्व से भरा हुआ था।

पहली पोस्टिंग पूर्वी लद्दाख में

सेना में कमीशन मिलने के बाद शानन ढाका की पहली तैनाती पूर्वी लद्दाख में की गई है। यह इलाका देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां की परिस्थितियां भी काफी चुनौतीपूर्ण रहती हैं। ऐसे क्षेत्र में जिम्मेदारी संभालना किसी भी युवा अधिकारी के लिए बड़ी बात मानी जाती है। शानन अब देश की सीमाओं पर अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं।

युवाओं को दिया खास संदेश

शानन का मानना है कि सेना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है। उनका कहना है कि जो युवा सेना में आने का सपना देखते हैं, उन्हें सिर्फ वर्दी का आकर्षण नहीं बल्कि देश के लिए कुछ करने का जज्बा भी अपने भीतर रखना चाहिए। वे लगातार मेहनत करने, बड़े लक्ष्य तय करने और मुश्किल परिस्थितियों में भी हार न मानने की सलाह देती हैं। उनके अनुसार सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है जो लंबे समय तक अपने लक्ष्य पर टिके रहते हैं।

लाखों बेटियों के लिए बनीं मिसाल

NDA की पहली महिला टॉपर बनने से लेकर भारतीय सेना में अधिकारी बनने तक का शानन ढाका का सफर नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा की कहानी बन गया है। उन्होंने यह दिखाया है कि अवसर मिलने पर बेटियां किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं और बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल कर सकती हैं। भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बीच शानन की उपलब्धि उन लड़कियों के लिए भी उम्मीद की नई कहानी लेकर आई है, जो वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का सपना देखती हैं।

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