म्यांमार आर्मी की कार्रवाई से डरे नॉर्थ-ईस्ट के विद्रोही संगठन, अपना ठिकाना बदलने की तैयारी
नई दिल्ली। इंटेलीजेंस एजेंसियों ने नॉर्थ ईस्ट की सुरक्षा पर एक बड़ी जानकारी दी है। इंटेलीजेंस एजेंसियों की मानें तो नॉर्थ ईस्ट के उग्रवादी संगठन जो म्यांमार से संचालित हो रहे हैं, वह इस समय म्यांमार आर्मी के एक्शन से परेशान हैं। एजेंसियों की मानें तो ये संगठन अब अपना ठिकाना बदलने को मजबूर हो गए हैं। एक बार फिर से नॉर्थ ईस्ट राज्यों के बॉर्डर पर आ गए हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ULFA-I और NSCN-K भारत की सुरक्षा एजेंसियों के साथ ही म्यांमार सेना पर भी नजर रख रहे हैं।

कैडर्स को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया
इस समय म्यांमार में ULFA-I (यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असोम इंडिपेंडेंट) और NSCN-K (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-खापलांग) सक्रिय हैं। NSCN-K की अगुवाई इस समय युंग औंग कर रहा है और इसाक मुवियाह का संगठन NSCN-IM (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड) फिर से अपने बेस बॉर्डर के करीब बसाने की कोशिशों में लग गए हैं। पिछले कुछ समय से म्यांमार सेना लगातार इन संगठनों के खिलाफ आक्रामक बनी हुई है। ये संगठन इसकी कार्रवाई से खासे परेशान हो चुके हैं। सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसियों की मानें तो अब यह ठिकाना बदलने की तैयारी में लग गए हैं। ULFA-I अपने कैडर्स को NSCN-K की मदद से सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने में लग गया है।
नागालैंड में जारी है हलचलें
NSCN-IM भी अब खुद का ठिकाना बदलने को तैयार हो रहा है। म्यांमार की सेना लगतार बॉर्डर के इलाकों पर अपनी गतिविधियों को बढ़ा चुकी है। काउंटर इनसर्जेंसी के अधिकारियों की तरफ से बताया गया है कि नॉर्थ-ईस्ट स्थित संगठन किसी भी कार्रवाई से पहले ही अलग-अलग ठिकानों पर चले जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों से इन संगठनों के खिलाफ भारत और म्यांमार की सेनाओं ने तेजी से कार्रवाई की है। इसकी वजह से म्यांमार के भी विद्रोही संगठनों की कमर टूट गई है। ये विद्रोही संगठन भी अपना बेस बदल चुके हैं। सितंबर माह में ही नागालैंड के NSCN-IM ने राज्य के निवासियों के लिए एक अलग झंडे और संविधान की मांग कर डाली है।












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